2012-03-09

दामोदर दर्जी महासंघ के ७वें सम्मेलन (शामगढ) पर एक रिपोर्ट:



दामोदर दर्जी  सम्मेलन  शामगढ  पर एक रिपोर्ट


                                                         

  - लेखक:  डॉ. कैलाश चन्द्र चौहान,जग्गाखेडी    


                                                  


                                                                                          

स्थान:शामगढ.कंचन गंगा मेरिज गार्डन 







दिनांक: २७ फ़रवरी २०१२,सोमवार





 प्रात: ७ बजे खजुरिया सारंग की बारात की बस का आगमन हुआ। बारातों के आने का सिलसिला तेजी से जारी रहा और देखते ही देखते  साढे सात बजे तक पूरा विवाह पाण्डाल बारातियों से भर गया।


  ८ बजे  स्व डॉ.लक्ष्मीनारायणजी अलौकिक के सुपुत्र  जीतमल  राठौर (जीतुभाई) के  द्वारा संचालित एवं वित्त पोषित  चाय का स्टाल शुरु हुआ।यहां पुरुषों और महिलाओं के लिये अलग-अलग  चाय की व्यवस्था रखी गई थी।जीतुभाई के कर्मचारियों ने अनवरत ११ घंटे तक चाय की सेवा में कोई कसर नहीं छोडी।
   इधर प्रात: नो बजे तक स्वल्पाहार के लिये   सभी स्टाल लगा दिये गये थे।

विडियो देखने के लिए निम्न लिंक क्लिक करें-

https://www.youtube.com/watch?v=-f4-11P0nnI

सम्मेलन में पधारे मेहमानों के लिये प्रायोजित  स्टाल  लगाने का यह  अभिनव कान्सेप्ट था।

       इन स्टालों के लिये वित्त पोषण निम्न महानुभाओ द्वारा किया गया-




 गाजर का हलवा का स्टाल-
        ग्यारह हजार एक सौ ग्यारह रुपये
डॉ..दयाराम आलोक शामगढ








पोहा और जलेबी का स्टाल-

दस हजार रुपये.

श्री मति तेजूबाई मकवाना(सुपुत्र श्री रामदयालजी एवं सुरेशजी मकवाना) रामपुरा




 आलूबडे का स्टाल-
श्री राकेश कुमारजी  मकवाना "दर्पण"
भवानी मंडी 
ग्यारह  हजार रुपये 





साबूदाना की खिचडी का स्टाल-

पांच हजार एक सौ  रुपये.

श्री राधेशामजी राठौर (अपना ट्रेडर्स)
 भवानी मंडी.


     काफ़ी का स्टाल-
   चार हजार एक सौ रुपये.   
श्री सुरेश कुमार जी पंवार टेलर डग,
राजस्थान.







   प्रायोजित स्टालों का मेहमानों ने भरपूर आनंद लिया।  उधर विवाह पाण्डाल  के मंच से सम्मेलन की कार्यवाही शुरू हो चुकी थी।बोली का मात्र एक ही आईटम था- दामोदर महाराज की ध्वजा जिसकी  बोली लगनी शुरू हुई।बोली दाताओं में सर्व श्री भेरुलालजी राठौर ,राधेशामजी चौहान लाईनमेन , गोविंदजी सिसौदिया शामगढ ,दिनेशजी सिसौदिया एवं गोर्धनजी सिसौदिया मेलखेडा  ने बोली कार्यक्रम में  प्रमुख रूप से भाग लिया।
  बढते उत्साह और जोश  के बीच  बोली राधेशामजी चौहान लाईनमेन की तरफ़ से २१ हजार तक पहुंच गई।
आखिर में दामोदर ध्वजा २२ हजार रुपये की सर्वोच्च बोली  पर श्री भेरुलालजी राठौर शामगढ के नाम पंजीकृत हुई।
दूसरी दामोदर ध्वजा सम्मेलन के एक और  महत्वपूर्ण सहयोगी  श्री सुरेश कुमारजी-कन्हैयालालजी माहेश्वरी कीम गुजरात के लिये सुरक्षित रखी गई थी जिन्होने समिति को ११ हजार रुपये का सहयोग दिया था।


