}

28.12.18

धूरालाल जी पँवार दर्जी आवर की वंशावली ,Gangaram Awar,Murlidhar Awar,Jagdish Awar,Gordhan Awar,Kaluram Awar,Shamlal Kota,Ramesh BHawani mandi,

*इस वंशावली के निर्माण मे विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी उपयोग मे लाई गई है फिर भी वंशावली त्रुटिविहीन हो ,ऐसा प्रयास किया गया है|*वंशावली मे शीर्ष पुरुष के पुत्र और पुत्री के वंशज शामिल किए जाते हैं|
*जन्म और मृत्यु दिनांक मे कुछ गलत हो तो सूचित करें|
*पीढ़ी बताने वाले अंक नाम के पहिले यानि शुरू मे लिखे गए हैं|
*सभी नाम लिंक रूप मे हैं ,लिंक खोलकर उस व्यक्ति की पूरी फाईल देख सकते हैं|
*जीवित और मृत दर्जी बंधुओं के फोटो उपलब्ध कराने पर लगाए जाएँगे|
- निवेदक-डॉ॰दयाराम आलोक,शामगढ़ -9926524852

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3. भवानी शंकर जी पँवार दर्जी आवर b. 1906, awar, pidawa, rajasthan, bharat; d. 1983
└ +सुंदर बाई - भवानी शंकर जी पँवार आवर b. 1911, बाबूल्दा, मंदसौर, मध्य प्रदेश, भारत; d. 1982



└ +पूरी बाई पिता नाथुजी चौहान सूलिया

5. रमेश पंवार दर्जी भवानी मंडी / आवर वाले-९४१४५-68186 b. 1956

6. राजीव पंवार दर्जी भवानी मंडी -९४१३६-67375 b. June 4, 1983





└ +सुनीता - राजीव पँवार भवानी मंडी b. 1987, सुसनेर, शाजापुर , मध्य प्रदेश, भारत; m. circa September 22, 2008, shamgarh, mandsaur , madya pradesh
7. रिधान पंवार दर्जी भवानी मंडी b. March 7, 2012

└ +सोनू कुमारी -रवि कुमार पँवार दर्जी भवानी मंडी; m. November 27, 2015, पिपलिया मंडी, मंदसौर , मध्य प्रदेश





5. जगदीश पंवार अध्यापक आवर-94601-94770 // b. 1963
└ +मंजु बाई -जगदीश पँवार आवर b. 1968
6. राहुल पँवार आवर b. 1993
6. मनीषा पिता जगदीश पँवार दर्जी आवर
└ +सोनू कुमार पिता बदरीलाल चौहान डग b. 1991; m. November 26, 2015, दर्जी मोहल्ला, आवर, झालावाड़ , राजस्थान
5. मोहन बाई-गोविंद चौहान शामगढ़ b. 1960
└ +गोविन्द चौहान दर्जी शामगढ- ०७४२५-232113
6. लोकेश चौहान b. 1978
└ +गिरजा पिता कन्हैया लाल सोलंकी डग b. 1981
7. सुरेन्द्र चौहान शामगढ़ b. 2001
7. महेंद्र चौहान शामगढ़ b. 2004
6. कमल चौहान शामगढ़ b. 1981
└ +ज्योति पिता गंगाराम सोलंकी गरोठ b. 1984
7. मंशा कुमारी पिता कमाल चौहान शामगढ़ b. 2005
7. रजत चौहान शामगढ़ b. 2007
6. कपिल चौहान शामगढ़ b. 1982
└ +आरती पिता चंद्रकांत परमार रानापुर b. 1985
7. कम कम पिता कपिल चौहान शामगढ़ b. 2005
7. चेताली पिता कपिल चौहान शामगढ़ b. 2008
7. शिव पिता कपिल चौहान शामगढ़ b. 2011
6. आरती - विजय सोलंकी डग b. 1984
L+. विजय सोलंकी दर्जी डग b. 1981
7. कुणाल सोलंकी दर्जी डग b. 2009
7. महिमा पिता विजय सोलंकी दर्जी डग b. circa 2003
4. शामलाल पंवार दर्जी कोटा/ आवर वाले b. May 3, 1944, awar, pidawa, rajasthan, bharat; d. 2003
└ +राम कन्या पिता नानुराम जी चौहान दर्जी गैलानी
1. मुकेश पंवार दर्जी कोटा / आवर वाले--9413352397 b. December 26, 1967
└ +मधु बाई -मुकेश पँवार टेलर कोटा b. February 7, 1973, मेलखेड़ा, मंदसौर , Madhya Pradesh, India; m. February 28, 1988, Melkheda, Mandsaur, Madhya Pradesh, India
2. कविता - नवीन चंद्र - रजनी कान्त जी राठौर दर्जी लिमडी b. 1989
└ +नवीन चंद्र राठौर दर्जी लिमडी--99253-22728 b. 1984
3. महिर राठौर दर्जी लिमडी b. 2010
2. निकिता पिता मुकेश पंवार दर्जी कोटा b. 1994
2. निशा पिता मुकेश पंवार दर्जी कोटा b. 1997
2. दिवांशु पँवार कोटा b. 2003
5. कुसुमबाई-ओमप्रकाश चौहान नारायणगढ b. 197
L+ओम प्रकाश दत्तक पुत्र शांतिलाल जी चौहान नारायण गढ़ b. 1967
6. तुषार चौहान नारायण गढ़ b. 2000
6. हिमानी पिता ॐ प्रकाश चौहान नारायण गढ़ 4. सीता बाई पिता भवानी शंकर पंवार दर्जी आवर b. 1935, दरजी मोहल्ला, आवर, झालावाड , राजस्थान, भारत; d. September 11, 2015
└ +गोकुल जी मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1933
5. कारूलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1949
└ +सुमित्रा -कारूलाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1952
6. सुनील मकवाना रामपुरा b. 1981
└ +रेखा बाई - सुनील मकवाना दर्जी रामपुरा b. May 2, 1988
7. दिव्यान्श मकवाना रामपुरा b. 2008
6. भूपेंद्र मकवाना रामपुरा b. 1986
5. दुर्गा बाई -हिरालाल जादव मोरडा b. 1963
5. राजी बाई -गोपाल पँवार खजूरी जोरावर b. 1965
5. सुशीला पिता गोकुल मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1966
└ +गौतम लाल जी पंवार दर्जी मालीपुरा b. 1958; d. May 30, 2014
6. रेखाबाई - शिवनारायण सोलंकी दर्जी रानीगांव b. 1977
6. मीराबाई-महेश सोलंकी दर्जी भवानी मंडी b. 1981
6. रमेश पंवार दर्जी भेंसोदा मंडी---९६९४८५३१८५ b. April 16, 1984
└ +मनोहर बाई -रमेश गोतम पँवार भवानीमंडी b. 1988
7. दीपा पिता रमेश पंवार दर्जी भेंसोदा मंडी b. 2012

6. राधेशाम पंवार दर्जी भेंसोदा मंडी--9829930694 b. April 16, 1986
6. ममता पिता गोपाल पंवार दर्जी खजूरी जोरावर b. 1986
6. कमलेश पंवार दर्जी खजुरी जोरावर b. 1988
6. टीना पिता गोपाल पंवार दर्जी खजुरी जोरावर b. 1994
5. गुड्डी बाई -प्रहलाद चौहान नारायण गढ़ b. 1968
5. प्रहलाद मकवाना रामपुरा b. 1974
└ +चंदा बाई-प्रहलाद मकवाना रामपुरा b. 1978
6. शुभम मकवाना दरजी रामपुरा b. 1999
6. यश मकवाना रामपुरा b. 2001
5. मुन्नीबाई - नंदराम दर्जी सुलिया
5. भगवती-नंदराम चौहान सूलिया b. 1955
└ +nanmdram chohan suliya-bhawanimandi b. 1951
4. गोरधन लाल पँवार आवर b. February 22, 1948
└ +प्रेम बाई पिता भेरुलाल जी पँवार खजूरी पंथ b. 1951
5. किरण -घनशाम चौहान दरजी मंदसौर b. June 12, 1976
└ +घनशाम चौहान दरजी मंदसौर b. 1974
6. राहुल चौहान दरजी मंदसौर b. 1997
6. खुशबू पिता घन शाम चौहान दरजी मंदसौर b. 2000
5. संजय पँवार आवर b. 1977
└ +संतोष बाई पिता मूल चंद चौहान पावटी b. 1981
6. कमल किशोर पँवार आवर b. 1999
6. श्यामली पिता संजय पँवार आवर b. 2005
5. कपिल पँवार आवर b. 1981
└ +वर्षा पिता सुखदेव -भेरुलाल यादव दातपुर b. 1993
6. कुशाल पँवार आवर b. 2011
5. हेमराज पँवार आवर -9509438825 b. 1984
4. मुरली धर पंवार दर्जी आवर -9587910400 b. 1952
└ +कांति बाई पिता नंदराम सोलंकी गरोठ
5. कमलेश पँवार आवर
└ +गिरजा-कमलेश मुरलीधर पँवार आवर b. 1979
5. कमलेश पँवार जुल्मी b. 1975
5. संतोष बाई - रमेश पँवार बघूनिया b. 1978
5. विष्णु पँवार मालीपुरा b. 1980


4. कालूराम जी पंवार दरजी आवर b. आवर, झालावाड़ , भारत
└ +मांगीबाई-कालूराम जी भवानी शंकर जी पँवार आवर b. 1955
5. डॉ.प्रमोद पंवार दर्जी आवर --09414568129 b. November 6, 1970
└ +हंसा बाई-प्रमोद पंवार आवर- 09783772460 b. September 12, 1974, subhash marg, shamgarh,
6. रोहित कुमार पँवार दर्जी आवर b. 1993
└ +पायल - रोहित पंवार दर्जी आवर b. 1995
6. अतुल पंवार दर्जी आवर b. 1994
5. डॉ. महेश पंवार दर्जी आवर से भवानी मंडी -९४१४५-68183 b. May 8, 1973
└ +मंजू बाई पिता गनपत लाल मोतीलाल सोलंकी दर्जी भवानी मंडी b. 1976; m. circa May 8
6. बिना पिता महेश पंवार दर्जी आवर b. 1999
6. यश कुमार पंवार दर्जी आवर b. 2002
6. आयुषी पिता महेश पंवार दर्जी आवर b. 2006
5. डॉ. वीरेंदर पंवार दर्जी आवर -९४१३१-01409 b. 1982
└ +सरोज - डॉ॰वीरेंद्र पंवार आवर b. June 9, 1982, गोविंद सोलंकी दर्जी का घर, अरनोद, राजस्थान , India
6. ऋतिक पंवार दर्जी आवर b. 2000
6. ऋषि कुमार पंवार दर्जी आवर b. 2003
5. कल्पना -सुभाष सिसोदिया दर्जी शामगढ b. June 7, 1987
└ +सुभाष सिसौदिया दर्जी शामगढ़ --9926078973 b. March 27, 1981; m. April 17, 2006, आवर, झालावाड़, राजस्थान,
6. तनिष्का पिता सुभाष सिसोदिया दर्जी शामगढ b. May 3, 2007, आवर, झालावाड़ , राजस्थान, भारत
6. सांची पिता सुभाष सिसोदिया दर्जी शामगढ b. October 12, 2011
6. धानी पिता सुभाष सीसोदिया शामगढ़ b. January 11, 2017
3. पानी बाई पिता धूराजी पँवार आवर b. 1921
└ +नंदराम जी परमार दर्जी खानपुरिया b. 1917; d. 1988


4. केसरबाई-फ़ूलचंद राठौर दर्जी पाटन b. 1946


└ +फ़ूलचंद राठौर दर्जी पाटन b. 1947

5. अनीता-अरविंद कुमार गोयल खीमच b. 1963
└ +अरविंद गोयल दर्जी खीमच--09929995839 b. 1960

6. सुशील कुमार गोयल दर्जी खीमच b. 1982
6. साधना आत्मज अरविंद गोयल खीमच b. 1987

6. प्रीति आत्मज अरविंद गोयल खीमच b. 1999
6. रोहित गोयल दर्जी खीमच b. 1992




5. राम गोपाल राठौर दर्जी झालरा पाटन --८२३३२-५२९८७ b. July 18, 1969

└ +लताबाई -राम गोपाल राठौर दर्जी झालरा पाटन b. January 12, 1974
6. पंकज राठौर पाटन b. August 3, 1992

6. दीपेश राठौर पाटन b. October 30, 1996
6. नीरज राठौर झालरा पाटन b. June 14, 1994




5. अशोक राठौर दर्जी पाटन -९९२८६-60927 b. August 15, 1972
└ +मंजू बाई - अशोक राठौर दर्जी पाटन b. February 1, 1976

5. राकेश राठौर दर्जी पाटन - ९८२९६-96866
└ +हंसा बाई -राकेश फूलचंद राठौर दर्जी पाटन b. 1980

6. गौरव राठौर पाटन b. February 23, 2001
6. भूमिका पिता राकेश राठौर पाटन b. January 21, 2012

4. अवन्तीबाई - बालमुकंदजी चौहान हतूनिया b. 1950; d. October 3, 2017
└ +बाल मुकंद चौहान दर्जी हतुनिया b. 1943

5. संतोष बाई - ईश्वर लाल राठौर दर्जी शामगढ़ b. September 3, 1966



└ +ईश्वर लाल राठौर दर्जी शामगढ b. September 28, 1963, राठौर भवन ,राम मंदिर के सामने, Shamgarh, Mandsaur, Madhya Pradesh, India; m. circa December 8, 1982, दर्जी गली, 14,Jawahar Marg, हतूनिया, मंदसौर , Madhya Pradesh, 458883, India




6. सरिता-गिरिराज सोलंकी दर्जी डग b. October 25, 1985
└ +गिरिराज सोलंकी दर्जी डग--08239-87447 b. circa August 8, 1984

7. आयुषी पिता गिरिराज सोलंकी दर्जी डग b. October 9, 2006
7. शिविष्ठ सोलंकी डग b. 2012




6. सपना-पप्पू चौहान दर्जी नांदवेल b. July 21, 1987
└ +पप्पू चौहान दर्जी नांदवेल---,9753250320 b. August 15, 1985

7. lahar d/o pappu chohan nandvel b. 2011
6. राज कुमार राठौर दर्जी शामगढ--9826085394 b. November 5, 1989

└ +मीनाक्षी-राज कुमार राठौर शामगढ़ b. 1989
7. रजनीश राठौर शामगढ़ b. 2012

6. पायल-विकास पँवार कोटा b. November 10, 1997
└ +विकास पंवार दर्जी कोटा--90244 - 24985 b. 1991, kumbh kot, rajasthan, india

5. लक्ष्मीनारायण चौहान दर्जी हतुनिया b. 1972
└ +कृष्णा बाई पिता भेरूलाल सीताराम पंवार दर्जी हिंगोरिया b. 1975

6. राहुल कुमार चौहान दर्जी हतुनिया b. 1997
6. रवि कुमार चौहान दर्जी हतुनिया b. 1999

6. विक्रम कुमार -लक्षमीनारायणजी चौहान हतुनिया b. 1994
5. दिनेश चौहान दर्जी हतुनिया--- 9685239948 b. 1979

