2010-05-15

समाज सेवी डॉ.. दयाराम आलोक से डॉ..कैलाश चौहान का साक्षात्कार


                                                        श्री गुरु दामोदराय  नम:


डॉ.दयाराम आलोक 

       से





 

डॉ.कैलाश चंद्र चौहान  

         का
 साक्षात्कार  








डॉ. चौहान :--दामोदर दर्जी समाज (darji samaj)के परिवारों की जानकारी की इस किताब के लिये आपसे साक्षात्कार लेना मेरा सौभाग्य है। आप अपना सक्षिप्त जीवन परिचय दें।

डॉ.आलोक :-- शामगढ कस्बे में पुरालाल जी राठौर के कुल में जन्म ११ अगस्त सन १९४० ईस्वी। रेडीमेड वस्त्र बनाकर बेचना पारिवारिक व्यवसाय था। अत्यंत साधारण आर्थिक हालात।हाईस्कूल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद सन १९६१ में शासकीय सेवा में अध्यापक के पद पर नियुक्त।सन १९६९ में राजनीति विषय से एम.ए. किया। चिकित्सा विषयक उपाधियां आयुर्वेद रत्न और होम्योपैथिक उपाधि D I Hom ( London) अर्जित कीं।



डॉ. चौहान :-
आपने दामोदर दर्जी महासंघ(damodar darji mahasangh) कब और किस उद्धेश्य से स्थापित किया?

डॉ.आलोक :- दर्जी समाज के महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों को संगठित ढंग से संपादित करने तथा सामाजिक फ़िजू ल खर्ची रोकने के उद्देश्य से मैने अपने कुछ घनिष्ठ साथियों के सहयोग से सन १९६४ में "दामोदर दर्जी युवक संघ" की स्थापना की और एक कार्यकारिणी समिति बनाई। कालांतर मे विस्तृत होकर यह दर्जी युवक संघ "अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ" के नाम से अस्तित्व में है।
दामोदर दर्जी महासंघ की स्थापना में मुझे शामगढ के डॉ. लक्ष्मी नारायण अलोकिक , श्री रामचन्द्र सिसौदिया ,श्री शंकरलालजी राठौर,श्री कंवरलाजी सिसौदिया,गंगारामजी चोहान शामगढ़, श्री रामचंद्रजी चौहान मनासा ,श्री कन्हैयालालजी परमार गुराड़िया नरसिंग,श्री प्रभुलालजी मकवाना मोडक,श्री देवीलालजी सोलंकी शामगढ़ बोलिया वाले का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। मैने संघ का संविधान सन १९६५ में लिपिबद्ध किया और डॉ. लक्ष्मीनारायणजी अलौकिक के माध्यम से रसायन प्रेस दिल्ली से छपवाकर प्रचारित-प्रसारित किया|

संघ का प्रथम अधिवेशन १४ जुन १९६४ को शामगढ में पूरालालजी राठौर के निवास पर हुआ ।अधिवेशन में २३४ दर्जी बंधु उपस्थित हुए। इस अधिवेशन मे श्री रामचन्द्रजी सिसोदिया को अध्यक्ष , श्री दयाराम जी आलोक को संचालक,और श्री सीताराम ज्री संतोषी को कोषाध्यक्ष बनाया गया। सदस्यता अभियान चलाकर ५० नये पैसे वाले सैंकडों सदस्य बनाये गये।

डॉ.चौहान :-- दामोदर दर्जी समाज के डग स्थित श्री सत्यनारायण मंदिर का जीर्णोद्धार और उद्ध्यापन का काम आपने किस तरह संचालित किया? संक्षेप में बताएं।



डॉ.आलोक :--डग मंदिर की भगवान सत्यनारायण की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान  की प्रतीक्षा मे  मंदिर मे पिछले सात वर्षों से स्थापित नहीं हो पा रही थी| मंदिर के कोष मे बहुत थौड़ी राशि थी, उध्यापन समारोह  के लिए ज्यादा धन की जरूरत थी| ईश्वरीय प्रेरणा के चलते  इसी काम को करने के लिए  मैं १५ मई १९६६ के दिन डग गया था। डग के स्थानीय दर्जी बंधुओं की मिटिंग मन्दिर में बुलाइ गई। लंबे विचार विमर्श के बाद डग के सभी दर्जी बंधुओं(सर्वश्री गोरधन लाल जी सोलंकी,बाल मुकंदजी पंवार,नाथूलाल जी,राम किशनजी,गगाराम जी,सालगराम जी , भगवान जी, रतनलाल जी,नाथूलाल जी,भंवरलाल जी,कन्हैयालाल जी पंवार चेनाजी राठौर आदि) ने एक लिखित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर मंदिर उद्ध्यापन का कार्य मेरे नेतृत्व में दामोदर दर्जी युवक संघ के सुपर्द कर दिया। उस समय मेरी उम्र यही कोई २५ साल की थी। इतनी कम उम्र में डग के बुजुर्ग दर्जी बंधुओं का मंदिर के उद्ध्यापन जैसे बडे और महत्वपूर्ण कार्य के लिये विश्वास हासिल कर लेना मेरी जिंदगी की सबसे बडी सफ़लताओं में से एक है।



