जाति इतिहासकार डॉ.दयाराम आलोक के मतानुसार ऐसे अनेक परिवार हैं जिन्हें अपने कुलदेवी या देवता के बारे में कुछ भी नहीं मालूम है। ऐसा इसलिए कि उन्होंने कुलदेवी या देवताओं के स्थान पर जाना ही नहीं छोड़ा बल्कि उनकी पूजा भी बंद कर दी है। लेकिन उनके पूर्वज और उनके देवता उन्हें बराबर देख रहे होते हैं। यदि किसी को अपने कुलदेवी और देवताओं के बारे में नहीं मालूम है, तो उन्हें अपने बड़े-बुजुर्गों, रिश्तेदारों या पंडितों से पूछकर इसकी जानकारी लेना चाहिए। यह जानने की कोशिश करना चाहिए कि झडूला, मुंडन संकार आपके गोत्र परंपरानुसार कहां होता है या 'जात' कहां दी जाती है।
कहते हैं कि कालांतर में परिवारों के एक स्थान से दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने, धर्म परिवर्तन करने, आक्रांताओं के भय से विस्थापित होने, जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने, संस्कारों का क्षय होने, विजातीयता पनपने, पाश्चात्य मानसिकता के पनपने और नए विचारों के संतों की संगत के ज्ञानभ्रम में उलझकर लोग अपने कुल खानदान के कुलदेवी और देवताओं को भूलकर अपने वंश का इतिहास भी भूल गए हैं। खासकर यह प्रवृत्ति शहरों में देखने को ज्यादा मिलती है।
ऐसा भी देखने में आया है कि कुल देवी-देवता की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई खास परिवर्तन नहीं होता, लेकिन जब देवताओं का सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में घटनाओं और दुर्घटनाओं का दौर शुरू हो जाता है, उन्नति रुकने लगती है, गृहकलह, उपद्रव व अशांति आदि शुरू हो जाती हैं । पिताद्रोही होकर व्यक्ति अपने वंश को नष्ट कर लेता है! कुलदेवता या कुलदेवी का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है । इनकी पूजा आदिकाल से चलती आ रही है इनके आशिर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य नही होता है यही वो देव या देवी है जो कुल की रक्षा के लिए हमेशा सुरक्षा घेरा बनाये रखती है । आपकी पूजा पाठ व्रत कथा जो भी आप धार्मिक कार्य करते है उनको वो आपके इष्ट तक पहुचाती है । इनकी कृपा से ही कुल वंश की प्रगति होती है । लेकिन आज के आधुनिक युग में लोगो को ये ही नही पता की हमारे कुलदेव या देवी कोन है । जिसका परिणाम हम आज भुगत रहे हैं ।क्योकि पता ही नही चल रहा कि इतनी मुसीबते आ क्यों रही है । आपने देखा होगा बहुत से ऐसे लोग भी है जो बहुत पूजा पाठ करते है बहुत धार्मिक है फिर भी उसके परिवार में सुख शांति नही । बेटा बेरोजगार होता है बहुत पढने लिखने के बाद भी पिता पुत्र में लड़ाई होती रहती है जो धन आता है घर मे पता ही नही चलता कोनसे रास्ते निकल जाता है। शादी नही होती शादी किसी तरह हो गई तो संतान नही होती । ये संकेत है की आपके कुलदेव या देवी आपसे रुष्ट है आपके ऊपर से सुरक्षा चक्र हट चूका है जिसके कारण नकारात्मक शक्तिया आप पर हावी हो जाती है । फिर चाहे आप कितना पूजा पाठ करवा लो कोइ लाभ नही होगा ।
भारत में कई समाज या जाति के कुलदेवी और देवता होते हैं। इसके अलावा पितृदेव भी होते हैं। भारतीय लोग हजारों वर्षों से अपने कुलदेवी और देवता की पूजा करते आ रहे हैं। कुलदेवी और देवता को पूजने के पीछे एक गहरा रहस्य है, जो बहुत कम लोग जानते होंगे। आओ जानते हैं कि सभी के कुलदेवी-देवता अलग क्यों होते हैं और उन्हें क्यों पूजना जरूरी होता है?