└ +अनुसूया -दिनेश चौहान दर्जी हतुनिया b. 1984
6. भूमिका पिता दिनेश चोहान दर्जी हतुनिया b. 1905

6. प्रीति पिता दिनेश चौहान दर्जी हतुनिया b. 1910
6. यश चौहान दर्जी हतुनिया b. 2008

4. बालचंद परमार दर्जी खानपुरिया b. 1960; d. 1954
└ +धन कुँवर बाई पिता मथुरालाल जी परमार बाबुल्दा

5. देवकरण परमार खानपुरिया 87420-71206 b. 1978
└ +बादाम -देव करण परमार खानपुरीया b. 1982

6. गिरजा माता बादाम बाई पिता देवकरन परमार खानपुरिया b. 2001



6. महिमा माता बादाम पिता देवकरन खानपुरिया b. 2004

6. नीलेश परमार खानपुरिया b. 2007
└ +नंदू बाई -बालाराम जी परमार खानपूरिया b. 1957

5. बजरंग लाल परमार दर्जी खानपुरिया b. 1974
└ +लताबाई-बजरंगलाल परमार दर्जी खानपुरिया b. 1977

6. श्रीकांत परमार दर्जी खानपुरिया b. 1996
6. विशाल परमार खानपुरिया b. 2000

5. भगवती पिता बालाराम परमार खानपुरिया b. 1982
└ +घनशाम बाघेला सगोरिया

5. संगीता -परमेश्वर पंवार दर्जी ढाबला गुजर से पाटन b. 1984
└ +परमेश्वर पंवार दर्जी पाटन / ढाबला से -----0978424708 b. June 9, 1984

3. बसंती बाई -किशनलाल जी मकवाना मोड़क
└ +किशन लाल जी मकवाना मोड़क b. 1915

4. प्रभुलाल जी मकवाना मोडक b. 1940
└ +जड़ाव बाई -प्रभुलाल मकवाना दर्जी मोडक b. August 12, 1945

5. घनशाम मकवाना दर्जी मोडक b. December 2, 1962
└ +रेखा- घनशाम मकवाना दर्जी मोड़क b. June 2, 1965, melkheda, shamgarh, mandsaur, bharat; m. December 2, 1984, melkheda, shamgarh , bharat

6. कुशल मकवाना दर्जी मोरक--७७३७२-57133 b. August 8, 1986
└ +संगीता - कुशल मकवाना दर्जी मोड़क b. 1992; m. December 6, 2014

6. हिमानी - हरीश राम गोपाल मकवाना दर्जी रामपुरा b. August 18, 1990, modak, rajasthan , bharat
└ +हरीश मकवाना दर्जी रामपुरा; m. December 6, 2014

6. अतुल मकवाना दर्जी मोड़क ८८९०८-83303 b. August 12, 1993



5. राम चरण मकवाना दर्जी मोडक--08505026535 b. 1972

└ +कविता-राम चरण मकवाना दर्जी मोडक --08505026535 b. October 5, 1977
6. कपिल मकवाना दर्जी मोडक b. 2000

6. कपीश मकवाना मोड़क b. 2000
6. मोहित मकवाना मोड़क b. 2004




5. महेश मकवाना दर्जी मोड़क ---९४६०३३२३१६ b. February 25, 1976
└ +श्वेता पिता महेंद्रसिंग जी जयपुर b. 1980

6. गोरांगी पिता महेश मकवाना कोटा
└ +श्वेता पिता महेंद्रसिंह जादौन राजपूत b. 1980

4. रामकन्या-शिवरतन राठौर संधारा b. 1942
└ +शिव रतन राठौर(जस्सा) दर्जी संधारा b. September 12, 1938

5. जगदीश शिव रतन राठौर दर्जी संधारा से बाबुल्दा b. 1958
6. साधना-अरुण सोलंकी नीमच

└ +अरुण( छोटू) सोलंकी नीमच
└ +मंजू बाई - जगदीश राठौर दर्जी बाबुल्दा b. 1963

6. श्याम राठौर दर्जी बाबूल्दा b. 1989
6. प्रीती -घनशाम मकवाना दर्जी गरोठ

└ +घनशाम मकवाना गरोठ
5. भगवती बाई -कैलाश चौहान दर्जी सुसनेर b. 1958

└ +कैलाश चौहान सुसनेर -8120903770; b. March 25, 1950
5. चंदर बाई -दीनबंधु परमार रींछड़िया b. 1962

└ +दीनबंधु परमार दर्जी रींछडिया b. 1959
6. कन्हैयालाल परमार दर्जी इन्दौर b. 1978

6. अनिल परमार दर्जी इन्दौर b. 1981
5. संतोष बाई - कन्हैया लाल परमार बाबूल्दा b. 1967

└ +कन्हैया लाल परमार दर्जी बाबुल्दा b. 1965
6. ऊषा पिता कन्हैया लाल ,परमार दर्जी बाबुल्दा b. 1989

└ +ताराचंद चौहान दर्जी हतुनिया b. 1985
5. ओम प्रकाश राठौर संधरा b. 1969

└ +गायत्री-ओम प्रकाश राठौर संधारा b. 1972
6. मोहन लाल राठौर संधारा b. 1988

6. राहुल राठौर संधारा b. 1988
6. विष्णु राठौर संधारा b. 1992

5. कृष्ण बाई पिता शिव रतन राठौर संधारा b. 1971
└ +अरुण मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1965

6. भावना आत्मज अरुण मकवाना रामपुरा b. 1995
4. राम रतन मकवाना मोड़क

└ +मोहन बाई पिता फकीर चंद जी चौहान मल्हार गढ़
5. राधेश्याम मकवाना मोड़क b. 1970

└ +सुमित्रा पिता बसन्तीलाल चौहान गरोठ b. 1973
6. दीक्षा पिता राधेश्याम मकवाना मोड़क b. 1994

6. मनीष मकवाना मोड़क b. 1995
6. आशीष मकवाना मोड़क b. 1997

5. राधा बाई -बालाराम नाथुलाल जी सोलंकी डग b. 1973
L+बालाराम सोलंकी दर्जी डग b. June 24, 1971

└ +राधा पिता रतनलाल मकवाना दर्जी मोरक b. 1975
2. हेमलता पिता बालाराम दर्जी डग b. 1993

2. सीमा पिता बालाराम सोलानी दर्जी डग b. 1996
2. कविता पिता बालाराम सोलंकी दर्जी डग b. 1997

2. पंकज सोलंकी दर्जी डग b. 1999
5. सुरेश मकवाना मोड़क -96443-49860 b. 1979

└ +रेखा पिता रामचन्द्र परमार पाटन
6. ऋषिका पिता सुरेश मकवाना मोड़क b. 2010

6. आयुषी पिता सुरेश मकवाना मोड़क b. 2013
4. किशोर जी मकवाना कोटा /मोड़क से

└ +कला बाई पिता देवीलाल जी धुलजी मकवाना गरोठ
5. भरत मकवाना कोटा *998291-59366 b. 1975

└ +संगीता पिता मोहन लाल करुलालजी राठौर चुपना b. 1985
6. मनन मकवाना कोटा b. 2008

5. रेखा -लालचंद राठौर प्रतापपुरा
4. कमला------मलहारगढ़

4. रामचंद्री बई -रतनलाल पँवार डग
4. मोहन बाई -भवानी शंकर जी चौहान मोड़क

└ +भवानी शंकर जी चौहान मोडक
5. प्रकाश चौहान मोड़क b. 1964

└ +अनीता पिता कमलेश सोलंकी डग
6. पूजा पिता प्रकाश चौहान मोड़क b. 1999

6. मेघा पिता प्रकाश चौहान मोड़क b. 2003
6. सलोनी पिता प्रकाश चौहान मोड़क b. 2006

6. संयम चौहान मोड़क b. 2013
5. मंजु बाई -गोपाल जी जादव सुकेत b. 1968

└ +गोपाल जादव सुकेत
6. अजय जादव सुकेत b. 1993

6. विजय जादव सुकेत b. 1995
5. राम गोपाल चौहान मोड़क (अविवाहित) b. 1987

5. मधुबाई पिता भवानी शंकर जी चौहान मोड़क
└ +------चौहान गुराड़ी

5. ललिता बाई ------शामगढ़
5. घनशाम चौहान मोड़क

└ +बेला बाई पिता देवीलाल जी राठौर मिटनखेड़ी b. 1985
6. नैतिक चौहान मोड़क b. 2009

3. प्यारेलाल जी पँवार आवर
4. राम किशन पँवार पचपहाड़ b. 1946


└ +दुर्गा बाई - राम किशन पँवार पचपहाड़ b. 1950

5. चन्दन बाला -रमेश चन्द्र सोलंकी गरोठ b. 1967



5. उमा शंकर पँवार पचपहाड़ 94602-20053 b. 1972└ +सीमा -उमा शंकर पँवार पचपहाड़ b. 1975



6. करिश्मा पिता उमाशंकर पँवार पचपहाड़ b. 2000
6. आशुतोष पँवार पचपहाड़ b. 2003
5. दिनेश पंवार दर्जी पचपहाड़ b. December 13, 1969
└ +सरोज - दिनेश पँवार पचपहाड़ b. September 25, 1969, Shamgarh, Mandsaur, Madhya Pradesh, India; m. circa February 13, 1989, shamgarh, Madhya Pradesh, Madhya Pradesh, India
6. अंकित पंवार दर्जी पचपहाड़ ---09770238690 b. 1990
6. मयंक पंवार दर्जी पचपहाड b. 1993
6. रुपाली पिता दिनेश पंवार दर्जी पचपहाड b. October 29, 1997
4. घीसीबाई पिता प्यारेलाल जी पँवार आवर b. 1957
└ +रामदयाल मकवाना मोड़क b. 1951
5. रामेश्वर मकवाना मोड़क *9001229738 b. 1971
└ +ममता-रामेश्वर मकवाना मोड़क b. 1975
6. सोनू मकवाना मोड़क b. 1992
6. संदीप मकवाना मोड़क b. 1994
6. हेमलता पिता रामेश्वर मकवाना मोड़क b. 1996
5. जगदीश मकवाना मोड़क *8107219282 b. 1979
└ +मंगला बाई पिता बालाराम चौहान बोलिया b. 1982
6. दिव्या पिता जगदीश मकवाना मोड़क b. 2005
6. धनंजय मकवाना मोड़क b. 2011
5. गिरधर गोपाल b. 1981
└ +मंजु बाई पिता बालाराम परमार बोलिया(खारखेड़ा) b. 1986
6. अजय मकवाना मोड़क b. 2007
6. दिव्यान्शी पिता गिरधर गोपाल मोड़क b. 2009
6. गीतिका पिता गिरधर गोपाल मोड़क b. 2011
3. कन्हैया लाल जी भेरूलाल जी पंवार दरजी आवर
└ +भंवरी बाई पिता नानुराम जी पँवार खजूरी जोरावर
4. हीरालाल पंवार दर्जी आवर b. 1952
└ +कलाबाई पिता भंवरलाल सोलंकी दर्जी खंदवास b. 1958
5. जनता बाई - भंवर लाल मदन लाल जी चौहान दर्जी सांगरिया b. 1978
└ +भंवरलाल चौहान दर्जी सांगरिया--09587919485
6. पवन चौहान दर्जी सांगरिया
└ +रीना पिता सत्य नारायण राठौर दर्जी बनी
5. राधेशाम पंवार दर्जी आवर b. 1988
└ +मंजू बाई पिता राधेशाम उकार लाल जी परमार दर्जी मिटन खेडी
5. टीना बाई - कैलाश जादव दर्जी बरदिया इस्त मुरार b. 1991
5. मीना पिता हीरालाल पंवार दर्जी आवर b. 1992
4. दाखा बाई पिता कन्हैया लाल जी भेरूलाल जी पंवार दर्जी आवर b. 1960
└ +दयाराम चौहान दर्जी हतुनिया--९७५२१-२७५७१ b. 1953
5. सुरेश चौहान दर्जी हतुनिया b. 1977
└ +devkanya d/o kanhyalal chohan nariya b. 1960
6. vishal chohan hatuniya b. 1997
6. sharda chohan hatuniya b. 1999
5. हुकमचंद चौहान दर्जी हतुनिया b. August 5, 1982
└ +सीमा -हुकम चंद चौहान हतूनिया b. August 5, 1982
4. रतन बाई पिता कन्हैया लाल जी भेरू लाल जी पंवार दर्जी आवर



