}

2.5.26

लखाजी मकवाना रामपुरा की वंशावली -सितारामजी,बोतलालजी बालमुकंदजी ,देवीलालजी ,कचरुलालजी ,उँकारजी ,शोभारामजी

 इस वंशावली के निर्माण मे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी उपयोग मे लाई गई है फिर भी वंशावली त्रुटिविहीन हो ,ऐसा प्रयास किया गया है|
*वंशावली मे शीर्ष पुरुष के पुत्र और पुत्री के वंशज शामिल किए जाते हैं|
*जन्म और मृत्यु दिनांक मे कुछ गलत हो तो सूचित करें|
*पीढ़ी बताने वाले अंक नाम के पहिले यानि शुरू मे लिखे गए हैं|
*जिस पुरुष की पत्नि का उल्लेख नहीं है ,आप जानते हों तो जरूर बतावें|
*सभी नाम लिंक रूप मे हैं ,लिंक खोलकर उस व्यक्ति की पूरी फाईल देख सकते हैं|


                                                 3. रामदयाल जी मकवाना दर्जी धार-     

1. लक्खाजी मकवाना दर्जी रामपुरा1. लक्खाजी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1867; d. 1953
2. बोतलाल जी लखाजी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 16 अगस्त, 1891; d. 5 सितम्बर, 1948
└ +केसर बाई चौहान- बोत लाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 16 मई, 1888; d. 6 जुलाई, 1947
3. बालमुकंद मकवाना दर्जी रामपुरा b. 11 जुलाई, 1928, rampura, neemuch, madhya pradesh, India; d. 2 अगस्त, 2001
└ +चतरी बाई पँवारw/o बालमुकंद जी मकवाना रामपुरा b. 14 अप्रैल, 1934, Awar, Jhalawar, RJ, India; d. 25 फरवरी, 2021, Rampura, Neemuch, MP, India
4. प्रभा मकवाना -दशरथ राठौर दर्जी दाहोद b. 1963
4. दिनेश मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1963
4. अरुण मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1965
4. प्रज्ञा w/o रमेश चौहान दर्जी मनासा b. 12 अप्रैल, 1970
4. प्रीती बाला पिता बाल मुकंद मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1973
3. रामदयाल जी मकवाना दर्जी धार-- ०७३९२-२२३०४९ b. 1930
└ +राधा बाई पिता भेरुलाल पड़िहार कोठडी b. 13 अगस्त, 1933; d. 7 दिसंबर, 1987
4. सुमित्रा - दिनेश कन्हैया लाल जी परमार रानापुर b. 1952
4. सुलभा-दिलीप परमार दर्जी झाबुआ b. 1970
4. सविता बेन w/o मनोज कुमार परमार दर्जी दाहोद b. 1974
4. कमलेश मकवाना दर्जी झाबुआ b. 1955
4. सुचित्रा-विनोद चौहान दर्जि दाहोद b. 1958
4. सुधा- राजेश शांतिलाल परमार दर्जी दाहोद b. 1960, धार, मध्य प्रदेश , भारत (India)
4. सुनीता - रविकांत चंदूलाल परमार दर्जी दाहोद b. 1962
4. संजय मकवाना दर्जी धार b. 1970
4. राजेश मकवाना दर्जी धार - ९९९३९८४३७६ b. 1972
3. मोहन बाई मकवाना w/o राम किशन गोयल दर्जी खीमच b. 25 मई, 1931; d. 3 जून, 2012
└ +राम किशन जी गोयल खीमच b. 18 जुलाई, 1920; d. 16 मई, 1995
4. रूप चंद जी गोयल भवानी मंडी, महासंघ परामर्शदाता b. 15 जुलाई, 1946
4. राधेश्याम जी गोयल खीमच,महासंघ परामर्श दाता b. 4 अक्टूबर, 1948
4. सुशीला पिता राम किशन जी दर्जी खिमच b. 1950
4. रमेश गोयल दर्जी खीमच--08875095187 b. लगभग 16 मार्च, 1953
4. लीला w/o रामचंद्र सोलंकी डग b. 5 सितम्बर, 1954
4. संपत बाई गोयल -राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1958
4. अरविंद गोयल दर्जी खीमच--09929995839 b. 1960
4. प्रकाश गोयल दर्जी खीनच - ९५७१६-४५१२३ b. 3 जून, 1968
4. d/o ramkishan kheemuch b. 1964
3. संतोष बाई मकवाना w/o भवानी राम जी परमार रामपुरा से कचनारा b. 3 मई, 1934; d. 27 मई, 1992
└ +भवानी राम परमार दर्जी रामपुरा b. 1914; d. 1989
4. मोहन लाल जी s/o भवानी राम जी परमार दर्जी कचनारा b. 7 अक्टूबर, 1942, दर्जी मोहल्ला, रामपुरा, नीमच , मध्य प्रदेश; d. 1 सितम्बर, 2020, कचनारा, मंदसौर, मध्य प्रदेश, भारत (India)
3. कमला w/o माँगीलाल परमार दर्जी रानापुर b. 17 जुलाई, 1932; d. 1 मई, 2018, Ranapur, Jhabua, Madhya Pradesh, India
└ +मांगीलाल जी परमार दर्जी रानापुर b. 17 अगस्त, 1930; d. 21 अक्टूबर, 2014, ranapur, jhabua , madhya pradesh, India
4. सुमित्रा w/o गीरीश सोलंकी दर्जी दाहोद b. 23 अक्टूबर, 1952