उपरोक्त दस्तावेज सन 1966 का है|



डग मंदिर उद्यापन  की आमंत्रण पत्रिका -



बंधुओं,मंदिर में मूर्ति की प्रतिष्ठा करने की कठिन जिम्मेदारी मैने परमात्मा के आशीर्वाद ,समाज के बुजुर्ग,प्रतिष्ठित दर्जी बंधुओं तथा दामोदर दर्जी महासंघ के उत्साही सदस्यों के माध्यम से निभाई और समाज के लोगों के आर्थिक सहयोग से २३ जून १९६६ के दिन डग में भगवान सत्यनारायण की मूर्ति का प्राण प्रतिष्ठा याने भव्य उद्द्यापन समारोह आयोजित किया गया।उल्लेखनीय है कि इसी दिन दामोदर दर्जी युवक संघ का दूसरा जनरल अधिवेशन भी संपन्न हुआ था।
उध्यापन का हिसाब नीचे मुजब है-






डॉ.चौहान :-- सामुहिक विवाह सम्मेलन की नींव डालते हुए आपने रामपुरा में सन १९८१ में प्रथम सामुहिक विवाह सम्मेलन आयोजित कर समाज को एक नई दिशा दी है। इसके बारे में कुछ बताएंगे।


































निमंत्रण पत्रिका  सम्मलेन  2006 बोलिया  पेज २ 





  • डॉ.चौहान :--मैंने आपकी कई कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में पढी हैं । अपनी साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डालें। आलोक:--मेरे अग्रज डॉ. लक्ष्मी नारायण अलौकिक की साहित्यिक गतिविधियों का मुझ पर असीम प्रभाव पडा। ६० के दशक में अलौकिक जी दिल्ली,बिकानेर,मथुरा से प्रकाशित मासिक पत्रिकाओं के सह संपादक रहे। उनके लेख नियमित छपते थे।उन्ही दिनों मैने कविता लिखना प्रारंभ किया। 
मेरी प्रथम रचना " तुमने मेरी चिर साधों को झंकृत और साकार किया है"बिकानेर से निकलने वाली पत्रिका "स्वास्थ्य-सरिता" में सन १९६३ में प्रकाशित हुई थी।स्वर्गीय श्री ज्ञान प्रकाशजी जैन इस मासिक पत्रिका के संपादक थे। कविता लिखने का सिलसिला जारी रहा और मेरी रचनाएं दैनिक नव ज्योति ,दैनिक जागरण,दैनिक इन्दौर समाचार ,प्रजादूत,प्रभात किरण, मालव समाचार ,ध्वज मंदसौर ,नई विधा, डिम्पल आदि पत्र-पत्रिकाओं में नियमित अंतराल से प्रकाशित होते रहे। अब तक करीब १५० रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।
डॉ.चौहान :-- आप संपूर्ण दर्जी परिवारों की जानकारी एकत्र कर रहे हैं ,इसके पीछे आपका क्या प्रयोजन है।
डॉ. आलोक :--जिस समाज के हम अंग हैं उसके बारे में जानकारी एकत्र करना उत्तम कार्य है। सन १९६५ से ही मैने दर्जी परिवारों की जानकारी बकायदा निर्धारित छपे हुए फ़ार्म में लिखनी शुरू कर दी थी। आज महासंघ के दफ़्तर में समाज के सभी परिवारों की जानकारी उपलब्ध है।