जन्म, विवाह आदि मांगलिक कार्यों में कुलदेवी या देवताओं के स्थान पर जाकर उनकी पूजा की जाती है या उनके नाम से स्तुति की जाती है। इसके अलावा एक ऐसा भी दिन होता है जबकि संबंधित कुल के लोग अपने देवी और देवता के जगह पर इकट्ठा होते हैं।
जिन लोगों को अपने कुलदेवी और देवता के बारे में नहीं मालूम है या जो भूल गए हैं, वे अपने कुल की शाखा और जड़ों से कट गए हैं।
सवाल यह है कि कुल देवता और कुलदेवी सभी के अलग-अलग क्यों होते हैं? इसका उत्तर यह है कि कुल अलग है, तो स्वाभाविक है कि कुलदेवी-देवता भी-अलग अलग ही होंगे। दरअसल, हजारों वर्षों से अपने कुल को संगठित करने और उसके इतिहास को संरक्षित करने के लिए ही कुलदेवी और देवताओं को एक निश्चित जगह पर नियुक्त किया जाता था। वह जगह उस वंश या कुल के लोगों का मूल जगह होता था।
यह उस दौर की बात है, जब लोगों को आक्रांताओं से बचने के लिए एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करना होता था। ऐसे में वे अपने साथ अपने कुल और जाति के लोगों को संगठित और बचाए रखने के लिए वे एक जगह ऐसा मंदिर बनाते थे, जहां पर कि उनके कुल के बिखरे हुए लोग इकट्टा हो सकें।
पहले यह होता था कि मंदिर से जुड़े व्यक्ति के पास एक बड़ी-सी पोथी होती थी जिसमें वह उन लोगों के नाम, पते और गोत्र दर्ज करता था, जो आकर दर्ज करवाते थे। इस तरह एक ही कुल के लोगों का एक डाटा तैयार हो जाता था। यह कार्य वैसा ही था, जैसा कि गंगा किनारे बैठा तीर्थ पुरोहित या पंडे आपके कुल और गोत्र का नाम दर्ज करते हैं। आपको अपने परदादा के परदादा का नाम नहीं मालूम होगा लेकिन उन तीर्थ पुरोहित के पास आपके पूर्वजों के नाम लिखे होते हैं।
इसी तरह कुलदेवी और देवता आपको आपके पूर्वजों से ही नहीं जोड़ते बल्कि वह वर्तमान में जिंदा आपके कुल खानदान के हजारों अनजान लोगों से भी मिलने का जरिया भी बनते हैं। इसीलिए कुलदेवी और कुल देवता को पूजने का महत्व है। इससे आप अपने वंशवृक्ष से जुड़े रहते हैं और यदि यह सत्य है कि आत्मा होती है और पूर्वज होते हैं, तो वे भी आपको कहीं से देख रहे होते हैं। उन्हें यह देखकर अच्छा लगता है और वे आपको ढेर सारे आशीर्वाद देते हैं।
दामोदर वंशीय नए गुजराती दर्जी समाज मे प्रचलित गोत्र और कुलदेवी कि जानकारी-
गोत्र कुलदेवी
चौहान आशापूरा माताजी
राठौर नागणेचिया माताजी
पंवार सच्चियाय माताजी
गोहिल सिसोंदिया ,गहलौत , चुण्डावत की कुलदेवी बाणेश्वरी(बायण) माताजी
गोयल माँ महिशासुर मर्दिनी
परमार सच्चियाय माताजी
सोलंकी वंश की कुलदेवी खीमज माता
वाघेला वाघेश्वरी माताजी
मकवाना(झाला) मर्मर माता(शक्तिमाता जी)
डाबी गोत्र की कुलदेवी चामुंडा माता है.