└ +राम गोपाल मकवाना दर्जी राम पूरा
5. किशोर कुमार मकवाना दर्जी राम पूरा९९२६४-87980 b. 1968
└ +राम कन्या पिता राम नारायण जी सोलंकी दर्जी गरोठ b. 1970
6. हरीश मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1987
└ +हिमानी पिता घन शाम मकवाना दर्जी मोड़क b. 1990
6. सतीश मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1989
5. लेखराज मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1975
└ +सुमित्रा पिता प्रभु लाल गंगाराम पंवार दर्जी डग b. 1980
6. संयम मकवाना दरजी रामपुरा b. 2002
6. भुमिका पिता लेखराज मकवाना दर्जी रामपुरा b. 2005
5. प्रकाश चंद्र मकवाना दर्जी रामपुरा b. 1983
└ +रेखा -प्रकाश मकवाना रामपुरा b. December 27, 1988
6. पायल पिता प्रकाश मकवाना दर्जी रामपुरा b. 2007
5. शामा बाई - हरीश कुमार मकवाना दर्जी भवानी मंडी b. 1978
└ +हरीश कुमार राम बिलास मकवाना दर्जी भवानी मंडी
2. हुड़ी बाई पिता धुरालाल जी पँवार आवर b. 1890
└ +बालाराम जी सोलंकी दर्जी डग b. 1885, डग, राजस्थान, भारत; d. 1952
3. सालगराम जी सोलंकी दर्जी डग b. 1906; d. 1982
└ +देवु बाई -सालगराम जी सोलंकी डग
└ +Unknown
4. लाली बाई पिता सालगराम सोलंकी दर्जी डग b. 1924, डग, झालावाड़ , राजस्थान, भारत; d. 1994
└ +भगवान जी चौहान दरजी चाचरनी b. 1915; d. 1985
5. कमला बाई -तुलसी राम राठौर दर्जी मिटन् खेड़ी b. March 4, 1942
└ +तुलसी राम जी राठौर दर्जी मिट्टनखेडी b. 1940; d. April 6, 2014
6. राधेशाम राठौर दर्जी मिट्टनखेडी b. 1967
└ +कैलाशी बाई राधेशाम राठौर मीटन खेड़ी b. 1970
7. परमानंद राठोर दर्जी मिटन खेडी b. 1984
└ +मायाबाई पिता देवीलाल सिसोदिया दर्जी नारिया b. 1986
└ +माया-परमानंद राठोर दर्जी मिटन खेडी b. 1987
7. महेश राठौर दर्जी मिटनखेड़ी b. July 20, 1991
└ +रीमा बाई पिता ओमप्रकाश चोहान दर्जी खेजड़ी b. 1990
7. सीमा -दशरथ चौहान दर्जी हतुनिया b. 1986
6. दुर्गा बाई - रामचंद्र परमार दर्जी झालरा पाटन b. 1970
└ +रामचंद्र परमार दर्जी झालरा पाटन - ९८२९३-७१९९३ b. June 2, 1965; m. May 9, 1982, mittan khedi, bhanpura , madhya pradesh, bharat
7. रेखा -सुरेश मकवाना दर्जी मोड़क b. April 12, 1986
└ +सुरेश मकवाना दर्जी मोड़क
8. प्रियांशी पिता सुरेश मकवाना मोड़क b. September 9, 2010
8. आयुषी पिता सुरेश मकवाना मोड़क b. August 1, 2013
7. राहुल परमार दर्जी झालरा पाटन b. July 1, 1991
└ +नैना - राहुल परमार पाटन b. January 1, 1995
8. नंदिनी पिता राहुल परमार पाटन b. circa May 28, 2018
7. कृष्णा -बलराज चौहान संजित b. circa September 1, 1994
7. भूपेन्द्र-रामचंद्र परमार दर्जी पाटन b. circa December 31, 1996
6. बद्री लाल राठौर दर्जी मिटनखेड़ी --9754505296 b. 1973
└ +(No Name)
└ +राधा-बद्री लाल राठौर दर्जी मिटनखेड़ी b. 1975
7. पूजा पिता बद्रीलाल राठौर मिट न खेड़ी b. 1993
7. दीपक राठौर दर्जी मिट न खेड़ी b. 1995
7. आरती पिता बद्रीलाल राठौर दर्जी मिट न खेड़ी b. 1999
7. चंदा पिता बद्रीलाल राठौर मिट न खेड़ी b. 2001
6. शामलाल राठौर दर्जी मिटनखेड़ी --9669662239 b. 1976
└ +madhubai
7. कपिल राठौर दर्जी मिटनखेड़ी b. 1996
7. रोहित राठौर दर्जी मिट न खेड़ी b. 1998
6. सीताराम राठौर दर्जी मिटनखेड़ी --9009751488 b. 1979
└ +निर्मला बाई -सीताराम राठौर दर्जी मिटन खेडी b. 1982
7. सचिन राठौर दर्जी मिटनखेड़ी b. 2000
7. सुमिरन राठौर दर्जी मिट न खेड़ी b. 2006
6. ग्यारसी बाई -दिनेश mannalal ji परमार दर्जी बाबुल्दा b. 1982
└ +दिनेश मन्नालाल परमार बाबुल्दा 8959267195
5. गंगाराम चौहान दर्जी मिटन खेड़ी b. 1968
└ +विष्णु बाई -गंगाराम चौहान दरजी मिटन खेडी b. 1963
6. हरीश चौहान दरजी मिटनखेडी--9617084907 b. 1986
6. दिलीप चौहान दरजी मिटनखेडी b. 1993
6. ललिता पिता गंगाराम चौहान दर्जी मिटनखेड़ी b. 1990
6. shamu d/o gangaram chohan darji mit n khedi b. 1987
6. mukesh chohan darji b. 1996
5. गीता बाई -रामचंद्र सोलंकी दर्जी भवानी मंडी b. 1955
└ +रामचंद्र जी सोलंकी दरजी भवानीमंडी b. 1957; d. January 6, 2018
6. घनशाम सोलंकी भवानी मंडी b. August 30, 1971
└ +गुड्डी बाई घनशाम सोलंकी दर्जी भवानी मंडी b. October 14, 1978
7. पूजा -हिमांशु मकवाना रामपुरा b. June 23, 1995
└ +हिमांशु मकवाना दर्जी रामपुरा-- b. October 31, 1991, Rampura, Neemuch, Madhya Pradesh, India; m. circa April 26, 2018
7. सन्देश सोलंकी दर्जी भवानीमण्डी b. August 6, 1997
6. कृष्णा पिता रामचंद्र सोलंकी दर्जी भवानी मंडी -----9799956437 b. 1974
└ +राजेश परमार दर्जी भेन्सोदा मंडी
6. सुनीता -शैलेन्द्र पंवार बोलिया b. January 1, 1978
└ +शैलेन्द्र पंवार दर्जी बोलिया * b. August 29, 1977
7. वैष्णवी पिता शैलेन्द्र पंवार दरजी बोलिया b. 2006
7. नेहा पिता शैलेन्द्र पंवार दरजी बोलिया b. 1999
6. मनोज सोलंकी दरजी भवानीमंडी-----9460519081
└ +कृष्णा-मनोज-रामचंद्र सोलंकी भवानी मंडी b. 1987
7. संस्कार सोलंकी दर्जी भावानीमंडी b. May 6, 2006
7. सम्यक सोलंकी दर्जी भवानीमंडी b. circa April 17, 2012
4. भूलीबाई-रामचंद्र राठौर दर्जी प्रतापपुरा b. circa 1932, डग, झालावाड़ , Rajasthan, भारत; d. circa January 18, 2010
└ +रामचंद्र जी राठौर दर्जी प्रताप पुरा b. 1929; d. 2003
5. रुकमन बाई -नाथूलाल राठौर दर्जी मिटन खेड़ी b. January 15, 1942
└ +नाथूलाल राठौर दर्जी मिटन खेड़ी
6. मोहनलाल राठौर दर्जी मिटन खेड़ी b. 1968
└ +durga d/o prabhulal panwar awar b. 1971
6. जगदीश राठौर दर्जी मिटन खेड़ी b. 1974
└ +santosh-prabhulal darji b. 1978
7. पीरूलाल राठौर दर्जी मिटन खेड़ी b. 1999
7. ललिता- पंकज परमार चंद्वासा
6. मदन लाल राठौर दर्जी मिटन खेड़ी b. 1982
└ +संतोष बाई पिता बाबूलाल पंवार दर्जी बनजारी b. 1984
5. मांगीलाल राठौर दर्जी प्रताप पूरा b. July 9, 1951
└ +शान्ति बाई पिता किशन लाल बघेला दर्जी निपानिया से भवानी मंडी b. 1958
6. शामलाल राठौर दर्जी भेंसोदा मंडी --09414235673 b. July 20, 1971
└ +ललिता पिता सत्यनारायण चौहान दर्जी हेमड़ा b. 1969
7. नरेंद्र राठौर भेंसोदा b. September 27, 1996
└ +Unknown
7. गोविंद राठौर भेंसोदा b. March 6, 1996
└ +पायल - गोविंद राठौर भेंसोदा b. October 1, 1996
6. लाल चंद राठोर दर्जी प्रताप पूरा --961715557 b. 1980



6. ललिता -अशोक सोलंकी शामगढ़ b. 1972
└ +अशोक सोलंकी दर्जी शामगढ--9685412740 b. December 12, 1976
7. अंजली पिता अशोक सोलंकी दर्जी शामगढ b. July 30, 2003, सिनेमा रोड, शामगढ़, मंदसौर , मध्य प्रदेश, India
7. रोहित सोलंकी दर्जी शामगढ b. circa July 19, 2007
5. रोड़ीबाई पिता रामचंद्र राठौर दर्जी प्रताप पूरा b. 1956
└ +शंकर लाल कालूराम जी पँवार आवर b. 1952
6. गोविंद राम पँवार आवर b. 1981
└ +संगीता बाई पिता बसंती लाल परमार बनी b. 1982
7. गुन गुन पिता गोविंद राम पँवार आवर b. 2005
7. अक्षरा पिता गोविंद राम पँवार आवर b. 2010
6. सरस्वती -नरेंद्र राठौर मिश्रोली b. 1981
6. ललिता बाई -सुरेश बंशिलाल जी सोलंकी डग b. 1986
6. दिनेश कुमार पँवार आवर b. 1989
└ +कविता पिता देवीलाल राठौर असावती b. 1991
5. राधेशाम राठौर दर्जी प्रतापपुरा b. 1968
└ +तुलसी बाई पिता देवीलाल चौहान दर्जी लसुडिया b. 1971
6. साधना - सुरेश भेरुलाल चौहान मावता b. 1986
6. अनीता-चोथमल परमार बोलिया b. 1989
└ +चौथमल परमार दर्जी बोलिया b. 1986
7. राघव परमार बोलिया b. 2012
6. अशोक राठौर दर्जी प्रतापपुरा b. 1992
5. प्रेमबाई पिता रामचंद्र राठौर प्रतापपुरा b. 1966
└ +नंदकिशोर चौहान दर्जी शामगढ--9993729319 b. September 6, 1963
6. कॄष्णा - सुनिल पंवार दर्जी मेतवास b. April 14, 1984
└ +सुनील पंवार दर्जी मेत वास b. 1979
7. वेदिका पिता सुनील पंवार दर्जी मेत वास b. 2005
6. रानी-विनोद पंवार मेहतवास b. January 10, 1986
└ +विनोद कुमार पंवार दर्जी मेतवास b. 1982
6. चेतन चौहान दर्जी शामगढ--9669174709 b. July 20, 1988
└ +प्रीति-चेतन कुमार चोहान शामगढ b. 1992; m. circa February 21, 2009, छाछलाव, झालावाड , राजस्थान,
7. स्वाति- आत्मज चेतन कुमार चोहान शामगढ b. 2011
7. आयुष्मान चौहान शामगढ़ b. July 21, 2015
6. ज्योति-लखन चौहान धतूरिया
└ +लखन चौहान दर्जी धतुरिया ---9981400792 b. 1990; m. circa February 14, 2015, Shamgarh,
5. प्रकाश राठौर दर्जी प्रतापपुरा --9926395166 b. 1971, pratappura, suvasara, mandsaur, madhya pradesh
└ +रेखा -प्रकाश राठौर दर्जी प्रताप पूरा b. 1977, sanjit, mandsaur, madhya pradesh, bharat
6. भूपेंद्र राठौर प्रतापपुरा b. 1994
6. वर्षा पिता प्रकाश राठौर प्रतापपुरा b. 1997
5. कांति-राधेशाम दर्जी कचनारा b. July 21, 1972
└ +राधेशाम परमार दर्जी कचनारा --9753635834 b. March 27, 1970
6. रीना पिता राधेशाम परमार दर्जी कचनारा b. 1991
6. अर्जुन लाल परमार दर्जी कचनारा b. August 5, 1994


4. नन्दलाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1940, डग, Jhalawar, राजस्थान, india; d. December 26, 2014
└ +शामा बाई पिता जगन्नाथ दर्जी अरनोद b. July 19, 1945
5. पुष्पा बाई - गोपाल चौहान दर्जी मल्हार गढ़ b. 1966; d. 2012
└ +गोपाल चौहान दर्जी मल्हार गढ़--74155-10920 b. 1962
6. रानी बाई - जग जीवन सोलंकी दर्जी राम नगर b. 1989
└ +जग जीवन सोलंकी दर्जी राम नगर
6. सचिन चौहान दर्जी मल्हार गढ़ b. 1991
└ +मीनाक्षी - सचिन चौहान दर्जी मल्हार गढ़ b. 1991
5. अशोक सोलंकी दर्जी डग---9610636416 b. April 19, 1972
└ +माया बाई - अशोक सोलंकी दर्जी डग b. June 2, 1970
6. पवन सोलंकी दर्जी डग b. 1990
└ +पुजा पवन सोलंकी डग
7. हवी सोलंकी डग b. August 25, 2017
6. नवीन सोलंकी दर्जी डग -----08824849238 b. April 10, 1993
6. सूरज सोलंकी दर्जी डग b. 1994
5. लालचंद सोलंकी दर्जी डग b. 1980
5. सुमनबाई-दिनेश चोहान दर्जी नीमच b. 1968
└ +दिनेश चौहान दर्जी नीमच --7489316637 b. June 1, 1963
6. धीरजकुमार-दिनेशकुमार चौहान नीमच b. 1990
└ +सीमा -धीरज चौहान दर्जी नीमच b. July 4, 1995; m. circa June 11, 2015, हतुनिया
6. नीरज चौहान दर्जी नीमच b. 1992
4. लक्ष्मी नारायण जी सोलंकी दर्जी डग b. 1942; d. May 16, 2013, dag, jhalawad, bharat
└ +लीलाबाई - लक्ष्मी नारायण सोलंकी दर्जी डग b. 1947, sanjit, mandsaur , madhya pradesh, bharat; d. 2004
5. जमनाबाई-कारूलाल पंवार गारिया खेडी b. June 21, 1970
5. मुकेश सोलंकी दर्जी डग b. October 25, 1975
└ +शामा बाई - मुकेश सोलंकी दर्जी डग b. 1978
└ +सुनिता पिता उदेराम बाघेला दर्जी सगोरिया b. 1978
6. रवीना पिता मुकेश सोलंकी दर्जी डग b. 1993
6. उमेश सोलंकी दर्जी डग b. 1997
5. कालूराम सोलंकी दर्जी डग b. September 26, 1977
└ +गायत्री -कालूराम सोलंकी डग b. December 8, 1980
6. रेणुका आत्मज कालूराम सोलंकी दर्जी डग b. 1999
5. गायत्री बाई -बाबूलाल चौहान दर्जी घसोई b. March 7, 1981
└ +बाबुलाल चौहान दर्जी घसोई --९६८५९-91082 b. June 15, 1980; m. May 8, 1998, dag, jhalawad , rajasthan,
6. ऋतिक चौहान दर्जी घसोई b. 2000
6. विपिन चौहान दर्जी घसोई b. 2005
4. तुलसी बाई पिता सालगराम सोलंकी दर्जी डग b. 1945
└ +बालाराम जी परमार दर्जी मिटन खेडी b. 1942; d. 2001
5. प्रेम बाई - सत्य नारायण चौहान दर्जी हतुनिया b. 1962
└ +सत्य नारायण चौहान दर्जी हतुनिया--९६३०३-85854 b. 1959
6. मुकेश चौहान दर्जी हतुनिया --९६३०३८३८५४ b. 1981
└ +गायत्री बाई मुकेश चौहान दर्जी हतूनिया b. 1985
6. महेश चौहान दर्जी हतुनिया b. 1983
6. ताराचंद चौहान दर्जी हतुनिया b. 1985
└ +ऊषा पिता कन्हैया लाल ,परमार दर्जी बाबुल्दा b. 1989
└ +उषा - ताराचंद चौहान दर्जी हतुनिया
6. sarita chohan hatuniya b. 1989
5. संतोष बाई -गिरधारी लाल पँवार लुका b. 1968
└ +गिरधारी लाल पंवार दर्जी लुका चिक्न्या --97535-85803 b. 1960
6. गोविन्द पंवार दर्जी लुका चिक्न्या b. 1990
6. बाली पिता गिरधारी लाल पंवार दर्जी लुका चिक्न्या b. 1994
6. पुष्पा पिता गिरधारी लाल पंवार दर्जी लुका चिक्न्या b. 1998
5. मदनलाल परमार दर्जी भानपुरा-94254-41964 b. 1969
└ +मंजू बाई पिता गंगाराम चौहान दर्जी भवानी मंडी b. 1968
6. दुर्गेश परमार दर्जी भानपुरा- 94074-50788 b. 1990
└ +पूजा - दुर्गेश परमार भानपुरा
6. ज्योति पिता मदन लाल परमार दर्जी भानपुरा b. 1992
6. अनिल परमार दर्जी भानपुरा -90987-84053 b. 1996
5. हेमलता -सुन्दर लाल परमार दर्जी बोलिया b. 1980
└ +सुन्दरलाल परमार दर्जी बोलिया b. 1978
5. कृष्ण बाई - दिनेश चौहान दर्जी जयपुर / नारिया से b. 1976
└ +दिनेश चौहान दरजी नारिया से इंदौर--87408-51472 b. 1976
6. पूजा पिता देनेश चौहान दर्जी जयपुर b. 1996
6. अमीषा पिता दिनेश चौहान दर्जी जयपुर b. 1998
6. आशीष चौहान दर्जी जयपुर b. 2000
6. सपना पिता दिनेश चौहान दर्जी जयपुर b. 2002
5. विद्या बाई -बाबुलाल पंवार दर्जी आवर
└ +बाबुलाल पंवार दर्जी आवर
4. मोहनबाई - भवानीशंकर पंवार दर्जी ढाबला खीची b. December 18, 1945
└ +भवानी शंकर पंवार दरजी ढाबला खिंची b. 1947
5. कला बाई -रामलाल पंवार दर्जी बनजारी b. 1963
5. राधा बाई - मनोहर लाल पिता जगन्नाथ पंवार दर्जी आवर b. 1983
5. शामलाल पंवार दर्जी ढाबला खींची b. 1965
└ +d/o balaram solanki kolikheda
5. दाखाबाई-शिवलाल दर्जी मिटन खेड़ी b. 1968
4. तुलसी पिता सालगराम सोलंकी डग b. 1948
└ +बाला राम जी परमार मिटन खेड़ी
5. दर्जी मदनलाल-बालारामजी परमार भानपुरा-94254-41964
└ +मंजु बाई -मदन लाल परमार भानपुरा b. 1970
6. दुर्गेश मदन लाल परमार दर्जी भानपुरा --९१६५३-83770 b. July 1, 1990
6. ज्योति पिता मदन लाल परमार भानपुरा b. 1992
6. अनिल परमार भानपुरा b. 1994
4. लाली बाई भगवान् जी चौहान चाचरनी
└ +भगवान जी चौहान चाचरनी
5. रामगोपाल जी चौहान भवानी मंडी b. 1965; d. July 16, 2017
└ +धापूबाई - राम गोपाल चौहान भवानी मंडी b. 1968
6. मनीष चौहान भवानी मंडी b. before 1992
6. सतीश चौहान भवानी मंडी b. 1995
5. गंगाराम चौहान मिटनखेडी
5. कमला बाई - तुलसी रामजी राठौर मिटन खेडी
5. गीता बाई रामचंद्र सोलंकी भवानी मंडी
3. धन्ना लाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1920; d. 1961
└ +फ़तती बाई पिता पूरालाल जी गोयल सेमली शंकर b. 1931; d. 1995
4. सजन बाई -मांगीलाल चौहान दरजी ढाबला खींची b. 1945
4. कंचनबाई पिता धन्नालाल सोलंकी दर्जी डग b. 1947
└ +नाथुलाल जी गोयल दर्जी डग b. 1942; d. 1997
5. महेश गोयल दर्जी डग ---9024503104 b. 1965
└ +अयोध्या बाई - महेश गोयल डग b. 1968
6. मनोज गोयल दर्जी डग b. September 9, 1988
└ +पूनम-मनोज गोयल डग b. May 14, 1989
6. विकास गोयल दर्जी डग b. June 8, 1994
6. टीना - बाबूलाल हीरालाल जादव इंदौर b. 1992
└ +बाबूलाल जादव इंदौर
5. संतोष बाई-लाभचंद पंवार दर्जी आवर b. 1971
└ +लाभचंद पंवाऱ दर्जी आवर--93520-73076 b. 1962
6. लोकेश पंवार दर्जी आवर b. 1990
6. पायल पिता लाभ चंद पंवार दर्जी आवर b. 1992
6. भोलाराम पंवार दर्जी आवर b. 1994
5. भारती -मुकेश चौहान नरिया b. 1975
4. कन्हैयालाल सोलंकी दर्जी डग b. 1948
└ +प्रेमबाई - कन्हैयालाल सोलंकी दर्जी डग b. 1952
5. दिनेश सोलंकी दर्जी डग-९४६१६-१२६८७ b. 1971
└ +प्रेमबाई दिनेश सोलंकी दर्जी डग b. 1974
6. शैलेन्द्र सोलंकी दर्जी डग --९५२९८-८८००७ b. 1995
6. मोहित सोलंकी दर्जी डग b. 1998
6. यशपाल सोलंकी दर्जी डग b. 2002
6. निहाल सोलंकी दर्जी डग b. 2008
5. धापूबाई -बालाराम-शिव नारायण पंवार खारपा b. 1975
5. योगेश सोलंकी दर्जी डग b. 1984
└ +राधाबाई पिता बाबूलाल -भवानीराम मकवाना चोकुंडा b. 1987
6. nihar solanki darji b. 2008
6. devesh soalnki darji dag b. 2011
4. रामचंद्र सोलंकी दर्जी डग,-07435-283513 b. March 8, 1951
└ +लीला-रामचंद्रा सोलंकी डग b. 1954
5. गोविंद सोलंकी डग b. 1984
└ +आशा - गोविंद दर्जी डग b. 1985
6. अर्पण सोलंकी डग b. 2006
6. उत्कर्ष सोलंकी डग b. 2008