4. चंद्रकांत परमार दर्जी रानापुर---9755365857 b. 1 मार्च, 1955
4. मुकेश परमार दर्जी रानापुर d. 17 नवंबर, 2025
2. देवीलाल जी s/o लखाजी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 21 अगस्त, 1901; d. 8 सितम्बर, 1980
└ +सूरज बाई w/o देवीलाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 29 नवंबर, 1905; d. 17 जुलाई, 1965
3. हीरालाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1930; d. 2003
└ +देवुबाई पिता जगन्नाथ गोयल दर्जी धरनावद b. 1955, dharnawad, jhalawad , rajasthan
4. बाबूलाल मकवाना दर्जी रामपुरा--9753746453 b. लगभग 14 मई, 1983
4. लक्ष्मीनारायण मकवाना दरजी रामपुरा b. 1988
└ +भंवरी बाई w/o हीरालाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 5 जून, 1935; d. after 1996
3. गोविन्द मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1936; d. 2003
└ +रामकन्या पिता सुखलाल राठौर दर्जी रींछा देवड़ा b. 1936; d. 2004
4. बिहारीलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1978
4. महेश मकवाना दर्जी मोड़क (नेमीचंद आवर वाले ने दत्तक रखा) b. 1981
4. यशवन्त मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1968
4. सुमित्रा मकवाना -ओम प्रकाश मकवाना दर्जी चोकुंडा b. 1983
3. गीताबाई w/o कन्हैयालाल दर्जी झाबुआ b. 25 मई, 1941, rampura, neemuch, madhya pradesh, bharat; d. 4 अप्रैल, 1996
└ +कन्हैया लाल दर्जी झाबुआ
3. कलाबाई w/o जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 5 दिसंबर, 1943
└ +जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1937; d. 1998
4. हरेन्द्र सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1960
4. दिनेश सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1965
4. मिनाक्षी पिता जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1967
4. कैलाश बेन पिता जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1970
3. सत्य नारायण जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. before फरवरी 7, 1944; d. after 2003
└ +राधा बाई चौहान w/o सत्य नारायण जी मकवाना दर्जी नागदा/रामपुरा से b. 28 नवंबर, 1945, manasa, neemuch, madhya pradesh, bharat
4. ममता मकवाना w/o दीपक जी मेहता दर्जी बडोदरा b. 25 मई, 1971, rampura, neemuch , madhya pradesh, bharat
4. हेमन्त चोहान दर्जी नागदा फ़िलहाल मुम्बई b. 9 अक्टूबर, 1974
3. सुमित्रा बाई ----दर्जी झाबुआ
2. कचरु लाल जी मकवाना गायरी खेड़ा रामपुरा वाले
3. कचरु लालजी मकवाना रामपुरा से गायरी खेड़ा
└ +कचरुजी की पत्नी अडमल्या की
4. कैलाश मकवाना गायरी खेड़ा
2. उंकारजी मकवाना रामपुरा
2. शोभाराम जी मकवाना रामपुरा
└ +Unknown
3. कचरु लाल जी मकवाना दर्जी गारिया खेड़ा
4. कैलाश कचरू लाल मकवाना गारिया खेड़ा
└ +राम कन्या बाई राठौर w/o लक्खाजी मकवाना रामपुरा b. 7 फरवरी, 1891; d. 1950
2. सीताराम जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1906, रामपुरा, मध्य प्रदेश; d. 1978
└ +नारायणी बाई राठौर w/o -सीताराम जी मकवाना रामपुरा b. Sandhara, Mandsaur, MP, India
3. बापू लाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1916, रामपुरा, नीमुच , मध्य प्रदेश; d. 1993
└ +लीला बाई w/o बपुलाल जी मकवाना रामपुरा b. 8 फरवरी, 1919, rampura, madhya pradesh, bharat; d. 9 अगस्त, 1990
4. जगदीश मकवाना दर्जी रामपुरा -- ९६९१०-50025 b. 1949
4. रामुबाई w/o उंकारलाल जी पंवार दर्जी अडमलिया b. 3 सितम्बर, 1951
4. शांतिलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. रामपुरा, Neemuch, मध्य प्रदेश, भारत (India)
4. रमण लाल मकवाना दर्जी रामपुरा
4. नन्द किशोर मकवाना दर्जी रामपुरा
4. मंजुबई मकवाना w/o ----रींछा देवड़ा
3. भैया लाल मकवाना दर्जी रतनगढ़ / रामपुरा वाला b. 1922; d. 2001
└ +लीला बाई w/o भैयालाल जी मकवाना रत्न गढ़ /रामपुरा से b. 5 फरवरी, 1925; d. 8 जून, 1996
4. चन्द्रकला w/o नटवर लाल परमार दर्जी दाहोद b. 18 नवंबर, 1950
 