कश्यप गोत्र की कुलदेवी अदिति है
नोट: अन्य गौत्र के दर्जी बंधु अपनी गौत्र और कुलदेवी का नाम व्हाट्स एप के 9926524852 पर सूचित कर सकते हैं ताकि उक्त आलेख को अपडेट किया जा सके|-डॉ.दयारामआलोक










39 टिप्पणियां:
यू पी का दर्जी खुद को दर्जी नही मानता, एक लेख में मैंने पडा कि श्री कृष्णा ने दर्जी को निरोगी काया का बरताव दिया फिर निरोगी क्यो नही दारू यूपी का दर्जी ने कायस्थ में विलय कर गया है, यूपी हिमाचल उत्तराखंड में चारपाई पर नही बैठने देते , नीच समझा जाता है,क्योंकि दर्जी के सारे तर्क बनाबटी नजर आते है समाज संबिधान और पुराण कही भी आप नही है क्षत्रीय आपको कोई स्वीकार नही करता, मूबीयो में पिटते दिखाये जाते है ,दसियो सन्तों को करियेटर बताते है अपने समाज का जुबान से पति पत्नि समधि ससुरालियों अपनी सन्तानो से लड़ते मिलेगे और किसी फिल्मकार पर आज तक एक केस नही ,सुई धागा देख लो आपको दर्जी समाज पर बहुत गरब होगा , कुत्ता बनाकर अपने मेहमानों का मनोरंजन कराता है लाला
Santosh chouhan gotra gokh chouhan hamari mataji konsi hai krapaya bataye.
महोदय इतनी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए हार्दिक आभार
Galiya ke kuldei
Namdev samaj ki kuldevi
Goyal ganjgada ki kuldevi kya h
PANWAR 2 HOTE HAI. PECH PANWAR OR BAWLA PANWAR JISME PECH PANWAR KI KULDEVI ARBUDA MATA(MOUNT ABU) ME HAI. OR BAWLA PANWAR KI KULDEVI OSIYA MATA HAI.
दर्जी समाज में नथैया गोत्र की कुलदेवी कौनसी है ?
Chhaparwal darjee samaj ki kuldevi kaha he
केवाय माता kinsariya parbatsar nagaur
Rajesh Namdev Vansh gathoriya gotra Bhardwaj ki kul Ki Devi ka naam bataiye
I m vaghela Darji and We are praying Chamunda Maa as our kuldevi ...pls guide me that which Devi is our right kuldevi
Which is my original kul Devi of Darji Vaghela
नमस्कार, कृपया दांगड़ा गौत्र की कुल देवी कौन है, बताने का श्रम करावे।
दामोदर वंशिय जूना गुजराती दर्जी गोत्र परिहार की कुलदेवी कोनसी है।। जरूर बताएं
मेहरू खेड़िया परमार जुनागुराती दर्जी समाज की कुलदेवी कोन है
मेहरू खेड़िया परमार दर्जी समाज की कुलदेवी कौन है
Makwana ki kuldevi ke bare me btaye
मैं चोहान गोत्र से हूं राव जी ने शाकंभरी माता बताया और अपने आशापुरा माता
Shankhla ki kuldevi koni h
नाथिया गोत्र की कुलदेवी भीलवाड़ा ज़िले के गुलाबपुरा के पास हुड़दा नामक गाँव में है !
Gamadia Darji kuldevi
Damania darji kuldevi
Namdev samaj ki nathaiya ki kul devi keway mata hain .
कनेरिया की कूल देवी
गुराटीया गोत्र की कुलदेवी कोन है
Gotwal darj ki kuldevi kon ha
जय मा कुलदेवी नागणेची माता
Darji samaj mein utt gotra ki kuldevi kaun hai
Thavan gotr ki kul devi kon hai or kha hai agr pata ho to es no pr baty 8003570416
Aashapura Mata Nadol
Aashapura Mata Nadol
दर्जी समाज में पंवार वंश की कुलदेवी कोन है
नंदकिशोर तोलंबिया
कृपया नामदेव छीपा दर्जी में तोलंबिआ गौत्र की कुलदेवी की जानकारी दें ।
कृपया, नामदेव छीपा दर्जी में तोलंबिआ गौत्र की कुलदेवी की जानकारी दें
गोयलों की कुलदेवी कौन है
नोखा मंडी
Gautami gohel parivaar na kuldevi nu nam apo
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