6. उन्नति पिता गोविंद सोलंकी डग b. 2010








5. मंजूबाई -प्रदीप - मदनलाल बाबुल्दा
5. राधाबाई -बालेश्वर चौहान दर्जी हतुनिया b. 1980
5. गोविन्द सोलंकी दर्जी डग ---09426762318 b. June 4, 1985
└ +आशाबाई - गोविन्द सोलंकी दर्जी डग
6. अर्पण सोलंकी दर्जी डग b. 2006
6. उत्कर्ष सोअल्नकी दर्जी डग b. 2008
6. उन्नति पिता गोविन्द सोलंकी दर्जी डग b. 2010
5. दिलीप सोलंकी दर्जी डग b. 1982
└ +अंजना - दिलीप सोलंकी दर्जी डग b. 1983
3. गोरधन लाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1923; d. September 2, 1995
└ +जानी बाई-गोरधन लाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1935; d. March 2015, dag, jhalawad, Rajasthan, भारत
4. कमलेश सोलंकी दर्जी डग b. March 28, 1961
└ +रामकन्या पिता माणकलाल सोलंकी दर्जी भवानीमंडी b. 1966
5. अनिता पिता कमलेश सोलंकी दर्जी डग b. 1983
5. दुर्गा सोलंकी दर्जी डग b. 1988
5. दीपक सोलंकी दर्जी डग b. 1989
5. दीपिका सोलंकी दर्जी डग b. 1991
5. नयना- ईश्वर लाल राठौर कुण्डलिया b. 1993, dag, gangdhar, jhalawad, rajasthan
└ +ईश्वरलाल-भेरूलाल राठौर दर्जी कुंडालिया b. 1990, vani, shamgarh, mandsaur, bharat
5. जीतेंद्र सोलंकी दर्जी डग b. 1995
4. प्रकाश सोलंकी दर्जी डग --09414596214 b. December 11, 1968, darji mohalla, dag, jhalawad , rajasthan, bharat
└ +कृष्णा-प्रकाश सोलंकी डग b. 1971
5. पायल - रोहित पंवार दर्जी आवर b. 1995
└ +रोहित कुमार पँवार दर्जी आवर b. 1993
5. नेहा पिता प्रकाश सोलंकी दर्जी डग b. 1998
4. राम किशन सोलंकी दर्जी डग
└ +संपत बाई -राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1958
5. इन्दिरा पिता राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1980
└ +सत्यनारायण राठौर दर्जी कुंभकोट b. 1978
6. rupesh rathore kumbhkot b. 1997
5. किरण-शिव शंकर राठौर बुढा b. 1980
└ +शिव शंकर राठौर दर्जी बुढा ---9406620485 b. January 29, 1971
6. विशाल राठौर दर्जी बुढा b. January 15, 1998
6. चिंतन राठौर दर्जी बुढा b. July 21, 2003
└ +भंवरी बाई - गोरधन लाल जी सोलंकी डग
4. गंगाराम पिता गोरधन लाल जी सोलंकी डग b. July 5, 1948
└ +मांगीबाई-गंगाराम सोलंकी दर्जी सुसनेर b. 1953
5. शामलाल सोलंकी दर्जी सुसनेर b. August 11, 1972
5. मोहनलाल सोलंकी दर्जी सुसनेर b. August 21, 1974
└ +सरिता - मोहन लाल गंगाराम सोलंकी दर्जी सुसनेर b. July 26, 1976
6. दोहित सोलंकी सुसनेर b. 2002
6. भूमि पिता मोहन लाल सोलंकी सुसनेर b. 2006
5. हेमलता -देवेंद्र परमार दर्जी रानापुर b. June 18, 1982
└ +देवेन्द्र परमार दर्जी रानापुर b. 1975
6. समर्थ परमार दर्जी रानापुर
6. डॉली पिता देवेंद्र परमार दर्जी रानापुर
3. चुन्नी लाल सोलंकी डग
└ +धन्नी बाई - चुन्नी लाल जी सोलंकी डग




5. मंजूबाई -प्रदीप - मदनलाल बाबुल्दा
5. राधाबाई -बालेश्वर चौहान दर्जी हतुनिया b. 1980
5. गोविन्द सोलंकी दर्जी डग ---09426762318 b. June 4, 1985
└ +आशाबाई - गोविन्द सोलंकी दर्जी डग
6. अर्पण सोलंकी दर्जी डग b. 2006
6. उत्कर्ष सोअल्नकी दर्जी डग b. 2008
6. उन्नति पिता गोविन्द सोलंकी दर्जी डग b. 2010
5. दिलीप सोलंकी दर्जी डग b. 1982
└ +अंजना - दिलीप सोलंकी दर्जी डग b. 1983
3. गोरधन लाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1923; d. September 2, 1995
└ +जानी बाई-गोरधन लाल जी सोलंकी दर्जी डग b. 1935; d. March 2015, dag, jhalawad, Rajasthan, भारत
4. कमलेश सोलंकी दर्जी डग b. March 28, 1961
└ +रामकन्या पिता माणकलाल सोलंकी दर्जी भवानीमंडी b. 1966
5. अनिता पिता कमलेश सोलंकी दर्जी डग b. 1983
5. दुर्गा सोलंकी दर्जी डग b. 1988
5. दीपक सोलंकी दर्जी डग b. 1989
5. दीपिका सोलंकी दर्जी डग b. 1991
5. नयना- ईश्वर लाल राठौर कुण्डलिया b. 1993, dag, gangdhar, jhalawad, rajasthan
└ +ईश्वरलाल-भेरूलाल राठौर दर्जी कुंडालिया b. 1990, vani, shamgarh, mandsaur, bharat
5. जीतेंद्र सोलंकी दर्जी डग b. 1995
4. प्रकाश सोलंकी दर्जी डग --09414596214 b. December 11, 1968, darji mohalla, dag, jhalawad , rajasthan, bharat
└ +कृष्णा-प्रकाश सोलंकी डग b. 1971
5. पायल - रोहित पंवार दर्जी आवर b. 1995
└ +रोहित कुमार पँवार दर्जी आवर b. 1993
5. नेहा पिता प्रकाश सोलंकी दर्जी डग b. 1998
4. राम किशन सोलंकी दर्जी डग
└ +संपत बाई -राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1958
5. इन्दिरा पिता राम किशन सोलंकी दर्जी डग b. 1980
└ +सत्यनारायण राठौर दर्जी कुंभकोट b. 1978
6. rupesh rathore kumbhkot b. 1997
5. किरण-शिव शंकर राठौर बुढा b. 1980
└ +शिव शंकर राठौर दर्जी बुढा ---9406620485 b. January 29, 1971
6. विशाल राठौर दर्जी बुढा b. January 15, 1998
6. चिंतन राठौर दर्जी बुढा b. July 21, 2003
└ +भंवरी बाई - गोरधन लाल जी सोलंकी डग
4. गंगाराम पिता गोरधन लाल जी सोलंकी डग b. July 5, 1948
└ +मांगीबाई-गंगाराम सोलंकी दर्जी सुसनेर b. 1953
5. शामलाल सोलंकी दर्जी सुसनेर b. August 11, 1972
5. मोहनलाल सोलंकी दर्जी सुसनेर b. August 21, 1974
└ +सरिता - मोहन लाल गंगाराम सोलंकी दर्जी सुसनेर b. July 26, 1976
6. दोहित सोलंकी सुसनेर b. 2002
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5. हेमलता -देवेंद्र परमार दर्जी रानापुर b. June 18, 1982
└ +देवेन्द्र परमार दर्जी रानापुर b. 1975
6. समर्थ परमार दर्जी रानापुर
6. डॉली पिता देवेंद्र परमार दर्जी रानापुर
3. चुन्नी लाल सोलंकी डग
└ +धन्नी बाई - चुन्नी लाल जी सोलंकी डग




Dr.Dayaram Aalok :Vanshavali writer

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दर्जी समाज के विडियो की लिंक्स-

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दर्जी निशुल्क समूह विवाह उत्सव बोलिया (PART 2)

निशुल्क दर्जी समूह विवाह सम्मेलन,बोलिया(पार्ट 3)

निशुल्क दर्जी समूह विवाह सम्मेलन,बोलिया,video (पार्ट 4)

Glimpses of Damodar Mahila Sangeet

Alpana and Vinod Chouhan in Damodar Mahila Sangeet

Neha and Deepesh Darji in Damodar Mahila Sangeet,Shamgarh

छाया पँवार दामोदर महिला संगीत मे

Aishwarya chouhan in Damodar Mahila SangeetArpita Rathore in Damodar Mahila Sangeet

Sunita in Damodar Mahila Sangeet

Apurva in Damodar Mahila Sangeet

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प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब रुकावट की कारगर हर्बल औषधि

किडनी फेल (गुर्दे खराब ) की रामबाण औषधि

सिर्फ आपरेशन नहीं ,किडनी की पथरी की १००% सफल हर्बल औषधि

पित्ताषय की पथरी के रामबाण हर्बल उपचार

आर्थराइटिस(संधिवात),गठियावात ,सायटिका की तुरंत असर हर्बल औषधि

डॉ.दयाराम आलोक : साहित्य सृजन और दर्जी समाज उन्नायक अनुष्ठान




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डॉ.दयाराम आलोक : साहित्य सृजन और दर्जी समाज उन्नायक अनुष्ठान

17.12.18

परमार ( पंवार ) राजवंश की उतपत्ति और इतिहास

                                                     