4. रमेश मकवाना पिता गोरधन लाल जी मकवाना (दत्तक पुत्र भैयालाल जी मकवाना ) b. 28 अक्टूबर, 1956, ratangarh, neemuch, madhya pradesh, bharat
4. अन्नपूर्णा w/o ईश्वर लाल जी राठौर लिमड़ी b. 25 मई, 1958
3. जवाब बाई - लल्लू भाई - मूलजी भाई दर्जी दाहोद b. 1924, रामपुरा, नीमच , भारत (India); d. 1998, dahod, gujrat, bharat
└ +लल्लू भाई मूलजी भाई परमार दर्जी दाहोद b. 1932; d. 2006
4. जामू बेन - कन्हैया लाल पन्नालाल परमार दर्जी दाहोद b. 1944
4. प्राण लाल परमार दर्जी दाहोद b. 1950
└ +जवाब बाई -लल्लू भाई दर्जी दाहोद
3. गोरधन लाल मकवाना दर्जी रतन गढ़ b. 16 सितम्बर, 1931; d. 5 जून, 1997
└ +गीता बाई चौहान w/o गोरधन जी सीतारामजी मकवाना दरजी रतनगढ b. 1934; d. 1994
4. मंजू मकवाना w/o बाबूलाल जी नामदेव दर्जी बिलालपुर b. 8 मार्च, 1960
4. मनोरमा बाई मकवाना w/o राजेंद्र जी परमार दर्जी रानापुर b. 31 दिसंबर, 1968
4. चंद्रकला मकवाना w/o नटवर लाल जी दर्जी दाहोद
4. मधुबाला मकवाना w/o सुभाष राठौर लिमड़ी
3. सोनी बाई - द्वारका दास -मूलजि भाई परमार दर्जी दाहोद└ +द्वारका दास मूलजी भाई दाहोद b. 1867; d. 1953
└ +Unknown
2. बोतलाल जी लखाजी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 16 अगस्त, 1891; d. 5 सितम्बर, 1948
└ +केसर बाई चौहान- बोत लाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 16 मई, 1888; d. 6 जुलाई, 1947
3. बालमुकंद मकवाना दर्जी रामपुरा b. 11 जुलाई, 1928, rampura, neemuch, madhya pradesh, India; d. 2 अगस्त, 2001
└ +चतरी बाई पँवारw/o बालमुकंद जी मकवाना रामपुरा b. 14 अप्रैल, 1934, Awar, Jhalawar, RJ, India; d. 25 फरवरी, 2021, Rampura, Neemuch, MP, India
4. प्रभा मकवाना -दशरथ राठौर दर्जी दाहोद b. 1963
4. दिनेश मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1963
4. अरुण मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1965
4. प्रज्ञा w/o रमेश चौहान दर्जी मनासा b. 12 अप्रैल, 1970
4. प्रीती बाला पिता बाल मुकंद मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1973
3. रामदयाल जी मकवाना दर्जी धार-- ०७३९२-२२३०४९ b. 1930
└ +राधा बाई पिता भेरुलाल पड़िहार कोठडी b. 13 अगस्त, 1933; d. 7 दिसंबर, 1987
4. सुमित्रा - दिनेश कन्हैया लाल जी परमार रानापुर b. 1952
4. सुलभा-दिलीप परमार दर्जी झाबुआ b. 1970
4. सविता बेन w/o मनोज कुमार परमार दर्जी दाहोद b. 1974
4. कमलेश मकवाना दर्जी झाबुआ b. 1955
4. सुचित्रा-विनोद चौहान दर्जि दाहोद b. 1958
4. सुधा- राजेश शांतिलाल परमार दर्जी दाहोद b. 1960, धार, मध्य प्रदेश , भारत (India)
4. सुनीता - रविकांत चंदूलाल परमार दर्जी दाहोद b. 1962
4. संजय मकवाना दर्जी धार b. 1970
4. राजेश मकवाना दर्जी धार - ९९९३९८४३७६ b. 1972
3. मोहन बाई मकवाना w/o राम किशन गोयल दर्जी खीमच b. 25 मई, 1931; d. 3 जून, 2012
└ +राम किशन जी गोयल खीमच b. 18 जुलाई, 1920; d. 16 मई, 1995
4. रूप चंद जी गोयल भवानी मंडी, महासंघ परामर्शदाता b. 15 जुलाई, 1946
4. राधेश्याम जी गोयल खीमच,महासंघ परामर्श दाता b. 4 अक्टूबर, 1948
4. सुशीला पिता राम किशन जी दर्जी खिमच b. 1950