मेरे अनुज श्री रमेशचंद्रजी राठौर "आशुतोष" ने दर्जी समाज के परिवारों की जानकारी की तीन स्मारिकाओं का सफ़ल संपादन किया और १९९३ , २००० एवं २०१४ में प्रकाशित ये पुस्तकें आज दर्जी समाज की जानकारी प्राप्त करने के संदर्भ ग्रंथ के रूप में प्रचलित हैं।सन 2000 में प्रकाशित ’समाज ज्ञान गंगा” का वित्त पोषण भवानीशंकरजी चौहान सुवासरा ने किया और गांव-गांव जाकर दर्जी बंधुओं की जानकारी भी उन्होने एकत्र की थी। समाज के लोगों की जानकारी इकट्ठा करना बेहद कठिन काम है। आपने मोटर साइकल के माध्यम से समाज की यात्रा की ।अब जो जानकारी आपने एकत्र की उसके आधार पर भविष्य में भी समाज की नई पुस्तक छापने में मदद मिलेगी।इस उच्चकोटि के सामाजिक समर्पण के लिये भवानी शंकर जी चौहान की जितनी भी प्रशंसा की जाए थौडी है।
डॉ. चौहान :-- अंत में, आप दर्जी समाज को क्या संदेश देना चाहेंगे?
डॉ.आलोक-:--देखिये,अन्य समाज के लोगों ने भी दर्जी का धंधा अपना लिया है। इससे दर्जी समाज के सामने चुनौतियां खडी हो गई है। अत:हमें अपने बच्चों की पढाई पर ज्यादा ध्यान देना होगा और अपने बच्चों को अच्छे टेलर मास्टर से काम सिखाना होगा।
कम उम्र के लडके-लडकियों के सगाई संबन्ध करना ठीक नहीं है।
सगाई और शादी के बीच एक साल से ज्यादा का अंतर ठीक नहीं होता है।इसके बावजूद अगर लडकी या लडके की नापसंदगी की वजह से सगाई टूटती है तो इसको लेकर शत्रुता का भाव रखना उचित नहीं है।
मौसर प्रथा गरीब दर्जी समाज की आर्थिक बुनियाद को हिलाकर रख देने वाली कुप्रथा है। दर्जी महासंघ के अधिवेशन में मौसर की अनुपयोगिता पर एक प्रस्ताव पारित किया गया था | मैंने उसके बाद कभी मौसर का भोज गृहण नहीं किया|| मुझे प्रसन्नता है कि मेरे इस संकल्प में मेरा परिवार भी मेरे साथ खड़ा है| फ़िर भी चूंकि मौसर सैंकडों साल पुरानी कुप्रथा है ,इसलिये सामाजिक मान्यताओं के कारण मजबूरी में मौसर करना ही पडे तो अपनी आर्थिक शक्ति  के हिसाब से ही  व्यक्तियों को  आमंत्रित करना चाहिये। हाँ  जिन्हें आमंत्रित करें  उनका रुचिकर भोजन  से आतिथ्य करें| 

सामूहिक विवाह में शादी करके धन की बचत करना चाहिये। जिन दर्जी बंधुओं के घर के मकान नहीं हैं उनके लडकों के संबंध करने में अब थौडी दिक्कत आने लगी है। अपनी पुत्री के लिये योग्य वर की तलाश हर पिता का फ़र्ज है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिये कुछ लोग दाहोद,झाबुआ राणापुर की तरफ़ संबंध करते हैं। इधर समाज में यह चर्चा जोरों पर है कि जो लोग अपनी लडकियां बाहर वाले दर्जियों को देंगे उन पर प्रतिबंध लगाया जावे। मेरा अपना मत है कि प्रतिबंध लगाना लडकियों के लिये योग्य वर की तलाश करने में बाधक और गैर कानूनी कदम होगा । हमारे पूर्वजों ने भी रामपुरा के कुछ दर्जी बंधुओं के खिलाफ़ जाति से निष्कासन के निर्णय लिये थे लेकिन कालान्तर में वे निर्णय सफ़ल नहीं हुए। मेरा तो यह मत है कि सम्पूर्ण दर्जी समाज एक है|| दामोदर वंशीय,पीपा वंशीय,नामदेव वंशीय एवं अन्य दर्जी समाज के लडके -लड़कियों के आपसी विवाहों को प्रोत्साहित करना आज की जरूरत है|
कुल मिलाकर अब शादी संबंधों के मामले में अच्छे पढे लिखे और स्वयं के मकान वाले लडकों की मांग बढ रही है। घर का मकान और पढाई दोनों बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
डॉ.चौहान - आपने इंटरनेट के माध्यम से सैंकडों चिकित्सा लेख लिखे हैं| देश विदेश के करोड़ों पाठक इन लेखों को पढकर लाभान्वित हो रहे हैं| लेकिन जिन लोगों को इंटरनेट की ज्यादा जानकारी नहीं है उनकी सुविधा के लिए आप अपनी वेब साईटों के पते (url) की लिस्ट प्रस्तुत करने का कष्ट करें ताकि पाठक आसानी से आपके चिकित्सा लेख पढ़ सकें|
डॉ.आलोक- मैंने इंटरनेट पर ब्लॉग सृजित कर सैकडों चिकित्सा लेखों में अपनी ४० वर्षों के  चिकित्सा  अनुभवों को जन कल्याण की भावना से प्रस्तुत किया है| मेरे द्वारा लिखे
गए ब्लॉग के पते नीचे लिख रहा हूं-