परमार ( पंवार ) राजवंश की उतपत्ति और राज्य
परमार पंवार राजवंश
परमार 36 राजवंशों में माने गए है | ८वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी विक्रमी तक इनका इस देश में विशाल      सम्राज्य था इन वीर क्षत्रियों के इतिहास का वर्णन करने से पूर्व उतपत्ति के सन्दर्भ देखे | परमारों तणी प्रथ्वी
उत्पत्ति :- परमार क्षत्रिय परम्परा में अग्निवंशी माने जाते है इसकी पुष्टि साहित्य और शिलालेख और शिलालेख भी करते है | प्रथमत: यहाँ उन अवतरणों को रखा जायेगा जिसमे परमारों की उतपत्ति अग्निकुंड से बताई गयी हे बाद में विचार करेंगे | अग्निकुंड से उतपत्ति सिद्ध करने वाला अवतरण वाक्पतिकुंज वि. सं. १०३१-१०५० के दरबारी कवी पद्मगुप्त द्वारा रचित नवसहशांक -चरित पुस्तक में पाया जाता है जिसका सार यह है की आबू -पर्वत वशिष्ठ ऋषि रहते थे | उनकी गो नंदनी को विश्वामित्र छल से हर ले गए | इस पर वशिष्ठ मुनि ने क्रोध में आकर अग्निकुंड में आहूति दी जिससे वीर पुरुष उस कुंड से प्रकट हुआ जो शत्रु को पराजीत कर गो को ले आया जिससे प्रसन्न होकर ऋषि ने उस का नाम परमार रखा उस वीर पुरुष के वंश का नाम परमार हुआ |
भोज परमार वि. १०७६-१०९९ के समय के कवि धनपाल ने तिलोकमंजरी में परमारों की उत्पत्ति सम्बन्धी प्रसंग इस प्रकार है |
वाषिष्ठेसम कृतस्म्यो बरशेतरस्त्याग्निकुंडोद्रवो |
भूपाल: परमार इत्यभिघयाख्यातो महिमंडले ||
अधाष्युद्रवहर्षगग्दद्गिरो गायन्ति यस्यार्बुदे |
विश्वामित्रजयोजिझ्ततस्य भुजयोविस्फर्जित गुर्जरा: ||
मालवा नरेश उदायित्व परमार के वि.सं. ११२९ के उदयपुर शिलालेख में लिखा है |
''अस्त्युवीर्ध प्रतीच्या हिमगिरीतनय: सिद्ध्दं: (दां) पत्यसिध्दे |
स्थानअच ज्ञानभाजामभीमतफलदोअखर्वित: सोअव्वुर्दाव्य: ||४||
विश्वमित्रों वसिष्ठादहरत व (ल) तोयत्रगांतत्प्रभावाज्यग्ये वीरोग्नीकुंडाद्विपूबलनिधनं यश्चकरैक एव ||५||
मारयित्वा परान्धेनुमानिन्ये स ततो मुनि: |
उवाच परमारा (ख्यण ) थिर्वेन्द्रो भविष्यसि ||६||
बागड़ डूंगरपुर बांसवाडा के अर्थुणा गाँव में मिले परमार चामुंडाराज द्वारा बनाये गए महादेव मंदिर के फाल्गुन सुदी ७ वि. ११३७ के शिलालेख में लिखा है - कोई प्रचंड धनुषदंड को धारण किया हुआ था और अपनी विषम द्रष्टि से यज्ञोपवित धारण कीये हुए था और अपनी विषम द्रष्टि से जीवलोक को डराने का पर्यत्न करता हुआ शत्रुदल के संहार्थ पसमर्थ था | ऐसा कोई प्रखर तेजस्वी अद्भुत पुरुष उस यज्ञ कुंड से मिला |
यह वीर पुरुष वसिष्ठ की आज्ञा से शत्रुओं का संहार करके और कामधेनु अपने साथ में लेकर ऋषि वशिष्ठ के चरण कमलों में नत मस्तक होता हुआ उपस्थित हुआ |उस समय वीर के कार्यों से संतुष्ट होकर ऋषि ने मांगलिक आशीर्वाद देते हुए उसको परमार नाम से अभिहित किया |
परमारों के उत्पत्ति सम्बन्धी ऐसे हि विवरण बाद के शिलालेख व् प्रथ्वीराज रासो आदी साहित्यिक ग्रंथो में भी अंकित किया गया है |
इन विवरणों के अध्धयन से मालूम होता हे की 11वि, १२ वि. शताब्दी के साहित्यिक व् शिलालेखकार उस प्राचीन आख्यान से पूरी तरह प्रभावित थे जिसमे कहा गया है की ऐक बार वशिष्ठ की कामधेनु गाय को विश्वामित्र की सेना को पराजीत करने के लिए कामधेनु ने शक, यवन ,पल्ह्व ,आदी वीरों को उत्पन्न किया |
फिर भी यह निस्संकोच कहा जा सकता है की 11वि. सदी में परमार अपनी उत्पति वशिष्ठ के अग्निकुंड से मानते थे और यह कथानक इतना पुराना हो चूका था जिसके कारन 11वि. शताब्दी के साहित्य और शिलालेखों में चमत्कारी अंश समाहित हो गया था वरना प्रकर्ति नियम के विरुद्ध अग्निकुंड से उत्पत्ति के सिद्धांत को कपोल कल्पित मानते है पर ऐसा मानना भी सत्य के नजदीक नहीं हे कोई न कोई अग्निकुंड सम्बन्धी घटना जरुर घटी है जिसके कारन यह कथानक कई शताब्दियों बाद तक जन मानस में चलता रहा है और आज भी चलन रहा है | अग्निवंश से उत्पत्ति सम्बन्धी इस घटना को भविष्य पुराण ठीक ढंग से प्रस्तुत करता है | इस पुराण में लिखा है |
''विन्दुसारस्ततोअभवतु |
पितुस्तुल्यं कृत राज्यमशोकस्तनमोअभवत ||44||
एत्सिमन्नेत कालेतुकन्यकुब्जोद्विजोतम: |
अर्वूदं शिखरं प्राप्यबंहाहांममथो करोत ||45|
वेदमंत्र प्रभाववाच्चजाताश्च्त्वाऋ क्षत्रिय: |
प्रमरस्सामवेदील च चपहानिर्यजुर्विद: ||46||
त्रिवेदी चू तथा शुक्लोथर्वा स परीहारक: |
भविष्य पुराण
भावार्थ यह हे की विंदुसार के पुत्र अशोक के काल में आबू पर्वत पर कान्यकुब्ज के ब्राह्मणों में ब्रह्म्होम किया और वेद मन्त्रों के प्रभाव से चार क्षत्रिय उत्पन्न किये सामवेद प्रमर ( परमार ) यजुर्वेद से चाव्हाण ( चौहान ) 47 वें श्लोक का अर्थ स्पष्ट नहीं है परन्तु परिहारक से अर्थ प्रतिहार और चालुक्य ( सोलंकी) होना चाहिए | क्यूंकि प्रतिहारों को प्रथ्विराज रासो आदी में अग्नि वंशी अंकित किया गया है और परम्परा में भी यही माना जाता है |
भविष्य पुराण के इन श्लोकों से कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती है | प्रथमतः आबू पर किये गए इस यज्ञ का समय निश्चिन्त होता हे यह यज्ञ माउन्ट आबू पर सम्राट अशोक के पत्रों के काल में २३२ -से २१५ ई. पू. हुआ था |दुसरे यह यज्ञ वशिष्ठ और विश्वामित्र की शत्रुता के फलस्वरूप नहीं हुआ | बल्कि वेदादीधर्म के प्रचार प्रसार के लिए ब्रहम यज्ञ किया और यह यज्ञ वैदिक धर्म के पक्ष पाती चार पुरुषार्थी क्षत्रियों के नेतृत्व में विश्वामित्र सम्बन्धी प्राचीन ट=यज्ञ घटना को भ्रम्वंश अंकित किया गया | वशिष्ठ की गाय सम्बन्ध घटना के समय यदि परमार की उत्पत्ति हो तो बाद के साहित्य रामायण ,महाभारत ,पुराण आदी में परमारों की उतपत्ति का उल्लेख आता पर ऐसा नहीं है | अतः परमारों की उत्पत्ति वशिष्ठ -विश्वामित्र सम्बन्धी घटना के सन्दर्भ में हुए यज्ञ से नहीं , अशोक के पुत्रों के काल में हुए ब्रहम यग्य से हुयी मानी जानी चाहिए |
आबू पर हुए यज्ञ को सही परिस्थतियों में समझने पर यह निश्किर्य है की वैदिक धर्म के उत्थान के लिए उसके प्रचार प्रसार हेतु किसी वशिष्ठ नामक ब्राहमण ने यग्य करवाया , चार क्षत्रियों ने उस यज्ञ को संपन्न करवाया ,उनका नवीन ( यज्ञ नाम ) परमार ,चौहान . चालुक्य और प्रतिहार हुआ | अब प्रसन्न यह हे की वे चार क्षत्रिय कोन थे ? जो इस यज्ञ में सामिल हुए थे | अध्धयन से लगया वे मूलतः सूर्य एवम चंद्र वंश क्षत्रिय थे |
अग्नि यज्ञ की घटना से पूर्व परमार कोन था ? इसकी विवेचना करते हे | पहले उन उदहारण को रखेंगे जो परमारों के साहित्य ,ताम्र पत्रादि में अंकित किये गए है और तत्वपश्चात उनकी विवेचना करेंगे|
सबसे प्राचीन उल्लेख परमार सियक ( हर्ष ) के हरसोर अहमदाबाद के पास में मिले है वि. सं. १००५ के दानपत्र में पाया गया हे जो इस प्रकार है -
परमभट्टारक महाराजाधिराज राज परमेश्वर
श्रीमदमोघवर्षदेव पादानुधात -परमभट्टारक्
महाराजाधिराज परमेश्वर श्रीमदकालवर्षदेव -
प्रथ्वीवल्लभ- श्रीवल्लभ नरेन्द्रपादनाम
तस्मिन् कुलेककल्मषमोषदक्षेजात: प्रतापग्निहतारिप्क्ष:
वप्पेराजेति नृप: प्रसिद्धस्तमात्सुतो भूदनु बैर सिंह (ह) |१ |
द्रप्तारिवनितावक्त्रचन्द्रबिम्ब कलकतानधोतायस्य कीतर्याविहरहासावदातया ||२||
दुव्यरिवेरिभुपाल रणरंगेक नायक: |
नृप: श्री सीयकसतमात्कुलकल्पद्र मोभवत |३|
यह सियक परमार जिसके पिता का नाम बैरसी तथा दादा का नाम वाक्पति "( वप्पेराय ) था , या वाक्पति मुंज परमार ( मालवा ) का पिता था और राष्ट्रकूटों का इस समय सामंत था | अतः इस ताम्रपत्र में पहले आपने सम्राट के वंश का परिचय देता हे और तत्त्व पश्चात् आपने दादा और आपने पिता का नाम अंकित करता है | भावार्थ यह है की - परमभट्टारक महाराजाधिराज राज परमेश्वर श्री मान ओधवर्षदेव उनकें चरणों का ध्यान करने वाला परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर श्रीमान अकालवर्षदेव उस कुल में वप्पेराज ,बैरसी ,व् सियक हुए | इससे अर्थ निकलता है परमार भी राष्ट्रकूटों से निकले हुए है थे | अधिक उदार अर्थ करें तो राष्ट्र कूटों की तरह परमार भी यादव थे यानी चन्द्रवंशी थे |
ब्रहमक्षत्रकुलीन: प्रलीनसामंतचक्रनुत चरण: |
सकलसुक्रतैकपूजच श्रीभान्मुज्ज्श्वर जयति ||
इस प्रकार विक्रमी की 11वि. सदी सो वर्ष की अवधि में हि परमारों की उत्पति के सन्दर्भ में तीन तरह के उल्लेख मिलते हेई अग्निकुंड से उत्पत्ति ,राष्ट्र कूटों से उत्पति ब्रहम क्षत्र कुलीन | इतिहासकार सो वर्ष की अवधि के हि इन विद्वानों ने तीन तरह की बाते क्यूँ लिख दी ? क्या इन्होने अज्ञानवश ऐसा लिखा ? हमारा विचार यह हे की तीनो मत सही है | मूलतः चंद्रवंशी राष्ट्रकूटों के वंश में थे | अतः प्रसंगवश १००५ वि.के ताम्र पात्र अपने लिए लिखा की जिस कुल में अमोध वर्ष आदी राष्ट्र कूट राजा थे उस कुल में हम भी है | परमार आबू पर हुए यज्ञ की घटना से सम्बंधित था अतः परमारों को अग्निवंशी भी अंकित किया गया | ओझाजी ने ब्रहमक्षत्र को ब्राहमण और क्षत्रिय दोनों गुणों युक्त बताया है | परमार पहले ब्राहमण थे फिर क्षत्रिय हो गए |
हमारे प्राचीन ग्रन्थ यह तो सिद्ध करते हे की बहुत से क्षत्रिय ब्राहमण हो गए मान्धाता क्षत्रिय के वंशज , विष्णुवृद्ध हरितादी ब्राहमण हो गए | चन्द्रवंश के विश्वामित्र , अरिष्टसेन आदी ब्राहमण को प्राप्त हो गए | पर ऐसे उदहारण नहीं मिल रहे हे जिनसे यह सिद्ध होता हे की कोई ब्राहमण परशुराम में क्षत्रिय के गुण थे | फिर भी ब्राहमण रहे ,शुंगो ,सातवाहनो ,कन्द्वों आदी ब्राहमण रहे | परमारों को तो प्राचीन साहित्य में भी क्षत्रिय कहा गया हे | यशोवर्मन कन्नोज ८वीं शताब्दी के दरबारी कवी वप्पाराव ( बप्पभट ) ने राजा के दरबारी वाक्पति परमार की क्षत्रियों में उज्वल रत्न कहा है | अतः परमार कभी ब्राहमण नहीं थे क्षत्रिय हि थे | ब्राहमण से क्षत्रिय होने की बात कल्पना हि है | इसका कोई आधार नहीं है ओझाजी ने ब्रहमक्षत्र का अर्थ ब्राहमण व् क्षत्रिय दोनों गुणों से युक्त बतलाया हे पर हमारा चिंतन कुछ दूसरी तरह मुड़ रहा हैं | यहाँ केवल '' ब्रह्मक्षेत्र '' शब्द नहीं है | यह ब्रहमक्षत्र कुल है | प्राचीन साहित्य की तरह ध्यान देते हे तो ब्रहमक्षत्र कुल की पहचान होती है |
श्रीमद भगवद गीता में चंद्रवंशी अंतिम क्षेमक के प्रसंग में लिखा है -
दंडपाणीनिर्मिस्तस्य क्षेमको भवितानृप:
ब्रहमक्षत्रस्य वे प्राक्तोंवशों देवर्षिसत्कृत: ||( भा.१ //22//44 )
इसकी व्याख्या विद्वानो ने इस प्रकार की है -
तदेव ब्रहमक्षत्रस्य ब्रहमक्षत्रकुलयोयोर्नी: कारणभूतो
वंश सोमवंश: देवे: ऋषिभिस्रचसतत्कृत अनुग्रहित इत्यर्थ |
अर्थात इस प्रकार मेने तुम्हे ब्राहमण और क्षत्रिय दोनों की उत्पति स्थान सोमवंश का वर्णन सुनाया है |
( अनेक संस्क्रत व्यख्यावली टीका भागवत स्कंध नवम के ४८६ प्र. ८७ के अनुसार ) इस प्रकार विष्णु पुराण अंश ४ अध्याय २० वायु पुराण अंश 99 श्लोक २७८-२७९ में भी यही बात कही गयी है | बंगाल के चंद्रवंशी राजा विजयसेन ( सेनवंशी ) के देवापाड़ा शिलालेख में लिखा गया है -
तस्मिन् सेनान्ववाये प्रतिसुभटतोत्सादन्र्व (ब्र) हमवादी |
स व्र ह्क्षत्रियाँणजनीकुलशिरोदाम सामंतसेन: ए . इ. जि . १ प्र ३०७
इसमें विजयसेन के पूर्वज सामंतसेन को ब्रहमवादी को ब्रहमवादी और ब्रहमक्षत्रिय कुल का शिरोमणि कहा है |
इन साक्ष्यों में ब्रहमक्षत्र कुल चन्द्रवंश के लिए प्रयोग हुआ है | किसी सूर्यवंशी राजा के लिए ब्रहमक्षत्र ? कुल का प्रयोग नजर नहीं आया |इससे मत यह हे की चंद्रवंशी को ब्रहमक्षत्र कुल भी कहा गया है | सोम क्षत्रिय + तारा ब्राहमनी =बुध | इसी तरह ययाति क्षत्रिय क्षत्रिय + देवयानी ब्राह्मणी =यदु | इस प्रकार देखते हे की चन्द्रवंश में ब्राहमण और क्षत्रिय दोनों जातियों का रक्त प्रवाहित था | संभवतः इस कारन चन्द्रवंश की और हि संकेत है | इस प्रकार परमार मूलतः चंद्रवंशी आधुनिक आलेख इस बात का समर्थन करते है - पंवार प्रथम चंद्रवंशी लिखे जाते थे | बहादुर सिंह बीदासर