4. रमेश गोयल दर्जी खीमच--08875095187 b. लगभग 16 मार्च, 1953
4. लीला w/o रामचंद्र सोलंकी डग b. 5 सितम्बर, 1954
4. संपत बाई गोयल -राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1958
4. अरविंद गोयल दर्जी खीमच--09929995839 b. 1960
4. प्रकाश गोयल दर्जी खीनच - ९५७१६-४५१२३ b. 3 जून, 1968
4. d/o ramkishan kheemuch b. 1964
3. संतोष बाई मकवाना w/o भवानी राम जी परमार रामपुरा से कचनारा b. 3 मई, 1934; d. 27 मई, 1992
└ +भवानी राम परमार दर्जी रामपुरा b. 1914; d. 1989
4. मोहन लाल जी s/o भवानी राम जी परमार दर्जी कचनारा b. 7 अक्टूबर, 1942, दर्जी मोहल्ला, रामपुरा, नीमच , मध्य प्रदेश; d. 1 सितम्बर, 2020, कचनारा, मंदसौर, मध्य प्रदेश, भारत (India)
3. कमला w/o माँगीलाल परमार दर्जी रानापुर b. 17 जुलाई, 1932; d. 1 मई, 2018, Ranapur, Jhabua, Madhya Pradesh, India
└ +मांगीलाल जी परमार दर्जी रानापुर b. 17 अगस्त, 1930; d. 21 अक्टूबर, 2014, ranapur, jhabua , madhya pradesh, India
4. सुमित्रा w/o गीरीश सोलंकी दर्जी दाहोद b. 23 अक्टूबर, 1952
4. चंद्रकांत परमार दर्जी रानापुर---9755365857 b. 1 मार्च, 1955
4. मुकेश परमार दर्जी रानापुर d. 17 नवंबर, 2025
2. देवीलाल जी s/o लखाजी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 21 अगस्त, 1901; d. 8 सितम्बर, 1980
└ +सूरज बाई w/o देवीलाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 29 नवंबर, 1905; d. 17 जुलाई, 1965
3. हीरालाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1930; d. 2003
└ +देवुबाई पिता जगन्नाथ गोयल दर्जी धरनावद b. 1955, dharnawad, jhalawad , rajasthan
4. बाबूलाल मकवाना दर्जी रामपुरा--9753746453 b. लगभग 14 मई, 1983
4. लक्ष्मीनारायण मकवाना दरजी रामपुरा b. 1988
└ +भंवरी बाई w/o हीरालाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 5 जून, 1935; d. after 1996
3. गोविन्द मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1936; d. 2003
└ +रामकन्या पिता सुखलाल राठौर दर्जी रींछा देवड़ा b. 1936; d. 2004
4. बिहारीलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1978
4. महेश मकवाना दर्जी मोड़क (नेमीचंद आवर वाले ने दत्तक रखा) b. 1981
4. यशवन्त मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1968
4. सुमित्रा मकवाना -ओम प्रकाश मकवाना दर्जी चोकुंडा b. 1983
3. गीताबाई w/o कन्हैयालाल दर्जी झाबुआ b. 25 मई, 1941, rampura, neemuch, madhya pradesh, bharat; d. 4 अप्रैल, 1996
└ +कन्हैया लाल दर्जी झाबुआ
3. कलाबाई w/o जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 5 दिसंबर, 1943
└ +जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1937; d. 1998
4. हरेन्द्र सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1960
4. दिनेश सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1965
4. मिनाक्षी पिता जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1967
4. कैलाश बेन पिता जीतमल सोलंकी दर्जी दाहोद b. 1970
3. सत्य नारायण जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. before फरवरी 7, 1944; d. after 2003