    बोली समापन के पश्चात सम्मान समारोह का वक्त आ चुका था। इस कडी में उन सभी महानुभाओं को  मंच पर आमंत्रित कर  माथे पर तिलक लगाकर जयपुरी पगडी पहिनाकर   सम्मानित किया गया जिन्होने स्वेच्छिक  आर्थिक सहयोग देकर इतने विशाल आयोजन  की नींव को मजबूत किया।

सुश्री मायादेवी राठौर सुपुत्री  डॉ.लक्ष्मी नारायण अलौकिक जिन्होने सम्मेलन के सभी जोडों को एक-एक आलमारी देने के लिये समिति को ४६ हजार रुपये का  बहुत बडा सहयोग दिया ,
     श्री भेरुलालजी राठौर जिन्होने दामोदर ध्वजा की २२ हजार  की सर्वोच्च   बोली लगाई 
      श्री सुरेशजी माहेश्वरी  किम गुजरात ने समिति को ११ हजार का सहयोग दिया,


  उल्लेखनीय है कि इस सम्मेलन की विडियोग्राफ़ी और फ़ोटोग्राफ़ी बाम्बे डिजिटल फ़ोटो स्टुडियो शामगढ द्वारा नि:शुल्क की जाकर प्रत्येक विवाह पक्ष को एक-एक सीडी भी मुफ़्त दी जावेगी।समिति श्री राजेन्द्र सिसौदिया का आभार मानती है।

     









        साथ ही सम्मेलन में स्वल्पाहार के लिये  सभी स्टालों के प्रायोजकों जिनका उल्लेख ऊपर किया गया है  को मंच पर आमंत्रित कर , तिलक लगाकर ,जयपुरी पगडी पहिनाकर  समिति के सदस्यों द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन महानुभावों का भी सम्मान किया गया जिन्होने समिति को ७०० रुपये या अधिक का सहयोग दिया था। मंच पर सम्मान के अलावा आर्थिक  सहयोग  देने वाले महानुभावों   के नाम के  फ़्लेक्स  के पर्दे समिति द्वारा बनवाये जाकर विवाह पाण्डाल और भोजन पाण्डाल  में लगाये गये थे।सम्मान समारोह के कुछ उपलब्ध चित्र इस लेख के अंत में प्रस्तुत किये जा रहे हैं।


         इसी अवसर पर  श्री दिलीपजी  परमार  भवानीमंडी(चंदवासा वाले)   के नेतृत्व में दामोदर नवयुवक मंडल  द्वारा सम्मेलन के अध्यक्ष श्री रमेशचंद्रजी राठौर शामगढ का  सम्मान लहरिया साफ़ा बांधकर ,श्री फ़ल भेंटकर किया । ज्ञातव्य है कि भवानी मंडी का जागरूक  दामोदर  युवा मंडल समाज की सेवा करने वाले महानुभाओं का इसी प्रकार सम्मान  करने की परंपरा  का निर्वाह करता आया है।ऐसा करने से सामाज के लिये काम करने वालों  में नये जोश ,नई उर्जा का संचार होता  है।

   सम्मान समारोह के बाद आई प्रोसेशन की बारी।
सबसे आगे दो ऊंटों पर
 दामोदर ध्वजा उठाये दो
नवयुवक
श्री ईश्वरलाल राठौर (कंचन वस्त्रालय) शामगढ 



और 











श्री सुभाष सिसौदिया( तरुण टेलर्स) शामगढ.