पंजाब में अब भी चंद्रवंशी मानते है| अम्बाराया परमार ( पंवार ) चंद्रवंशी जगदेव की संतान पंजाब में है | और फिर परमार आबू के ब्रहमहोम में शामिल होने से अग्निवंशी भी कहलाये | आगे चलकर अग्निवंशी इतना लोकपिर्य हो गया की परमारों को अग्निवंशी हि कहने लग गए और शिलालेखों और साहित्य में अग्निवंशी हि अंकित किया गया |
इसके विपरीत परमारों के लिए मेरुतुन्गाचार्य वि. १३६१ स्थिवरावली में उज्जेन के गिर्दभिल्ल को सम्प्रति ( अशोक का पुत्र ) के वंश में होना लिखता है | गर्दभिल्ल ( गन्धर्वसेन ) विक्रमदित्य ( पंवार ) का पिता माना जाता है इससे परमार मोर्य सिद्ध होते है परन्तु सम्प्रति के पुत्रों में कोई परमार नामक पुत्र का अस्तित्व नहीं मिलता है | दुसरे सम्प्रति jain धरम अनुयायी था और उसका पिता अशोक ऐसा सम्राट था जिसने इस देश में नहीं ,विदेशों तक बोध धर्म फैला दिया था | अतः सम्प्रति के पुत्र या पोत्र का वैदिक धरम के लिए प्रचार के लिए होने वाले ब्रहम यज्ञ में शामिल होना समीचीन नहीं जान पड़ता | दुसरे यह आलेख बहुत बाद का 14वीं शताब्दी का है जो शायद परमारों की ऐक शाखा मोरी होने से परमारों की उत्पत्ति मोर्यों से होना मान लिया लगता है | अन्य पुष्टि प्रमाणों के सामने यह साक्ष्य विशेष महत्व नहीं रखता | अतः मूलतः परमार चन्द्रवंशी और फिर अग्निवंशी हुए |
प्राचीन इतिवृत -
परमारों का प्राचीन इतिवृत लिखने से पूर्व यह निश्चिन्त करना चाहिए की उनका प्राचीन इतिहास किस समय से प्रारंभ होता है | इतिहास के प्रकंड विद्वान् ओझाजी ने शिलालेखों के आधार पर परमारों का इतिहास घुम्राज के वंशज सिन्धुराज से शुरू किया है | जिसका समय परमार शासक पूर्णपाल के बसतगढ़ ( सिरोही -राजस्थान ) में मिले शिलालेखों की वि. सं. १०९९ के आधार पर पूर्णपाल से ७ पीढ़ी पूर्व के परमार शासक सिन्धुराज का समय ९५९ विक्रमी के लगभग होता है | और इस सिन्धुराज को यदि मुंज का भाई माना जाय तो यह समय १०३१ वि. के बाद का पड़ता है | इससे पूर्व परमार कितने प्राचीन थे ? विचार करते है |
चाटसु ( जयपुर ) के गुहिलों के शिलालेखों में ऐक गुहिल नामक शासक की शादी परमार वल्लभराज की पुत्री रज्जा से हुयी थी | इस हूल का पिता हर्षराज राजा मिहिर भोज प्रतिहार के समकालीन था जिसका समय वि. सं. ८९३ -९३८ था | यह शिलालेख सिद्ध करता है की इस शिलालेख का वल्लभराज ,सिन्धुराज परमार ( मारवाड़ ) का वंशज नहीं था इससे प्राचीन था |राजा यशोवर्मन वि. ७५७-७९७ लगभग कन्नोज का सम्राट था उसके दरबारी वाक्पति परमार के लिए कवी बप्पभट्ट आपने ब्प्पभट्ट चरित में लिखता है की वह क्षत्रियों में महत्वपूर्ण रत्न तथा परमार कुल का है इससे सिद्ध होता हे की कन्नोज में यशोवर्मन के दरबारी वाक्पति परमार चाटसु शिलालेख से प्राचीन है | शिलालेख और तत्कालीन साहित्य के विवरण के पश्चात अब बही व्=भाटों के विवरणों की तरह ध्यान दे |
भाटी क्षत्रियों के बहीभाटों के प्राचीन रिकार्ड के आधार पर इतिहास में टाड ने लिखा हे - भाटी मंगलराव ने शालिवाहनपुर ( वर्तमान में सियाल कोट भाटियों की राजधानी ) जब छूट गयी तो पूरब की तरह बढ़े और नदी के किनारे रहने वाले बराह तथा बूटा परमारों के यहाँ शरण ली | यह किला यदु - भाटी इतिहास्वेताओं के अनुसार सं. ७८७ में बना था वराहपती ( परमार के साथ मूलराज की पुत्री की शादी हुयी | केहर के पुत्र तनु ने वराह जाती को परास्त किया और अपने पुत्र विजय राज को बुंटा जाती की कन्या से विवाह किया | ये परमार हि थे |
देवराज देरावर के शासक को धार के परमारों से भी संघर्ष हुआ |
वराह परमारों के साथ इन भाटियों के सघर्ष का समर्थन राजपूताने के इतिहास के लेखक जगदीस सिंह गहलोत भी करते हे | देवराज का समय प्रतिहार बाऊक के मंडोर शिलालेख ८९४ वि. के अनुसार वि. ८९४ के लगभग पड़ता है | इस शिलालेख में लिखा हे की शिलुक प्रतिहार ने देवराज भट्टीक वल्ल मंडल ( वर्तमान बाड़मेर जैसलमेर क्षेत्र ) के शासक को मार डाला | इस द्रष्टि से देवराज से ६ पढ़ी पूर्व मंगलराव का समय 700 वि. के करीब पड़ता है | इस हिसाब से ७वीं शताब्दी में भी परमारों का राज्य राजस्थान के पश्चमी भाग पर था |
उस समय परमारों की वराह और बुंटा खांप का उल्लेख मिलता है नेणसी ऋ ख्यात बराह राजपूत के कहे छ; पंवारा मिले इसी प्रष्ट पर देवराज के पिता भाटी विजयराज और बराधक संघर्ष का वर्णन है | नेणसी ने आगे लिखा हे की धरणीवराह परमार ने अपने नो भाइयों में अपने राज्य को नो कोट ( किले ) में बाँट दिया | इस कारन मारवाड़ नोकोटी मारवाड़ कहलाती है |
नेणसी ने नोकोट सम्बन्धी ऐक छपय प्रस्तुत किया है -
मंडोर सांबत हुवो ,अजमेर सिधसु |
गढ़ पूंगल गजमल हुवो ,लुद्र्वे भाणसु |
जोंगराज धर धाट हुयो ,हासू पारकर |
अल्ह पल्ह अरबद ,भोजराज जालन्धर ||
नवकोटी किराडू सुजुगत ,थिसर पंवारा हरथापिया |
धरनो वराह घर भाईयां , कोट बाँट जूजू किया ||
अर्थात मंडोर सांवत ,को सांभर ( छपय को ,पूंगल गजमल को ,लुद्र्वा भाण को ,धरधाट ( अमरकोट क्षेत्र ) जोगराज को पारकर ( पाकिस्तान में ) हासू को ,आबू अल्ह ,पुलह को जालन्धर ( जालोर ) भोजराज को और किराडू ( बाड़मेर ) अपने पास रखा |
धरणीवराह नामक शासक शिलालेखीय अधरों पर वि १०१७ -१०५२ के बीच सिद्ध होता है | परन्तु परमारों के नव कोटों पर अधिकार की बात सोचे तो यह धरणीवराह भिन्न नजर आता है | मंडोर पर सातवीं शताब्दी के लगभग हरिश्चंद्र ब्राहमण प्रतिहार के पुत्रों का राज्य बाऊक के मंडोर के शिलालेख ८९४ वि. सं. सिद्ध होता है अतः धरणीवराह के भाई सांवत करज्य इस समय से पूर्व होना चाहिए | इस प्रकार लुद्रवा पर भाटियों का अधिकार 9वि. शताब्दी वि. में हो गया था | इस प्रकार भटिंडा क्षेत्र पर जो वराह पंवार शासन कर रहे थे | मेरी समझ धरणीवराह के हि वंशज थे जो अपने पूर्व पुरुष धरणीवराह के नाम से आगे चलकर वराह पंवार ( परमार ) कहलाने लगे थे | ऐसी स्थति में धरणीवराह का समय ६टी ७वि शताब्दी में परमार पश्चमी राजस्थान पर शासन कर रहे थे | परमारों ने यहाँ का राज्य नाग जाती से लिया होगा जेसे निम्न पद्य में संके
परमांरा रुधाविया ,नाग गिया पाताल |
हमें बिचारा आसिया किणरी झूले चाल ||
मंडोर की नागाद्रिन्दी ,वहां का नागकुंड ,नागोर (नागउर ) पुष्कर का नाम ,सीकर के आसपास का अन्नत -अन्नतगोचर क्षेत्र आदी नाम नाग्जाती के राजस्थान में शासन करने की और संकेत करते हें | तक्षक नाग के वंशज टाक नागोर जिले में 14वीं शताब्दी तक थे | उनमे से हि जफ़रखां गुजरात का शासक हुआ | यह नागों का राज्य चौथी पांचवी शताब्दी तक था | इसके बाद परमारों का राज्य हुआ | चावड़ा व् डोडिया भी परमारों की साखा मानी जाती है | चावडो की प्राचीनता विक्रम की ७वि चावडो का भीनमाल में राज्य था | उस वंश का व्याघ्रमुख ब्रह्मस्पुट सिद्धांत जिसकी रचना ६८५ वि. में हुयी उसके अनुसार वह वि. ६८५ में शासन कर रहा था इन सब साक्ष्यों से जाना जा सकता हे की राजस्थान के पश्चमी भाग पर परमार ६ठी शताब्दी से पूर्व हि जम गए थे और 700 वि. सं. पूर्व धरणीवराह नाम का कोई प्रसिद्द परमार था जिसने अपना राज्य अपने सहित नो भागो में बाँट दिया था |
इन श्रोतों के बाद जब पुरानो को देखते हे तो भविष्य पुराण के अनुवाद मालवा पर शासन करने वाले शासकों के नाम मिलते हे - विक्रमादित्य ,देवभट्ट ,शालिवाहन ,गालीहोम आदी | विक्रमादित्य परमार माना जाता था | इसका अर्थ हुआ विक्रम संवत के प्रारंभ में परमारों का अस्तित्व था | भविष्य पुराण के अनुसार अशोक के पुत्रों के काल में आबू पर्वत पर हुए ब्रहमयज्ञ में परमार उपस्थित था | इस प्रकार परमारों का अस्तित्व दूसरी शादी ई.पू. तक जाता है |
अब यहाँ परमारों के प्राचीन इतिवृत को संक्षिप्त रूप से अंकित किया जा रहा है | अशोक के पुत्रों के काल २३२ से २१४ ई.पू. आबू पर ब्रहमहोम (यज्ञ ) हुआ | इस यज्ञ में कोई चंद्रवंशी क्षत्रिय शामिल हुए | ऋषियों ने सोमवेद के मन्त्र से उसका यज्ञ नाम प्रमार( परमार ) रखा | इसी परमार के वंशज परमार क्षत्रिय हुए | भविष्य पुराण के अनुसार यह परमार अवन्ती उज्जेन का शासक हुआ | ( अवन्ते प्रमरोभूपश्चतुर्योजन विस्तृताम | अम्बावतो नाम पुरीममध्यास्य सुखितोभवत ||49|| भविष्य पुराण पर्व खंड १ अ. ६ इसके बाद महमद ,देवापी ,देवहूत ,गंधर्वसेन हुए | इस गंधर्वसेन का पुत्र विक्रमदित्य था भविष्य पुराण के अनुसार यह विक्रमादित्य जनमानस में बहुत प्रसिद्द रहा है | इसे जन श्रुतियों में पंवार परमार माना है | प्रथम शताब्दी का सातवाहन शासक हाल अपने ग्रन्थ गाथा सप्तशती में लिखता हे -
संवाहणसुहरतोसीएणदेनतण तुह करे लक्खम |
चलनेण विक्कमाईव् चरीऊँअणु सिकिखअंतिस्सा ||
भविष्य पुराण १४वि शदी विक्रम प्रबंध कोष आदी ग्रन्थ विक्रमादित्य के अस्तित्व को स्वीकारते हे | संस्कृत साहित्य का इतिहास बलदेव उपाध्याय लिखते हे -
सरम्या नगरीमहान न्रपति: सामंत चक्रंतत |
पाश्रवेततस्य च सावीग्धपरिषद ताश्र्वंद्र बिबानना |
उन्मत: सच राजपूत: निवहस्तेवन्दिन: ताकथा |
सर्वतस्यवशाद्गातस्स्रतिपंथ कालाय तस्मे नमः ||
उस काल को नमस्कार है जिसने उज्जेनी नगरी ,राजा विक्रमादित्य ,उसका सामंतचक्र और विद्वत परिषद् सबको समेट लिया | यह सब साक्ष्य विक्रमादित्य ने शकों को पराजीत कर भारतीय जनता को बड़ा उपकार किया | मेरुतुंगाचार्य की पद्मावली से मालूम होता हे की गर्दभिल्ल के पुत्र विक्रमादित्य ने शकों से उज्जयनी का राज्य लोटा दिया था |विक्रमादित्य का दरबार विद्वानों को दरबार था |विद्वानों की राय में इस समय पुन: कृतयुग का समय आ रहा था | अतः शकों पर विजय की पश्चात् विक्रमादित्य का दरबार पुनः विद्वानों का दरबार था | विद्वानों की राय से कृत संवत का सुभारम्भ किया | फिर यही कृत संवत ( सिद्धम्कृतयोद्ध्रे मोध्वर्षशतोद्ध्र्यथीतयो २००८५ ( २ चेत्र पूर्णमासी मालव जनपद के नाम से मालव संवत कहलाया |उज्जेन के चारों और का क्षेत्र मालव ( मालवा ) कहलाता था | उसी जनपद के नाम से मालव संवत कहलाया | फिर 9वीं शताब्दी में विक्रमादित्य के नाम से विक्रम संवत हो गया | कथा सरित्सागर में विक्रमादित्य के पिता का नाम महेंद्रदित्य लिखा गया है |
विक्रमादित्य के बाद भविष्य पुराण के अनुसार रेवभट्ट ,शालिवाहन ,शालिवर्धन ,सुदीहोम ,इंद्रपाल ,माल्यवान ,संभुदत ,भोमराज ,वत्सराज ,भाजराज ,संभुदत ,विन्दुपाल ,राजपाल ,महिनर,शकहंता,शुहोत्र ,सोमवर्मा ,कानर्व ,भूमिपाल ,रंगपाल ,कल्वसी व् गंगासी मालवा के शासक हुए | इसी प्रकार करीब ५वि ६ठी शताब्दी तक परमारों का मालवा पर शासन करने की बात भविष्य पुराण कहता हे | मालूम होता हे हूणों ने मालवा से परमारों का राज्य समाप्त कर दिया होगा | संभवत परमार यहाँ सामंत रूप थे
पश्चमी राजस्थान आबू ,बाड़मेर ,लोद्रवा ,पुगल आदी पर भी परमारों का राज्य था और उन्होंने संभतः नागजाती से यह राज्य छीन लिया था | इन परमारों में धरणीवराह नामक प्रसिद्द शासक हुआ जिसने अपने सहित राज्य को नो भागो में बांटकर आपने भाइयों को भी दे दिया था | वी .एस परमार ने विक्रमादित्य से धरणीवराह तक वंशावली इस प्रकार दी हे
विक्रमादित्य के बाद क्रमशः ,विक्रम चरित्र ,राजा कर्ण, अहिकर्ण ,आँसूबोल ,गोयलदेव ,महिपाल ,हरभान.,राजधर ,अभयपाल ,राजा मोरध्वज ,महिकर्ण ,रसुल्पाल,द्वन्दराय ,इति , यदि यह वंशावली ठीक हे तो वंशावली की यह धारा विक्रमादित्य के पुत्र या पोत्रों से अलग हुयी | क्यूँ की यह वंशवली भविष्य पुराण की वंशवली से मेल नहीं खाती हे | नवी शताब्दी में वराह परमारों से देवराज भाटी ने लोद्रवा ले लिया था तथा वि. की सातवीं में ब्राहमण हरियचंद्र के पुत्रों मंडोर का क्षेत्र लिया | सोजत का क्षेत्र हलो ने छीन लिया था तब परमारों का राज्य निर्बल हो गया था | आबू क्षेत्र में परमारों का पुनरुथान vikram की 11वीं शताब्दी में हुआ | पुनरुत्थान के इस काल में आबू पश्चमी राजस्थान के परमारों में सर्वप्रथम सिन्धुराज का नाम मिलता है इस प्रकार मालवा व् पश्चमी राजस्थान के परमारों का प्राचीन राज्य वर्चस्वहीन हो गया |