└ +राधा बाई चौहान w/o सत्य नारायण जी मकवाना दर्जी नागदा/रामपुरा से b. 28 नवंबर, 1945, manasa, neemuch, madhya pradesh, bharat
4. ममता मकवाना w/o दीपक जी मेहता दर्जी बडोदरा b. 25 मई, 1971, rampura, neemuch , madhya pradesh, bharat
4. हेमन्त चोहान दर्जी नागदा फ़िलहाल मुम्बई b. 9 अक्टूबर, 1974
3. सुमित्रा बाई ----दर्जी झाबुआ
2. कचरु लाल जी मकवाना गायरी खेड़ा रामपुरा वाले
└ +Unknown
3. कचरु लालजी मकवाना रामपुरा से गायरी खेड़ा
└ +कचरुजी की पत्नी अडमल्या की
4. कैलाश मकवाना गायरी खेड़ा
2. उंकारजी मकवाना रामपुरा
2. शोभाराम जी मकवाना रामपुरा
└ +Unknown
3. कचरु लाल जी मकवाना दर्जी गारिया खेड़ा
└ +Unknown
4. कैलाश कचरू लाल मकवाना गारिया खेड़ा
└ +राम कन्या बाई राठौर w/o लक्खाजी मकवाना रामपुरा b. 7 फरवरी, 1891; d. 1950
2. सीताराम जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1906, रामपुरा, मध्य प्रदेश; d. 1978
└ +नारायणी बाई राठौर w/o -सीताराम जी मकवाना रामपुरा b. Sandhara, Mandsaur, MP, India
3. बापू लाल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1916, रामपुरा, नीमुच , मध्य प्रदेश; d. 1993
└ +लीला बाई w/o बपुलाल जी मकवाना रामपुरा b. 8 फरवरी, 1919, rampura, madhya pradesh, bharat; d. 9 अगस्त, 1990
4. जगदीश मकवाना दर्जी रामपुरा -- ९६९१०-50025 b. 1949
4. रामुबाई w/o उंकारलाल जी पंवार दर्जी अडमलिया b. 3 सितम्बर, 1951
4. शांतिलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. रामपुरा, Neemuch, मध्य प्रदेश, भारत (India)
4. रमण लाल मकवाना दर्जी रामपुरा
4. नन्द किशोर मकवाना दर्जी रामपुरा
4. मंजुबई मकवाना w/o ----रींछा देवड़ा
3. भैया लाल मकवाना दर्जी रतनगढ़ / रामपुरा वाला b. 1922; d. 2001
└ +लीला बाई w/o भैयालाल जी मकवाना रत्न गढ़ /रामपुरा से b. 5 फरवरी, 1925; d. 8 जून, 1996
4. चन्द्रकला w/o नटवर लाल परमार दर्जी दाहोद b. 18 नवंबर, 1950
4. रमेश मकवाना पिता गोरधन लाल जी मकवाना (दत्तक पुत्र भैयालाल जी मकवाना ) b. 28 अक्टूबर, 1956, ratangarh, neemuch, madhya pradesh, bharat
4. अन्नपूर्णा w/o ईश्वर लाल जी राठौर लिमड़ी b. 25 मई, 1958
3. जवाब बाई - लल्लू भाई - मूलजी भाई दर्जी दाहोद b. 1924, रामपुरा, नीमच , भारत (India); d. 1998, dahod, gujrat, bharat
└ +लल्लू भाई मूलजी भाई परमार दर्जी दाहोद b. 1932; d. 2006
4. जामू बेन - कन्हैया लाल पन्नालाल परमार दर्जी दाहोद b. 1944
4. प्राण लाल परमार दर्जी दाहोद b. 1950
└ +जवाब बाई -लल्लू भाई दर्जी दाहोद
3. गोरधन लाल मकवाना दर्जी रतन गढ़ b. 16 सितम्बर, 1931; d. 5 जून, 1997
└ +गीता बाई चौहान w/o गोरधन जी सीतारामजी मकवाना दरजी रतनगढ b. 1934; d. 1994
4. मंजू मकवाना w/o बाबूलाल जी नामदेव दर्जी बिलालपुर b. 8 मार्च, 1960
4. मनोरमा बाई मकवाना w/o राजेंद्र जी परमार दर्जी रानापुर b. 31 दिसंबर, 1968
4. चंद्रकला मकवाना w/o नटवर लाल जी दर्जी दाहोद
4. मधुबाला मकवाना w/o सुभाष राठौर लिमड़ी
3. सोनी बाई - द्वारका दास -मूलजि भाई परमार दर्जी दाहोद
└ +द्वारका दास मूलजी भाई दाहोद



