श्री भेसासरी माताजी की छाया, ढाबला भगवान का दिव्य आँगन— मनोकामना पूर्ण करतीं माताजी, भक्तों के लिए बैठने का पावन आयोजन। डॉ. आलोक का संकल्प महान, भक्ति और सेवा का अनुपम गान…
ढाबला भगवान का दिव्य आँगन— मनोकामना पूर्ण करतीं माताजी, भक्तों के लिए बैठने का पावन आयोजन। डॉ. आलोक का संकल्प महान, भक्ति और सेवा का अनुपम गान…
श्री भेसासरी माताजी मंदिर, ढाबला भगवान - 4 बेंच समर्पित
भारत की पुण्यभूमि पर देवस्थानों का अपना अलौकिक महात्म्य है। जहाँ श्रद्धा है, वहीं शक्ति है और जहाँ शक्ति है, वहीं भक्तों के कष्टों का निवारण है। ऐसा ही एक पावन धाम है - ढाबला भगवान स्थित श्री भेसासरी माताजी मंदिर।
ढाबला भगवान का पावन धाम,
भेसासरी माताजी का अद्भुत नाम।
महिषासुर मर्दिनी की महिमा अपार,
भक्तों की मनोकामना करतीं साकार।
हिन्दू धर्मशास्त्रों और पुराणों में वर्णित महिषासुर मर्दिनी के रूप में पूजित माँ भेसासरी महारानी की कथा अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी है। यहाँ वे गोयल कुल की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।
मंदिर की विशेषताएँ ही इसकी दिव्यता का प्रमाण हैं -विशाल प्रांगण जहाँ मेले और भक्तों का समागम होता है,
देवी की अति मनोहर और तेजस्वी प्रतिमा जिसके दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है,
कष्ट निवारण की अटूट मान्यता, जहाँ सच्चे मन से माँगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है,
और मांगलिक भवन के रूप में इसका उपयोग, जो इसे केवल मंदिर नहीं, बल्कि लोक-मंगल का केंद्र बनाता है।
विशाल प्रांगण, प्रतिमा मनोहर,
कष्ट निवारण का है विश्वास अमर।
ऐसे दिव्य धाम की सेवा में जब श्रद्धा और सुविधा का संगम होता है, तो वह दान नहीं, अनुष्ठान बन जाता है।
इसी अनुष्ठान के एक पुण्य पड़ाव के रूप में समाजसेवी, साहित्य मनीषी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक, शामगढ़ द्वारा दिनांक ३ मार्च २०२४ को श्री भेसासरी माताजी मंदिर, ढाबला भगवान हेतु ४ सीमेंट बेंचें सप्रेम समर्पित की गईं। यह दान उनके सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के नाम से समर्पित है।
डॉ. आलोक जी का यह कार्य कोई सामान्य दान नहीं है। यह उनका 'आध्यात्मिक दान-पथ' है। आपने अपनी पाँच वर्ष की कुल पेंशन राशि को ईश्वर सेवा में अर्पित करने का महासंकल्प लिया है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट बेंचें और निर्माण व रंग-रोगन हेतु नकद दान का यह क्रम अनवरत चल रहा है। इसमें उनकी गूगल कंपनी से ब्लॉग और यूट्यूब चैनल से प्राप्त आय भी समाहित है।
डॉ. दयाराम आलोक का संकल्प महान,
चार सिमेन्ट बेंचों का दान प्रमाण।
मंदिर समिति और ग्रामजनों ने इस सेवा-भावना का हृदय से सम्मान किया है। मंदिर प्रांगण में कृतज्ञता स्वरूप शिलालेख स्थापित किया गया है, जिसके निर्माता हैं श्री दिनेश जी व्यास, आर्ट सुवासरा। इस पुण्य कार्य के साक्षी और शुभचिंतक रहे - अध्यक्ष श्री विश्वकर्माजी सरपंच एवं सचिव श्री शिवराज सिंह जी देवड़ा।
इस अवसर पर भावांजलि स्वरूप यह श्लोक समर्पित है -
भेसासरी महिषासुरमर्दिनी देवी
कष्टनिवारिणि कृपामयी सदा।
आलोकनाथेन प्रदत्ताः बेंचाः
भक्तानामारामविधायि शुभाः॥
अर्थात - कष्टों का निवारण करने वाली, सदा कृपामयी महिषासुर मर्दिनी देवी भेसासरी के धाम में आलोक जी द्वारा प्रदत्त ये बेंचें भक्तों को सुख और विश्राम प्रदान करने वाली हों।
आइये, इस पावन कथा और सेवा-यात्रा का दर्शन करें।
बोलिए भेसासरी महारानी की जय!
ढाबला भगवान का पावन धाम, भेसासरी माताजी का अद्भुत नाम। महिषासुर मर्दिनी की महिमा अपार, भक्तों की मनोकामना करतीं साकार।
विशाल प्रांगण, प्रतिमा मनोहर, कष्ट निवारण का है विश्वास अमर। मांगलिक भवन बने शुभ स्थान, देवी की कृपा से मिटे हर क्लेश महान।
डॉ. दयाराम आलोक का संकल्प महान, चार सिमेन्ट बेंचों का दान प्रमाण। सेवा, सुविधा और श्रद्धा का संगम, मंदिर समिति ने किया सम्मान का प्रसंग।
शिलालेख में अंकित आभार गान, ग्राम जन ने किया दाता का सम्मान। भेसासरी महारानी की जय पुकार, भक्तों के हृदय में उमड़े अपार।
*श्लोक *
भेसासरी महिषासुरमर्दिनी देवी
कष्टनिवारिणि कृपामयी सदा।
आलोकनाथेन प्रदत्ताः बेंचाः
भक्तानामारामविधायि शुभाः॥
श्री भेसासरी माताजी मंदिर ढाबला
भगवान हेतु
समाजसेवी डॉ.दयाराम जी आलोक द्वारा
सीमेंट बेंचें समर्पित
मंदिर की विशेषताएं:
- विशाल प्रांगण
- देवी की अति सुंदर प्रतिमा
- भक्तों के कष्ट निवारण की मान्यता
- मांगलिक भवन के रूप में उपयोग
समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोक जी शामगढ़ का योगदान:
- 4 सिमेन्ट बेंचें समर्पित
- आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के तहत
- मंदिर की सेवा और सुविधा के लिए
मंदिर समिति और ग्राम जन का आभार:
- दान दाता का सम्मान
- आभार व्यक्त करना
- शिलालेख मंदिर में लगवाया
बोलिए भेसासरी महाराणी की जय!
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
श्री भेसासरी माताजी मंदिर ढाबला भगवान हेतु
4 सीमेंट बेंचें दान
विश्वकर्माजी सरपंच ९४२४०-९८०५५ -अध्यक्ष
शिवराज सिंग जी देवड़ा -सचिव
दिनेश जी व्यास आर्ट सुवासरा -शिलालेख निर्माता
डॉ.अनिल कुमार दामोदर आत्मज डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा श्री भेसासरी माताजी मंदिर ढाबला भगवान् हेतु दान संपन्न ३/३/२०२४
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