http//:homenaturecure.blogspot.com
asannuskhe.blogspot.com
ddayaram.blogspot.com
healinathome.blogspot.com
surecureblog.wordpress.com
दामोदर वंशीय दरजी समाज की वेब साईट का पता निम्न है-
damodarjagat.blogspot.com
मेरी कविताएं जो हिन्दी की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है उनका संक्षिप्त संकलन मैंने अपने निम्न ब्लॉग में प्रस्तुत किया है -

kavitalok.blogspot.com
कई वर्षों से मैं दामोदर वंशीय दर्जी समाज के लोगों की वंशावली की जानकारियाँ एकत्र कर इंटरनेट पर अपलोड कर रहा हूँ| अभी तक लगभग 11500  व्यक्तियों की परिचय फाईलें वेब साईट पर डाल दी गयी हैं| इसके लिए वेब साईट है -
geni.com

और
myheritage.com

"दामोदर दर्जी जगत " वेब साईट  पर भी दर्जी समाज के  वंशावली के चार्ट बनाकर डाल दिये गए हैं| जिस व्यक्ति का वंशावली चार्ट  आप देखना चाहते हैं  उसका नाम,गौत्र,ठिकाना लिखकर सर्च कर सकते हैं| पहिले google पर जाएँ और सर्च बाक्स मे निम्न प्रकार लिखकर  वंशावली चार्ट  देख सकते हैं-
vanshavali darji shamgarh 
vanshavali darji rampura 
   vanshavali darji bhawani mandi 
 मैंने  दर्जी समाज के  शादी ,मोसर  आदि आयोजनों मे उपस्थित  होकर दर्जी बंधुओं और महिलाओं के करीब 4 हजार फोटो  अपने केमरे  से लेकर  इन्टरनेट की विभिन्न साईटों पर लोड  कर दिये हैं|| फोटो देखने के लिए गूगल ब्राऊजर के इमेज मे जाएँ , सर्च बाक्स मे निम्न प्रकार लिखकर सर्च करें और फोटो देख सकते हैं|
ramesh makwana kota
bherulal rathore darji shamgarh
lalchand sisodiya darji melkheda
kanwarlal panwar darji awar
आपको दो स्थानों के दर्जी बंधुओं के फोटो देखने हों तो गूगल इमेज में ऐसे लिखें- 

garoth shamgarh
shamgarh suwasara
ranapur jhabua,
dahod limdi,
hatuniya lasudiya
melkheda chandwasa
किसी व्यक्ति का नाम और निवास स्थान का नाम लिखने पर भी उसकी फाईल का पता स्क्रीन पर आ सकता है| अब इस लिंक को क्लिक करने पर उस व्यक्ति की फाईल खुल जाएगी|
दरजी बंधुओं ,
आपको मालूम है कि मैं स्वजाति बंधुओं के फोटो इंटरनेट की विभिन्न वेब साईट पर अपलोड कर रहा हूँ| अभी तक हजारों दर्जी व्यक्तियों के फोटो नेट पर लगा दिए गए हैं|
कैसे ढूंढेगे किसी दर्जी बंधू का फोटो ?
यह बहुत सरल है| जिस व्यक्ति का फोटो देखना है उसका नाम और निवास गूगल में
image में लिखें| enter दबाएँ| बस उस व्यक्ति का चित्र आपके सामने होगा| जैसे -

dayaram aalok shamgarh

gangaram panwar dag

uderam sagoriya

ranchod hatuniya

arjunlal suwasara

नोट - कुछ गाँवों की स्पेलिंग अलग अलग तरीके की हो सकती है जैसे -

mitankhedi,mittankhedi,mitthankhedi

suvasara,suwasara

rincha reenchha

अत: आप स्पेलिंग बदलते रहें जब तक वांछित परिणाम न मिले|
गौत्र के आधार पर आप उस गौत्र के सभी दर्जियों के चित्र एक साथ देख सकते हैं| जैसे-
darji chohan, darji rathore, darji goyal, darji rathore आदि.
निवास स्थान के आधार पर दर्जी बंधुओं के चित्र देखने के लिए -
darji rampura,darji melkheda, darji dag, darji suwasara आदि शब्द
लिखकर सर्च कर सकते हैं|
इसके अलावा google image में निम्न key words लिखकर आप दर्जी बंधुओं के सैंकड़ों चित्र देख सकते हैं| जैसे-
darji yatra, darji omkareshwar ,yatra mount , darji amarnath yatra, darji yatra south,
darji sammelan
darji samman
darji vivah
darji marriage
darji dulhan
darji women
damodar darji people,damodar darji samaj, damodar darji community, darji people pictures
जिन दर्जी लोगों के फोटो नेट पर नहीं है वे कभी भी मेरे पास आकार फोटो खिंचवा सकते हैं|