1.5.26

“संत दामोदर जी महाराज की अमर गाथा | दामोदर वंशी दर्जी समाज का गौरवशाली इतिहास”




"संत दामोदर जी महाराज की विस्तृत जीवनी, जन्म-महानिर्वाण, दोहावली, उपदेश, चमत्कार और दामोदर वंशी दर्जी समाज (जूना व नया गुजराती दर्जी) का पूरा इतिहास जानिए। जूनागढ़ से मध्य प्रदेश-राजस्थान तक का पलायन और आज भी जीवित उनकी परंपरा।"





नमस्कार।
आज हम एक ऐसे दिव्य इतिहास की यात्रा पर चल रहे हैं,
जो केवल एक व्यक्ति की जीवनी नहीं,
एक पूरे समाज की आत्मा की कथा है।
एक ऐसी कथा जो गुजरात के जूनागढ़ के पावन दामोदर कुंड से शुरू होकर,
मध्य प्रदेश और राजस्थान के गांव-गांव तक,
रजत की तरह फैल गई।
ये कथा है -
दामोदर वंशी दर्जी समाज के आदि पुरुष,
आराध्य देव, ब्रह्मचारी, समाज सुधारक,
परम कृष्ण भक्त, संत शिरोमणि श्री दामोदर जी महाराज की।
जिनके नाम पर आज भी लाखों घरों में दिया जलता है,
और जिनकी दोहावली आज भी बच्चों को जीवन जीना सिखाती है।
तो आइये, मन को शांत कर, हृदय में श्रद्धा धारण कर,
इस पावन चरित्र को श्रवण करते हैं।
अध्याय 1 - भूमि का चयन - जूनागढ़
भारत की पुण्यभूमि में,
गुजरात का जूनागढ़,
कोई साधारण नगर नहीं है।
यह गिरनार पर्वत की छाया में बसा,
ऋषि-मुनियों की तपोभूमि है।
यहाँ का दामोदर कुंड,
जिसमें स्नान करने से आत्मा शुद्ध होती है,
ऐसी मान्यता है।
इसी कुंड के तट पर,
चौदहवीं शताब्दी में,
एक ऐसा प्रकाश प्रकट हुआ,
जिसने एक बिखरे हुए शिल्प-समाज को,
एक सूत्र में पिरो दिया।
वह प्रकाश थे - संत दामोदर जी महाराज।
उस समय भारत में भक्ति आंदोलन की लहर चल रही थी।
काशी में संत रामानंदाचार्य जी,
भेदभाव मिटाकर भक्ति का द्वार सबके लिए खोल रहे थे।
उसी युग की विभूति थे, हमारे दामोदर जी महाराज।
अध्याय 2 - दिव्य जन्म और बाल्यकाल
संवत 1424, चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की द्वितीया।
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार - 5 अप्रैल, 1367 ईस्वी।
वसंत ऋतु अपने यौवन पर थी।
जूनागढ़ के एक धर्मनिष्ठ परिवार में,
एक बालक का जन्म हुआ।
पिता का नाम था - श्री हेमचन्द्र जी।
माता का नाम था - जयंती देवी।
हेमचन्द्र जी कोई सामान्य दर्जी नहीं थे।
वे भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य उपासक थे।
उनके हाथ सुई-धागे से वस्त्र सीते थे,
पर उनकी जीभ हर क्षण - राधे-कृष्ण, राधे-कृष्ण जपती थी।
घर में दो ही संपत्ति थी - एक भक्ति, दूसरी संतोष।
ऐसे घर में जब बालक आया,
तो उसका नाम रखा गया - दामोदर।
जिसका अर्थ है - जिसके उदर में, हृदय में,
दाम है, रस्सी है, प्रेम की रस्सी,
जिससे यशोदा ने कृष्ण को बाँधा था।
बालक दामोदर बचपन से ही असाधारण थे।
जहाँ अन्य बच्चे खिलौनों से खेलते,
दामोदर मिट्टी के छोटे-छोटे मंदिर बनाते।
जहाँ अन्य बच्चे लड़ते-झगड़ते,
दामोदर जी यदि किसी के वस्त्र फटे देखते,
तो अपनी माता से सुई-धागा लेकर,
स्वयं टांक देते।
उनके हृदय में दो बातें जन्म से ही थीं -
एक वैराग्य की ज्वाला, और दूसरी करुणा का सागर।
कहते हैं, मात्र आठ वर्ष की आयु में,
उन्होंने अपने पिता से प्रश्न किया था -
"पिताजी, हम सबके वस्त्र सीते हैं,
तन ढकते हैं। पर मन के वस्त्र,
जो अहंकार और द्वेष से फट गए हैं,
उन्हें कौन सीयेगा?"
हेमचन्द्र जी निरुत्तर रह गए।
उन्हें आभास हो गया,
यह बालक दर्जी कुल में जन्मा अवश्य है,
पर यह केवल वस्त्र नहीं, समाज सीने आया है।
अध्याय 3 - ब्रह्मचर्य और साधना
किशोरावस्था आते-आते,
दामोदर जी ने एक कठोर निर्णय लिया।
उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत धारण किया।
उस युग में यह असाधारण था।
पर उनका मानना था,
यदि मुझे समाज का होना है,
तो मुझे किसी एक परिवार का नहीं होना होगा।
मुझे सबका होना होगा।
वे दिन भर अपने पिता के साथ,
परिश्रम से वस्त्र सिलाई का कार्य करते,
और रात भर दामोदर कुंड के किनारे,
ध्यान और भजन में लीन रहते।
उनकी भक्ति - आडंबरहीन थी।
उनका ज्ञान - पोथी का नहीं, अनुभव का था।
उनकी वाणी में - गुजरात की मिठास,
और संतों की निर्भीकता थी।
धीरे-धीरे लोग उनके पास आने लगे।
कोई फटे वस्त्र लेकर नहीं,
फटे मन को लेकर।
और दामोदर जी हर मन को,
प्रेम के धागे से सी देते।
अध्याय 4 - साहित्यिक प्रकाश - दामोदर दोहावली
संत दामोदर जी महाराज केवल उपदेशक नहीं थे,
वे एक समर्थ साहित्यकार भी थे।
उनकी अमर कृति है - "दामोदर दोहावली"।
यह कोई ग्रंथ नहीं,
जीवन जीने का व्याकरण है।
उनके दोहे आज भी,
जूनागढ़ से लेकर नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़, जावरा,
और मालवा के हर दर्जी परिवार की,
संध्या-वंदना में गूंजते हैं।
उनकी दोहावली में तीन धाराएं हैं -
पहली धारा - भक्ति की।
वे कहते हैं -
सुई धागा हाथ में, मुख में कृष्ण मुरार।
दामोदर यूं कहत है, यही मोक्ष का द्वार।।