   


राठोड़ (राठौर) वंश के गोत्र आदि की जानकारी




राठोड़ो के गोत्र आदि इस प्रकार ह:****
(1) गोत्र --गोतम
(2)नदी--सरयू
(3)कुंड--सूर्य
(4)स्थान--अयोध्या पालगढ़ कन्नोज जोधपुर बीकानेर
(5)कुलदेवी--सतयुग में अभ्यन्न्दा त्रेता में भुन्न्दा व् राठेस्व्री द्वापर में पनख्नेच्या कलियुग में नागनेच्या व् करणी माता
(6)गुरु--वशिस्ठ व् गोतम
(7)शाखा--म्ध्यन्दिनी दानेसुरा
(8)पुरोहित--षोहड (सेवड)
(9)वेद--यजुर्वेद
(10)घोडा--दलसिंगार(सावक रण)
(11)तलवार--रणथली
(12)माला--रत्न की
(13)प्रवर--अंगीरा मोनक समाद
(14)वंश--सूर्य के दस वंशो में राठोड वंश
(15)धरम --सनातन
(16)गाय--कपिला
(17)नगारो --रणजीत
(18)निशान--पंचरंगा
(19)ढोल--भँवर
(20)ढोली--देधडा
(21)भाट--सिंगोलिया
(22)बारठ--रोहडिया
(23)बिरद--रण बंका राठोड
(24)उपाधि--कम्ध्व्ज भूरा राठोड
(25)भेरु--मंडोवर नाथ व् कोडमदेसर
(26)निकास--अयोध्धा पाल गढ़ कनोज जोधपुर
(27)चिन्ह--चील
(28)ईस्ट --सीता राम
(29)प्रणाम जय माताजी जय रघुनाथजी जय चारभुजा
(30)तिलक--रामानुज
(31)वर्क्ष--नीम
(32)गदी--आयोध्धा पाल गढ़ कनोज जोधपुर
(33)कुलदेव---पाबूजी राठोड
(34)झंडा--केसरिया कसूमल
(35)मन्त्र गोपाल
(36)खाडा जगजीत
(37)बंधेज--बांया
(38)तीर्थ--काशी
(39)राव--बडवा
(40)सूत्र--गोभिल
(41)किला--चिन्तामण
(42)भाखर--गंगेद
इस कुल ने बार बार ऐसे शूरवीरो को जन्म दिया ह। जिन्होंने अपनी वीरता त्याग बलिदान तथा अपने वचनों की खातिर अपने प्राण न्योछावर कर इस कुल का मान बढ़ाया ह। जो आज भि भोमिया;जुझार्जी;लोकदेवता;तथा अनेक रूपों में पूजे जाते ह। पाबूजी महाराज के बाद ओंम बन्ना जी इसका ताजा प्रमाण है|











पड़िहार वंश की कुलदेवी चामुंडा माता (सुधामाता)





राजस्थान के पाली जनपद में धरमदारी गांव में, पाली से १५ कि.मी.ऊपर पहाडी पर गाजणमाता का देवस्थान है । इस मंदिर की स्थापना १०५० वर्ष पूर्व हुई थी । मंदिर परिसर के आसपास १५ कि.मी.तक जंगल है । आषाढ शुक्ल पक्ष ९ (१३.७.२०१६)को यहां उत्सव हुआ था । इस निमित्त देवी गाजणमाता की महिमा इस लेख द्वारा प्रस्तुत कर रहे हैं ।

मंदिर का इतिहास

बहुत वर्ष पूर्व जोधपुर में राजा परिहारों का राज था । उनकी कुलदेवी चामुण्डा माता थी । अपने राजपुत्र के विवाह हेतु राजा ने देवी चामुण्डा से बारात में चलने की प्रार्थना की,तब देवी मां ने वचन दिया -मैं तेरे साथ चलती हूं । परंतु जहां मुझे कोई भक्त रोक देगा,मैं वहीं रुक जाऊंगी । बारात में जालोर जनपद के रमणीयां गांव के कृपासिंहजी भी अपनी १००० गायें लेकर आए थे । बारात जंगल से जा रही थी । साथ चल रहे रथ,घोडों और संगीत की ध्वनि से गायें डरकर भडक गईं । तब कृपासिंहजी ने गौमाता को पुकारा,हे मां !हे मां ! उसी क्षण मां चामुण्डा पहाड फाडकर अंतर्धान हुईं ! उसी दिन से गाजणमाता नाम प्रचलित हुआ । उस समय राजा के देवी मां से प्रार्थना करने पर मां ने कहा,अब मैं तुम्हारे साथ नहीं चलूंगी । अपने पुत्र के विवाह के पश्‍चात जहां तुम बंदनवार बांधने जाओगे वहां पीछे हटना क्योंकि बंदनवार बांधने के पश्‍चात छत गिर जाएगी । इससे तुम्हारी जान बच जाएगी । राजा ने विनम्रतापूर्वक मां से पूछा,इस सुनसान-घने जंगल में आपकी नित्य पूजा कौन करेगा ? मां ने कहा,जिस भक्त ने मुझे रोका है,वही मेरी पूजा करेगा । तभी से गाजणमाता की पूजा प्रारंभ हुई और उस गांव का नाम धरमदारी रखा । इसी प्रकार कृपासिंहजी के परिवार से यह पूजा आज तक संपन्न की जा रही है । जोगसिंहजी राजपुरोहितजी के पश्‍चात अब भंवरसिंहजी राजपुरोहितजी मां की पूजा-अर्चना करते हैं ।

भक्तों के निवास हेतु मंदिर में सुव्यवस्था

अ. दोनों नवरात्रि में यहां होमहवन और विशेष पूजा होती है । आषाढ मास की नवमी को गुजरात,राजस्थान से हजारों भक्त मां के दर्शन के लिए पैदल यात्रा कर अपनी मनोकामना मांगने आते हैं । पहाड पर जंगल में यह मंदिर होते हुए भी यहां अभी तक चोरी नहीं हुई।

आ. पहाड पर बसे मंदिर तक जाने के लिए पहाड के दोनों ओर से ३०० सीढियां हैं । ऊपर तक गाडी जाने की व्यवस्था भी अभी की गई है । भक्तों के निवास के लिए भी व्यवस्था उपलब्ध है ।

-श्री.भागीरथ सिंह राजपुरोहित,सिंहगड मार्ग,पुणे.

देवी मां को प्रसन्न करने के लिए…

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देवी मां की उपासना के प्रत्येक कृत्य का एक शास्त्र है । आदिशक्ति श्री दुर्गादेवी एवं अन्य सर्व देवियों के पूजन से संबंधित सामान्य कृत्यों की जानकारी आगे दी है ।

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विशिष्ट देवी को विशिष्ट फूल चढाने का अध्यात्मशास्त्रीय आधार

विशिष्ट फूलों में विशिष्ट देवता के पवित्रक, अर्थात उस देवता के सूक्ष्मातिसूक्ष्म कण आकर्षित करने की क्षमता होती है । ऐसे फूल जब देवता की मूर्ति पर चढाते हैं, तो मूर्ति को जागृत करने में सहायता मिलती है । चढाने हेतु उपयुक्त फूलों के नाम – श्री दुर्गा-मोगरा, श्री लक्ष्मी-गेंदा, श्री शारदा-रातरानी, श्री वैष्णोदेवीरजनीगंधा, श्री विंध्यवासिनी-कमल ।

ईन्दा शाखा प्रतिहार ( पडिहार , परिहार राजपूत ) ये श्री चामुण्डा देवी जी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते है तथा वरदेवी के रूप में
गाजन माता को भी पूजते है , तथा देवल शाखा प्रतिहार ( पडिहार ,परिहार राजपूत ) ये सुंधा माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते है ,
पुराणो से ग्यात होता है कि भगवती दुर्गा का सातवा अवतार कालिका है , इसने दैत्य शुम्भ , निशुम्भ , और सेनापती चण्ड , मुण्ड का नाश किया था , तब से श्री कालिका जी चामुण्डा देवी जी के नाम से प्रसिद्द हुई , इसी लिये माँ श्री चामुण्डा देवी जी को आरण्यवासिनी , गाजन माता तथा अम्बरोहिया , भी कहा जाता है , पडिहार नाहडराव गाजन माता के परम भक्त थे , वही इनके वंशज पडिहार खाखू कुलदेवी के रूप में श्री चामुण्डा देवी जी की आराधना करते थे , प्रतिहार ,पडिहार , परिहार राजपूत वंशजो का श्री चामुण्डा देवी जी के साथ सम्बंधो का सर्वप्रथम सटीक पडिहार खाखू से मिलता है , पडिहार खाखू श्री चामुण्डा देवी जी की पूजा अर्चना करने चामुण्डा गॉव आते जाते थे , जो कि जोधपुर से ३० कि. मी. की दूरी पर स्थित है , घटियाला जहॉ पडिहार खाखू का निवास स्थान था , जो चामुण्डा गॉव से ४ कि. मी. की दूरी पर है ,श्री चामुण्डा देवी का मंदिर चामुण्डा गॉव में ऊँची पहाडी पर स्थित है , जिसका मुख घटियाला की ओर है , ऐसी मान्यता है कि देवी जी पडिहार खाखू जी के शरीर पर आती थी ,
** श्री चामुण्डा देवी जी ( गढ जोधपुर ) **
जोधपुर राज्य के संस्थापक राव जोधा के पितामाह राव चुण्डा जी का सम्बंध भी माता चामुण्डा देवी जी से रहा था , सलोडी से महज 5 कि. मी. की दूरी पर चामुण्डा गॉव है , वहा पर राव चुण्डा जी देवी के दर्शनार्थ आते रहते थे , वह भी देवी के परम भक्त थे , ऐसी मान्यता है कि एक बार राव चुण्डा जी गहरी नींद में सो रहे थे तभी रात में देवी जी ने स्वप्न में कहा कि सुबह घोडो का काफिला वाडी से होकर निकलेगा , घोडो कि पीठ पर सोने की ईंटे लदी होगीं वह तेरे भाग्य में ही है , सुबह ऐसा ही हुआ खजाना एवं घोडे मिल जाने के कारण उनकी शक्ति में बढोत्तरी हुई , आगे चलकर इन्दा उगमसी की पौत्री का विवाह राव चुण्डा जी के साथ हो जाने पर उसे मण्डौर का किला दहेज के रूप में मिला था , इसके पश्चात राव चुण्डा जी ने अपनी ईष्टदेवी श्री चामुण्डा देवी जी का मंदिर भी बनवाया था , यहा यह तथ्य उल्लेखनीय है कि देवी कि प्रतिष्ठा तो पडिहारो के समय हो चुकी थी , अनंतर राव चुण्डा जी ने उस स्थान पर मंदिर निर्माण करवाया था मंदिर के पास वि. सं. १४५१ का लेख भी मिलता है ।
अत: राव जोधा के समय पडिहारों की कुलदेवी श्री माँ चामुण्डा देवी जी की मूर्ति जो कि मंडौर के किले में भी स्थित थी , उसे जोधपुर के किले में स्थापित करबाई थी , राव जोधा जी तो जोधपुर बसाकर और मेहरानगढ जैसा दुर्ग बनाकर अमर हो गये परंतु मारवाड की रक्षा करने वाली परिहारों की कुलदेवी श्री चामुण्डा देवी जी को अपनी ईष्टदेवी के रूप में स्वीकार कर संपूर्ण सुरक्षा का भार माँ चामुण्डा देवी जी को सौप गये , राव जोधा ने वि. सं. १५१७ ( ई. १४६० ) में मण्डौर से श्री चामुण्डा देवी जी की मूर्ति को मंगवा कर जोधपुर के किले में स्थापित किया ,
श्री चामुण्डा महारानी जी मूलत: प्रतिहारों की कुलदेवी थी राठौरों की कुलदेवी श्री नागणेच्या माता जी है , और राव जोधा जी ने श्री चामुण्डा देवी जी को अपनी ईष्टदेवी के रूप में स्वीकार करके जोधपुर के किले में स्थापित किया था , ।।
** देवल ( प्रतिहार , परिहार ) वंश **
सुंधा माता जी का प्राचीन पावन तीर्थ राजिस्थान प्रदेश के जालौर जिले की भीनमाल तहसील की जसवंतपुरा पंचायत समिती में आये हुये सुंधा पर्वत पर है , वह भी भीनमाल से २४ मील रानीवाडा से १४ मील और जसवंतपुरा से ८ मील दूर है । सुंधा पर्वत की रमणीक एवं सुरम्य घाटी में सांगी नदी से लगभग ४०-४५ फीट ऊँची एक प्राचीन सुरंग से जुडी गुफा में अषटेश्वरी माँ चामुण्डा देवी जी का पुनीत धाम युगो युगो से सुसोभित है , इस सुगंध गिरी अथवा सौगंधिक पर्वत के नाम से लोक में " सुंधा माता " के नाम से विख्यात है , जिनको देवल प्रतिहार अपनी कुलदेवी के रूप में पूजा अर्चना करते है ।।
वंश - अग्निवंश
गोत्र - कपिल
कुलदेवी - चामुण्डा देवी