घोडियों पर सवार दुल्हे राजा ,
और
कार मोटर में दुल्हनें।
यह था अति मनभावन चल समारोह का सेटिंग। नजारा देखते ही बनता था। जूलुस नगर के प्रमुख मार्ग से गुजरता हुआ,आतिशबाजी और नाचते-झूमते युवकों की सहभागिता ने चल समारोह को यादगार बना दिया

      प्रोसेशन से पूर्व ही भोजन व्यवस्था शुरू हो चुकी थी।इसलिये सभी  समाज बंधु प्रोसेशन का आनंद नहीं ले सके।शोभायात्रा में वर -वधू  पक्षों से संबंधित लोग ही अधिकतर शामिल हुए।लेकिन समाज की प्रतिष्ठा बढाने वाले जुलूस में  सहभागिता का जज्बा दर्जी बंधुओं में कम दिखाई दिया।अधिकांश दर्जी बंधुओं ने चल समारोह मे भाग लेकर समाज का गौरव  बढाने  के बजाये विवाह पाण्डाल में  ही बैठे रहना पसंद किया सामाजिक चेतना का अभाव  दर्शाने  वाली इस स्थिति में सुधार होना आज की  महती आवश्यकता है।
    चल समारोह के वापस विवाह स्थल पर  आने से  पूर्व समिति द्वारा कन्या पक्षों को तौरण दे दिये गये थे। दुल्हों ने तौरण रस्म निभाई।वर-वधू का विवाह वेदी को पहुंचना ही था कि आमंत्रित अतिथियों का आगमन हुआ। लोगों ने खडे होकर अतिथियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।


      कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि माननीय श्री मदनलाल जी राठौर,जिला अध्यक्ष बीजेपी ,  अध्यक्षता:  श्री मति संतोष जी काला,विशेष अतिथि श्री राजेश जी  यादव पूर्व विधायक,श्री चंदरसिंह जी सिसौदिया जिला महामंत्री बीजेपी,श्री सुरेशजी नरभेपुरिया मंडल भाजपा अध्यक्ष,श्री गोवर्धन भाई जायसवाल समाज सेवी का समिति के सदस्यों द्वारा माल्यार्पण कर,जयपुरी पगडी पहिनाकर भाव भीना स्वागत किया गया।आगंतुक अतिथियों ने नव जोडों को आशीर्वचन के उद्बोधन  दिये



    तत्पश्चात वर-वधुओं के जोडों को एक-एक करके मंच पर आमंत्रित कर वरमाला समारोह संपन्न कराया गया। फ़िर गायत्री परिवार के परिव्राजकों के द्वारा वैदिक रीति से  विवाह अनुष्ठान विधिवत संपन्न कराया गया।
  कन्यादान में विविध वस्तुओं के साथ नगदी भी लोगों के द्वारा दिये गये।प्रत्येक जोडे को १४६३ रुपये कन्यादान अर्पित किया गया।

   समिति द्वारा डायचे में निम्न वस्तुएं दी गईं-



१) आलमारी  (सुश्री मायादेवी राठौर के आर्थिक सहयोग से)
२)पलंग (प्लाई का) 
३) टी टेबल नग 
४)कुर्सी नग दो
५)स्टील रेक(बर्तन स्टेंड) 
६)गृहोपयोगी स्टील के बर्तन(५ लिटर कूकर सहित) कुल ३३ बर्तन
७) रजाई,गादी,२ तकिये का सेट 

            विवाह संपन्न हुए।सायं ५.३० बजे  सम्मेलन समापन की घोषणा हुई। भोजन पाण्डाल सुबह ११ बजे से सांय ६ बजे तक अविराम चलता रहा। तीन गावों से बुलाई गई भोजन समितियों द्वारा  करीब  छ: से सात हजार मेहमानों की भरपूर  भोजन सेवा की।सम्मेलन की सबसे बडी उपलब्धि यह रही कि इतना विराट आयोजन बिना किसी वाद-विवाद के संपन्न हुआ। अब सम्मेलन की आशातीत सफ़लता के बधाई संदेश  मिलने से आयोजकों को नई  उर्जा  प्राप्त हो रही है।
  सम्मेलन के कतिपय चित्र नीचे प्रस्तुत किये गये हैं---








































































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