अर्थात - हाथ में अपना कर्म रखो, मुख में प्रभु का नाम रखो,
यही मुक्ति है।
दूसरी धारा - कर्म और सदाचार की।

काटे चिथरा द्वेष का, सीवे प्रेम अपार।
दर्जी सोई जानिये, जो जोड़े परिवार।।


वे दर्जी की परिभाषा ही बदल देते हैं।
दर्जी वह नहीं जो कपड़ा काटे।
दर्जी वह है, जो द्वेष को काटे और प्रेम को सीये।
जो परिवार को जोड़े।
तीसरी धारा - सामाजिक समता की।
उस समय जब छुआछूत अपने चरम पर थी,
उन्होंने गर्जना की -

ऊंच नीच सब एक सम, सब में एक ही जोत।
दामोदर कहे मूढ़मति, काहे करे विभेद।।


यह दोहा आज से 600 साल पहले,
एक क्रांति था।

 संत दामोदर जी की भक्ति

श्रीदामोदरदेवाय कृष्णभक्ताय धीमते।
ब्रह्मचारिणे नित्यं नमो भक्तिप्रदायिने॥
सेवाधर्मप्रकाशाय समाजैक्यप्रदाय च।
नमो दामोदरेन्द्राय शरणं मे जनार्दने॥

 कर्म और सेवा

सूत्रेण वस्त्रं सीव्यन्ति करौ यस्य महामतेः।
प्रेमसूत्रेण लोकानां हृदयानि स सीव्यति॥
सेवया कर्मयोगेन भक्त्या कृष्णस्य पूजनम्।
दामोदरस्य सन्देशो जयत्येव निरन्तरम्॥

 समरसता और मानवता

नास्ति कोऽपि परो लोके नास्ति कोऽपि लघुर्नरः।
एकैव ज्योतिरात्मस्थाः सर्वे जन्तव एव हि॥
भेदभावविनिर्मुक्तं प्रेमपूर्णं च मानवम्।
दर्शयन् मार्गमस्माकं दामोदरः सदा जयेत्॥