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 ( सुंधा माता)
वरदेवी - गाजन माता
कुलदेव - विष्णु भगवान



हिन्दू समाज मे कुलदेवी का महत्व और पूजन विधि


   

 हिन्दू पारिवारिक आराध्य व्यवस्था में कुल देवता/कुलदेवी का स्थान सदैव से रहा है प्रत्येक हिन्दू परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज हैं जिनसे उनके गोत्र का पता चलता है बाद में कर्मानुसार इनका विभाजन वर्णों में हो गया विभिन्न कर्म करने के लिए जो बाद में उनकी विशिष्टता बन गया और जाती कहा जाने लगा |
पूर्व के हमारे कुलों अर्थात पूर्वजों के खानदान के वरिष्ठों ने अपने लिए उपयुक्त कुल देवता अथवा कुलदेवी का चुनाव कर उन्हें पूजित करना शुरू किया था ताकि एक आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्ति कुलों की रक्षा करती रहे जिससे उनकी नकारात्मक शक्तियों/उर्जाओं और वायव्य बाधाओं से रक्षा होती रहे तथा वे निर्विघ्न अपने कर्म पथ पर अग्रसर रह उन्नति करते रहे |
समय क्रम में परिवारों के एक दुसरे स्थानों पर स्थानांतरित होने धर्म परिवर्तन करने आक्रान्ताओं के भय से विस्थापित होने जानकार व्यक्ति के असमय मृत होने संस्कारों के क्षय होने विजातीयता पनपने इनके पीछे के कारण को न समझ पाने आदि के कारण बहुत से परिवार अपने कुल देवता /देवी को भूल गए अथवा उन्हें मालूम ही नहीं रहा की उनके कुल देवता /देवी कौन हैं या किस प्रकार उनकी पूजा की जाती है | कुल देवता /देवी की पूजा छोड़ने के बाद कुछ वर्षों तक तो कोई ख़ास अंतर नहीं समझ में आता किन्तु उसके बाद जब सुरक्षा चक्र हटता है तो परिवार में दुर्घटनाओं नकारात्मक ऊर्जा वायव्य बाधाओं का बेरोक-टोक प्रवेश शुरू हो जाता है उन्नति रुकने लगती है पीढ़िया अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाती
   
कुलदेवी कृपालु होती हैं |वे उपासक की भावना को ज्यादा महत्व देती हैं||पूजा की प्रक्रिया मे कुछ दोष रह जाने पर भी कुलदेवी का आशीर्वाद अवश्य मिलता है|
1.जब भी आप घर में कुलदेवी की पूजा करे तो सबसे जरूरी चीज होती है पूजा की सामग्री| पूजा की सामग्री इस प्रकार ही होना चाहिये- ४ पानी वाले नारियल,लाल वस्त्र ,10 सुपारिया ,8 या 16 श्रंगार कि वस्तुये ,पान के 10 पत्ते , घी का दीपक,कुंकुम ,हल्दी ,सिंदूर ,मौली ,पांच प्रकार कि मिठाई ,पूरी ,हलवा ,खीर ,भिगोया चना ,बताशा ,कपूर ,जनेऊ ,पंचमेवा |
2.ध्यान रखे जहा सिन्दूर वाला नारियल है वहां सिर्फ सिंदूर ही चढ़े बाकि हल्दी कुंकुम नहीं |जहाँ कुमकुम से रंग नारियल है वहां सिर्फ कुमकुम चढ़े सिन्दूर नहीं |
3.बिना रंगे नारियल पर सिन्दूर न चढ़ाएं ,हल्दी -रोली चढ़ा सकते हैं ,यहाँ जनेऊ चढ़ाएं ,जबकि अन्य जगह जनेऊ न चढ़ाए |
4.पांच प्रकार की मिठाई ही इनके सामने अर्पित करें| साथ ही घर में बनी पूरी -हलवा -खीर इन्हें अर्पित करें|
5. ध्यान रहे की साधना समाप्ति के बाद प्रसाद घर में ही वितरित करें ,बाहरी को बिल्कुल न दें|
6.इस पूजा में चाहें तो दुर्गा अथवा काली का मंत्र जप भी कर सकते हैं ,किन्तु साथ में तब शिव मंत्र का जप भी अवश्य करें|
7.  सामान्यतय पारंपरिक रूप से कुलदेवता /कुलदेवी की पूजा में घर की कुँवारी कन्याओं को शामिल नहीं किया जाता और उन्हें दीपक देखने तक की मनाही होती है| तो घर की कुँवारी कन्याओं इस पूजा से दूर रखें अन्यथा देवी देवता नाराज हो जाते है |

16.12.18

परमार (पँवार)वंश की कुलदेवी सच्चीयाय माता का विवरण




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Sachchiyay Mata, Osiyan

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सच्चियाय ( सच्चिवाय ) माता का भव्य मंदिर जोधपुर से लगभग ६० कि. मी. की दूरी पर ओसियॉ में स्थित है इसी लिये इनको ओसियॉ माता भी कहा जाता है , ओसियॉ पुरातत्विक महत्व का एक प्राचीन नगर है , ओसियॉ शहर कला का एक महत्वपूर्ण केन्द्र होने के साथ ही धार्मिक महत्व का क्षेत्र रहा है यहॉ पर ८ वीं १२ वीं शताब्दी के कालात्मक मंदिर ( ब्रह्मण एवं जैन ) और उत्कष्ट मूर्तियॉ विराजमान है , परमार क्षत्रियो के अलावा यह ओसवालो की भी कुलदेवी है , स्थानीय मान्यता के अनुसार इस नगरी का नाम पहले मेलपुरपट्टन था , बाद में यह उकेस के नाम से जाना गया फिर बाद में यह शब्द अपभ्रंश होकर ओसियॉ हो गया , एक ढुण्ढिमल साधू के श्राप दिये जाने पर यह गॉव उजड गया था , उप्पलदेव परमार राजकुमार के द्वारा यह नगर पुन: बसाया गया था , उसने यहा ओसला लिया था अथवा शरण ली थी , इसी के कारण इस नगर का नाम ओसियॉ नाम पड गया था , लेखको के आधार पर भीनमाल के परमार राजकुमार के द्वारा ओसियॉ नगर बसाने का उल्लेखनीय मिलता है ।।


भीनमाल में राजा भीमसेन पंवार राज्य करते थे उनके दो पुत्र हुये बडा उपलदा और छोटा सुरसुदरू राजा भीमसेन ने अपने छोटे पुत्र को उत्तराधिकारी घोषित कर बडे पुत्र उपलदे को देश निकाला दे दिया था , तब राजकुमार उपलदे ने इसी जगह ओसियॉ में शरण ली थी जो ये जगह उजडी हुई पडी थी , वहा पर एक माता जी का स्थान था जहा पर माँ के चरण चिन्ह के निशान एक चबूतरे पर स्थित थे , उसने आकर माँ को प्रणाम किया और रात्रि होने पर वहा सो गया , तब श्री चामुण्डा देवी जी ने प्रगट होकर पूछा कि तू कौन है , इस पर उपलदे ने कहा कि में पंवार राजपूत हू यहा पर नगर बसाना चाहता हूँ , तब देवी जी ने कहा कि सूर्य उदय होने पर जितनी दूर तक तुम अपना घोडा घुमाओगे शाम तक उस जगह मकान बन जायेंगे दिन उगने पर उसने अपना घोडा ४८ कोस तक घुमाया और घर बसने लगे मगर रात्री मे सभी घर फिर ध्वस्त होने लगे , तब राजकुमार ने देवी से कहा कि माँ ये क्या हो रहा है माँ ने कहा कि तू पहले मेरा मंदिर बना तब तेरा शहर निर्माण करना राजकुमार बोला माँ मेरे पास तो कुछ भी नही है में तेरा मंदिर कैसे निर्माण करवाऊ माँ ने तभी गढा हुआ धन पानी सभी सामग्री बताई , मंदिर का निर्माण होने पर उपलदे ने देवी से पूछा कि मूर्ति सोना चॉदी ,या पत्थर की कराऊ तब देवी जी ने कहा कि तुम शांत रहना में स्वयं पृथ्वी से प्रगट होऊँगी , माता जब तीसरे दिन धरती से पृगट हुई तब आकाश में से जोर से गर्जना हुई मानो भूकम्प आ गया हो , देवी ने राजकुमार से कहा था कि तुम चिल्लाना मत मगर राजकुमार डर की बजह से चिल्लाना लगा तब माता धरती में से आधी निकली और आधी जमीन के अंदर ही रह गयी इस पर माता राजकुमार पर कुपित हुई मगर माँ तो माँ होती है माता ने उसको मॉफ कर दिया , और मंदिर के सामने महल बनाकर रहने को कहा , राजकुमार बोला कि माँ मकान तो बन गये अब बस्ती कहा से लाऊँ तब माता ने कहा कि भीनमाल जाकर अपने भाई से बस्ती की मॉग कर तभी उपलदे ने अपने भाई से बस्ती देने को कहा तो उसने मना कर दिया दौनो भाइयो में युद्द होने लगा मगर माँ की कृपा से उपलदे का बालबाका भी नही हुआ उसने अपने भाई को पकड लिया , और उसी समय उसने भीनमाल का आधा पट्टा अपने कब्जे में कर लिया ,इसी प्रकार भीनमाल ने ओसियॉ नगर की स्थापना की जिसको ओसियॉ माता या सच्चियाय माता के नाम से माता का मंदिर जाना जाता है ।।
ओसियॉ के पहाडी पर अवस्थित मंदिर परिसर में सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रसिद्द सच्चियाय माता का मंदिर १२ वीं शताब्दी के आसपास बना
यह भव्य और विशाल मंदिर महिषमर्दिनी ( दुर्गा) को समर्पित है , उपलब्ध साक्ष्यो से पता चलता है कि उस युग में जैन धर्मावलम्बी भी देवी चण्डिका अथवा महिषमर्दिनी की पूजा - अर्चना करने लगे थे, तथा उन्होने उसे प्रतिरक्षक देवी के रूप में स्वीकार किया था , परंतु उन्होने देवी के उग्र रूप या हिंसक के बजाय उसके ललित एवं शांत स्वरूप की पूजा अर्चना की , अत: उन्होने माँ चामुण्डा देवी के वजाय सच्चियाय माता ( सच्चिका माता ) नाम दिया था , सच्चियाय माता श्वेताम्बर जैन सम्प्रदाय के ओसवाल समाज के साथ परमारों ( पंवारो ) सांखला , सोढा राजपूतो की ईष्टदेवी या कुलदेवी है , सच्चियाय माता के मंदिर के गर्भ गृह के बाहर की एक अभिलेख उत्तकीर्ण है जिसमें १२३४ ( ११७८ ई. ) का लेख जिसमें सच्चियाय माता मंदिर में चण्डिका , शीतला माता , सच्चियाय , क्षेमकरी , आदि देवियो और क्षेत्रपाल की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठापित किये जाने का उल्लेख हुआ है , ।।
वंश - अग्निवंश
कुल - परमार
गोत्र- वशिष्ठ
प्रवर - तीन , वशिष्ठ , अत्रि , साकृति
वेद - यजुर्वेद
उपवेद - धनुर्वेद
शाखा - वाजसनयि
प्रथम राजधानी - उज्जैन ( मालवा )
कुलदेवी - सच्चियाय माता
ईष्टदेव - माण्डवराव (सूर्य )
महादेव - रणजूर महादेव
गायत्री- ब्रह्मगायत्री
भैरव - गोरा - भैरव
तलवार- रणतरे
ढाल - हरियण
निशान- केसरी सिंह
ध्वज - पीला रंग
गढ - आबू
शस्त्र- भालो
गाय- कवली गाय
वृक्ष- कदम्ब , पीपल
नदी - सफरा ( शिप्रा)
पक्षी - मयूर
पाधडी - पचरंगी
राजयोगी -

दर्जी समाज के विडियो की लिंक्स-

Free Darji mass marriage programme ,Boliya M.P. (Video Part-1)

दर्जी निशुल्क समूह विवाह उत्सव बोलिया (PART 2)

निशुल्क दर्जी समूह विवाह सम्मेलन,बोलिया(पार्ट 3)


निशुल्क दर्जी समूह विवाह सम्मेलन,बोलिया,video (पार्ट 4)

Glimpses of Damodar Mahila Sangeet

Alpana and Vinod Chouhan in Damodar Mahila Sangeet

Neha and Deepesh Darji in Damodar Mahila Sangeet,Shamgarh


छाया पँवार दामोदर महिला संगीत मे 

Aishwarya chouhan in Damodar Mahila Sangeet
Arpita Rathore in Damodar Mahila Sangeet


Sunita in Damodar Mahila Sangeet

Apurva in Damodar Mahila Sangeet

दामोदर दर्जी समूह विवाह उत्सव शामगढ़ -2017, मे पाणिगृहण संस्कार

Arpita Apurva Sadhna in Damodar Mahila Sangeet

Richa Kumari in Damodar Mahila Sangeet

Inaugaration of Gyan Mandir at Gayatri Shaktipeeth Shamgarh by Dr.Aalok

Soma Parmar In Damodar Mahila Sangeet

Chaya and sisters in Damodar Mahila Sangeet

Video of Pictures from Apurva-Vineet Marriage

Free Darji mass marriage programme ,Boliya M.P. (Video Part-1)

Sadhana Jhabua in Damodar Mahila Sangeet

Darzi mass marriage ,Shamgarh -Video part 3

दामोदर दर्जी सम्मेलन मे विशिष्ट अतिथि सम्मान समारोह,शामगढ़-2017

Darji samuhik vivah sammelan Shamgarh 2014 video clip

Dr Dayaram Aalok's nav grih pravesh.AVI

Damodar Darji Samuhik Vivah Sammelan -2014 ,Shamgarh

Dileep Deshbhakt in Damodar mahila sangeet

डॉ.दयाराम आलोक का जन्म दिवस उत्सव

Soma Ranapur in Damodar Mahila Sangeet

Darji Samaj 9th Samuhik Vivah Sammelan Shamgarh -2017

Sadhana Jhabua in Damodar Mahila Sangeet

Apurva - Vineet Marriage photography video

Glimpses of Damodar Mahila Sangeet

Piyush Solanki Neemuch in Damodar mahila sangeet

Apurva -Vineet Wedding Reception susner

shiv hanuman temple shamgarh

Rajesh Yadav in Darji Sammelan Shamgarh

Gayatri Shakti Peeth Shamgarh Video

Apurva Vineet marrriage reception programme

Ritika Rathore in Damodar Mahila Sangeet

Darji Mass Marriage programme shamgarh -Video

दर्जी सामूहिक विवाह सम्मेलन ,शामगढ़ -Video clip