अध्याय 5 - चमत्कार नहीं, करुणा

संतों के साथ चमत्कार की कथाएं जुड़ जाती हैं।
दामोदर जी के साथ भी जुड़ीं।
पर वे इसे चमत्कार नहीं, प्रभु की कृपा कहते थे।
कहा जाता है, एक बार जूनागढ़ में भीषण अकाल पड़ा।
धनिकों ने अन्न के भंडार बंद कर दिए।
दामोदर जी अपने अनुयायियों के साथ,
हर घर से एक मुट्ठी आटा मांग लाए।
और उसी से महीनों तक भंडारा चलाया।
लोग कहते हैं, वह आटे का बर्तन कभी खाली नहीं हुआ।
दूसरी कथा -
एक विधवा बहन, जिसके पति की मृत्यु हो गई थी,
समाज ने उसे अपवित्र मानकर बहिष्कृत कर दिया था।
उसके छोटे बच्चे के वस्त्र फटे थे।
दामोदर जी स्वयं उसके घर गए,
उस बच्चे को नए वस्त्र पहनाए,
और कहा -
"आज से तू मेरी बहन, और यह बालक मेरा भांजा।
जो इसे छुएगा, उसे पहले मुझे छूना होगा।"
उस दिन से उन्होंने विधवा-पुनर्विवाह,
और अनाथ बच्चों की शिक्षा का,
आंदोलन शुरू किया।
वे सुई से केवल कपड़ा नहीं जोड़ते थे,
टूटे हुए मनुष्यों को जोड़ते थे।
इसलिए लोग उन्हें चमत्कारी नहीं,
करुणामयी कहते थे।
अध्याय 6 - महानिर्वाण - देह से विदेह तक
जिसने जीवन भर जोड़ना सिखाया,
उसका वियोग भी जोड़ने वाला बना।
73 वर्ष तक,
अखंड ब्रह्मचर्य, सेवा और भक्ति का,
दीप जलाकर,
चैत्र कृष्ण चतुर्दशी, संवत 1497,
अर्थात 27 मार्च, 1440 ईस्वी को,
दामोदर आश्रम, जूनागढ़, दामोदर कुंड के तट पर,
उन्होंने स्वेच्छा से, पद्मासन में बैठकर,
अपने प्राण, अपने आराध्य श्रीकृष्ण में लीन कर दिए।
इसे महानिर्वाण कहते हैं। मृत्यु नहीं।
अध्याय 7 - इतिहास का सबसे कठिन मोड़ - पलायन
संत तो चले गए,
पर उनकी परीक्षा अभी बाकी थी।
उनके निर्वाण के लगभग 65 वर्ष बाद,
गुजरात पर महमूद बेगड़ा का शासन आया।
इतिहास साक्षी है, उसके काल में,
धर्मांतरण और अत्याचार चरम पर थे।
संवत 1562, अर्थात 1505 ईस्वी में,
दामोदर वंशी समाज के सामने दो विकल्प थे -
या तो धर्म छोड़ो, या धरती छोड़ो।
समाज ने धरती छोड़ना स्वीकार किया।
धर्म नहीं छोड़ा।
पहला बड़ा जत्था,
अपने आराध्य की जन्मभूमि जूनागढ़ को रोते हुए प्रणाम कर,
रातों-रात निकल पड़ा।
वे मालवा, मेवाड़ की ओर आए।
मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच, जावरा, रतलाम,
राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौड़, भीलवाड़ा में बस गए।
ये कहलाए - जूना गुजराती दर्जी।
जूना यानी पुराने, यानी 1505 वाले।
ये आज भी अपने नाम के साथ "सेठ" लगाते हैं,
क्योंकि ये क्षत्रिय गोत्र के वंशज माने जाते हैं।
समय बीता, पर इतिहास ने फिर करवट ली।
सन 1610 ईस्वी में,
नवाब मिर्जा जस्साजी खान बाबी के अत्याचारों से,
दूसरा जत्था विस्थापित हुआ।
ये भी उसी मार्ग से मध्य प्रदेश और राजस्थान आए।
ये कहलाए - नया गुजराती दर्जी।
नया यानी 1610 वाले।
इस प्रकार एक ही वृक्ष की दो शाखाएं बनीं,
जूना और नया।
भाषा एक, आराध्य एक, गुरु एक - दामोदर जी महाराज।
पर समय के थपेड़ों ने उन्हें दो नाम दे दिए।
अध्याय 8 - आज भी जीवित परंपरा
आज 600 साल बाद भी,
क्या यह परंपरा जीवित है?
हाँ, पूरी तरह से जीवित है।
आज भी अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ,
हर वर्ष चैत्र शुक्ल द्वितीया को,
उनकी जयंती और चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को पुण्यतिथि,
बड़े उत्सव के रूप में मनाता है।
आज भी विवाह से पहले,
दामोदर जी महाराज की दोहावली का पाठ होता है।
आज भी समाज में कोई बड़ा संकल्प लेना हो,
तो दामोदर कुंड के जल की सौगंध ली जाती है।
संत दामोदर जी ने हमें तीन सूत्र दिए थे,
जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
पहला सूत्र - सेवा - हाथ से सेवा करो।
दूसरा सूत्र - समरसता - किसी को छोटा-बड़ा मत समझो।
तीसरा सूत्र - भक्ति - मुख में सदा प्रभु का नाम रखो।
यदि आज का युवा,
अपने दर्जी होने पर गर्व करना चाहता है,
तो उसे याद रखना चाहिए,
उसका आदि पुरुष कोई साधारण कारीगर नहीं,
एक संत था, जिसने सुई को शस्त्र नहीं, शास्त्र बना दिया।
समापन - आह्वान
तो यह थी,
संत शिरोमणि श्री दामोदर जी महाराज की,
संक्षिप्त, पर अमर जीवनी।
जूनागढ़ की मिट्टी से जन्मी,
और मालवा-राजस्थान के हृदय में बसी,
एक ज्योति की कथा।
यदि इस कथा ने आपके हृदय को स्पर्श किया हो,
तो इस वीडियो को अपने समाज के हर परिवार तक पहुँचाइये।
कमेंट में प्रेम से लिखिए -
जय दामोदर महाराज।
और अधिक जानकारी के लिए आप पढ़ सकते हैं -
damodarjagat.blogspot.com
यह प्रयास अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ द्वारा,
अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए किया जा रहा है।
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय दामोदर, जय श्रीकृष्ण।